जिम्मेदारी में आलस न करो

अपनी सुरक्षा खुद करो
औरों के भरोसे मत रहो
मदद नमक की तरह ही लो
जिम्मेदारी में आलस न करो

सुरक्षा कर्मी लगाकर अगर निश्चिंत हो होते हो
इंदिरा की तरह कीमती जिंदगी खोते हो…

विदेशी सेना के सहारे में
अगर देश की सेना ने आराम किया
वही हश्र होता है जो
देश अफगानिस्तान का हुआ

आश्रित हो जाना पूरी तरह इक कमजोरी है
कमजोरों की जिंदगी तो
सदा से दूभर ही है…

इक शस्त्रधारी से जहां
सैकड़ों डरपोक डर जाते हैं
सजग सशक्त निडर तो
अस्त्रधारी को भी हराते हैं…

अपनी सुरक्षा खुद करो
औरों के भरोसे मत रहो
मदद नमक की तरह ही लो
जिम्मेदारी में आलस न करो

Comments

4 responses to “जिम्मेदारी में आलस न करो”

  1. बहुत सुन्दर रचना

  2. Rajeev Ranjan Avatar
    Rajeev Ranjan

    साभार धन्यवाद

  3. लाजवाब अभिव्यक्ति

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