विरासत

विरासत जिन्दगी की
मिली है जो हमको
समझ पाने में अक्षम
कैसे बतलाये तुमको।
खुली हवा में जीना
स्वचछ सांस लेना
निर्मल था पानी
उसे भी हमने छीना
वारी बिक रही है
वायु बिक रहे हैं
अनमोल खजाना
मिला निःशुल्क जो हमको
लापरवाही कितनी बताये किसको
विरासत जिन्दगी की मिली है जो हमको
समझ पाने में अक्षम कैसे बतलाये तुमको।

Comments

7 responses to “विरासत”

  1. वाह, बहुत सुंदर रचना

    1. Suman Kumari

      सादर अभिवादन सर

  2. अति सुन्दर रचना

    1. Suman Kumari

      सर अभिवादन सर

      1. Suman Kumari

        सादर अभिवादन सर

  3. सुन्दर भाव 

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