अवनि तुम माता हो सबकी

अवनि तुम माता हो सबकी
तुम जीवन टिक पाया है,
तुम पर जीवन हो पाया है,
लाखों-अरबों प्राणी तुम पर
करते हैं माँ बसेरा।
जीवन के नयनों का उनके
होता यहीं सवेरा।
भोजन, आश्रय सब कुछ देती
करती खूब व्यवस्था,
सूक्ष्म कीटों से हाथी तक
सबकी खूब व्यवस्था,
अवनि तुम माता हो सबकी।

Comments

2 responses to “अवनि तुम माता हो सबकी”

  1. बहुत सच्ची पंक्तियाँ

    1. बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी

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