विषय – भारतवर्ष की बेटी

” मन की पीड़ा को आपके सामने ला रही हु अपने वाणी को प्रस्तुत करने जा रही हु ”
मैं रूकती नहीं उन इरादों से,
जो कैद कर सके मेरे पाउ ।
मैं भारत वर्ष की बेटी हूं ,
मेरे मन में बसते आजादी के भाव।
अपनी मन की पीड़ा को रख रही हूं,
रख रही हूं अपने दिल की आशाओं को।
मन की बात मन से समझ समझीये,
ऐसे न तोरीयेगा जैसे प तोड़े शिसाओ को।

Comments

16 responses to “विषय – भारतवर्ष की बेटी”

  1. हर भारतीय 
    नारी क्या सोचती है उसके मन की वेदना को विचारों को आपने अपनी कविता के माध्यम से प्रस्तुत कर दिया है बहुत खूब

    1. Priya

      Korsis kiye h apne dar ko panne pe utarne ka…..

  2. Amita

    सुंदर भाव,
    परंतु वर्तनी में शुद्धता की आवश्यकता है।।

    1. Priya

      Ji poem adha hi publish hua….. H

    1. Priya

      जी शुक्रिया…

  3. आपकी कविता तारीफ़ ए क़ाबिल है। कहीं कहीं भाव दिल को छू लिया। 

  4. Priya

    Ji korsis kiye h….

    1. प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता है प्रिया जी। 

  5. Praduman Amit

    नारी के प्रति सुंदर शब्दों में लिखी गई रचना बहुत ही सुन्दर है।

    1. Priya

      Korsis kiye the apke sabdo me korsis ka result dila diya…. बहुत बहुत आभार

  6. अपने डर को अपनी ताकत बनाईये,
    आप सावन पर हैं प्रिया जी, 
    थोड़ा तो मुस्कराईये।
    नारी हैं यह सोच कर मत घबराइए 
    लोग आपको सलाम ठोकें 
    ऐसी पहचान बनाईए ।।

    1. Priya

      Next poem issi se related hoga korsis krege… Thanks suport k liye..

  7. Satish Chandra Pandey

    बहुत सुंदर रचना

    1. शुक्रिया 

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