प्राणों  में  मृदुरस  आज  घोल। 

वन्दे भारत। 
प्राणों  में  मृदुरस  आज  घोल। 

नित सजल,करुण तेरी चितवन 
तेरे  पद  –  पंकज   धोता   घन 
परिमल  भरता   स्मित   चंदन। 
      देता अमृत  पिक  मृदुल  बोल। 
       प्राणों में  मृदुरस  आज  घोल। 

अंचल  में  रंग   सुनहरा   भर
तारों के  अगणित  मोती   धर
दे    इंद्रधनुष  नीला -अम्बर। 
        विस्मित हो देखे फिर खगोल 
        प्राणों में  मृदुरस आज   घोल। 

दे-दे  हिमांशु  निज  शीतलता 
वो प्रभा-पुंज मुख पर तिरता
विस्तृत नभ की सब नीरवता। 
       भर अमिय अंक सुखकर,अमोल।
        प्राणों में  मृदुरस  आज  घोल। 

गाये खग –कुल होके विभोर
शीतल मलयानिल की झकोर
बहती सरिता भर कोर – कोर।
तरु-पल्लव नर्तन डोल- डोल
        प्राणों में मृदुरस  आज  घोल। 

जुगनू  उड़ता  हो  तिमिर  चीर
रौशन  जग  करने  को  अधीर
हरता निशि की वह व्यथा,पीर। 
           पंखों से तम को  रहा  तोल
           प्राणों में मृदुरस आज घोल। 

मन   रहे   नहीं    कोई    संशय 
बल, बुद्धि, शान्ति, साधन संचय
हर  दिशा  मातृ – भू  तेरी   जय। 
हो बन्धु – बन्धु में  मेलजोल 
  प्राणों में मृदुरस आज  घोल। 

अनिल मिश्र प्रहरी।

Comments

6 responses to “प्राणों  में  मृदुरस  आज  घोल। ”

  1. Geeta kumari

    भारत देश की शान में बहुत सुन्दर रचना

  2. सुन्दर रचना

  3. vikash kumar

    मन रहे नहीं कोई संशय
    बल, बुद्धि, शान्ति, साधन संचय
    हर दिशा मातृ – भू तेरी जय।
    हो बन्धु – बन्धु में मेलजोल
    प्राणों में मृदुरस आज घोल।

    अनिल मिश्र प्रहरी।

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