16 Comments

  1. हर भारतीय 
    नारी क्या सोचती है उसके मन की वेदना को विचारों को आपने अपनी कविता के माध्यम से प्रस्तुत कर दिया है बहुत खूब

  2. अपने डर को अपनी ताकत बनाईये,
    आप सावन पर हैं प्रिया जी, 
    थोड़ा तो मुस्कराईये।
    नारी हैं यह सोच कर मत घबराइए 
    लोग आपको सलाम ठोकें 
    ऐसी पहचान बनाईए ।।

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