देश का सम्मान

जीवन से भी कीमती, मात्रभूमि का मान
आपस मे लडिए नहीं, मारो मिल शैतान
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जाति पंथ औ लिंग की, मत करिए परवाह
करते प्रेम प्रचार चल, एक जुटता की राह

Comments

2 responses to “देश का सम्मान”

  1. बहुत ही उम्दा लेखन

  2. बहुत सुंदर कविता

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