है कितना मूर्ख मानव ??
बैठा जिस डाल पर
काट रहा वही डाल है
यदि कोई गरीब
उसे समझाएं
उस गरीब की उधेड़
देता खाल है
पैसे कमाने के होड में
भूल गया अच्छा बुरा
काली कमाई की
अब ना संभाल है
पैसों के ढेर पर बैठा
नोच रहा खुद के बाल है
खुद के ही नियम बनाएं
खुद ही उठा रहा सवाल है
–✍️एकता
जिस डाल पर बैठा मानव काट रहा वही डाल

Comments
11 responses to “जिस डाल पर बैठा मानव काट रहा वही डाल”
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Nice
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Thanks
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Very nice and true
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जिस डाल पर बैठा मानव उसी डाल को काट रहा बहुत ही सुंदर प्रस्तुति
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धन्यवाद प्रज्ञा जी
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अति उत्तम बहुत सुंदर पंक्तियाँ
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आपका सादर अभिनंदन
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यथार्थ चित्रण
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धन्यवाद
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सराहनीय प्रयास
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सादर आभार
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