ARJUN GUPTA (AARZOO)'s Posts

इंतज़ार

इंतज़ार ये नन्हा सा पौधा, जो फूट निकला है धरती की गोद से, कितना नाज़ुक है ये कितना सौम्य,कितना पवित्र, किसी नन्हे बच्चे की तरह आंखें खोलता,बंद करता अपने आस पड़ौस दूसरे पेड़ पौधों को देखता, फिर महसूस करता कि… मेरे पत्ते इतने कम क्यों हैं? मेरी टहनियां इतनी कम क्यों हैं? मुझपे न फूल हैं न फल, मैं इतना छोटा क्यों हूँ? इतनी हसरतें, इतनी ख़्वाहिशें आँख खुलते ही दिल में! और मुझे लगता था कि हम इंसान शाय... »

पहचान क्यों अलग सी है..

जय हिन्द साथियो पहचान क्यों अलग सी है सारे जहान में सब सोचते ऐसा है क्या हिन्दोस्तान में है सभ्यता की मूल ये हिन्दोस्तां मेरा कितनी मिठास मिलती हमारी ज़ुबान में हर रूप में हैं पूजते नारी को हम यहाँ तुमको खुदा मिलेंगे हमारे ईमान में ख़ुश्बू उड़े हवा में सुबह शाम पाक सी गीता सुनाई देती यहाँ पर क़ुरान में यूँ लाँघना कठिन है फ़सीलों को भी यहाँ बारूद भर दिया है यहाँ हर जवान में है केसरी सफेद हरे रंग से बना ... »

मेरी जान है भारत

आदाब जहाँ के वास्ते बेशक कोई वरदान है भारत फरिश्तों के लिए भी आरज़ू-अरमान है भारत यहीं जन्मी है दुनियाँ की पुरानी सभ्यता यारो सभी वेदों पुराणों का कोई सम्मान है भारत क़सीदा हो, रुबाई हो, ग़ज़ल हो यां कोई नग़मा सभी दानिशवरों का एक ही उन्वान है भारत कभी है खीर की ख़ुश्बू कभी मीठी सेवइयां हैं कभी दीपावली है ये कभी रमजान है भारत मेरा मशरिक़ में हो घर याँ ठिकाना हो मेरा मग़रिब रहूँ चाहे कहीं पे भी मेरी पहचान ह... »

वतनपरस्ती के अशआर

आदाब जहाँ के वास्ते बेशक कोई वरदान है भारत फरिश्तों के लिए भी आरज़ू-अरमान है भारत यहीं जन्मी है दुनियाँ की पुरानी सभ्यता यारो सभी वेदों पुराणों का कोई सम्मान है भारत क़सीदा हो, रुबाई हो, ग़ज़ल हो यां कोई नग़मा सभी दानिशवरों का एक ही उन्वान है भारत कभी है खीर की ख़ुश्बू कभी मीठी सेवइयां हैं कभी दीपावली है ये कभी रमजान है भारत मेरा मशरिक़ में हो घर याँ ठिकाना हो मेरा मग़रिब रहूँ चाहे कहीं पे भी मेरी पहचान ह... »

Ghazal

जय हिन्द साथियो पहचान क्यों अलग सी है सारे जहान में सब सोचते ऐसा है क्या हिन्दोस्तान में है सभ्यता की मूल ये हिन्दोस्तां मेरा कितनी मिठास मिलती हमारी ज़ुबान में हर रूप में हैं पूजते नारी को हम यहाँ तुमको खुदा मिलेंगे हमारे ईमान में ख़ुश्बू उड़े हवा में सुबह शाम पाक सी गीता सुनाई देती यहाँ पर क़ुरान में यूँ लाँघना कठिन है फ़सीलों को भी यहाँ बारूद भर दिया है यहाँ हर जवान में है केसरी सफेद हरे रंग से बना ... »

मौजूदा हालात पे ग़ज़ल

आदाब मुफ़लिसों को क्यों मिली है जिंदगी बारहा ये सोचती है जिंदगी ज़िंदगी जैसे मिली ख़ैरात में ऐसे उनको देखती है जिंदगी इस जहाँ में बुज़दिलों के वास्ते बस क़ज़ा है, तीरगी है ज़िन्दगी ख़ुदकुशी से क्या मिला है आज तक सामना कर कीमती है जिंदगी बंद आँखों से कभी सुन सरगमें इक सुरीली बाँसुरी है जिंदगी दिल में हो उम्मीद की कोई किरन रौशनी ही रौशनी है जिंदगी हर घड़ी तैयार रहना ‘आरज़ू’ इम्तिहानों से भरी है जि... »

बेटियों पर एक ग़ज़ल

ग़ज़ल दौलत नहीं, ये अपना संसार माँगती हैं ये बेटियाँ तो हमसे, बस प्यार माँगती हैं दरबार में ख़ुदा के जब भी की हैं दुआएँ, माँ बाप की ही खुशियाँ हर बार माँगती हैं माँ से दुलार, भाई से प्यार और रब से अपने पिता की उजली दस्तार माँगती हैं है दिल में कितने सागर,सीने पे कितने पर्बत धरती के जैसा अपना, किरदार माँगती हैं आज़ाद हम सभी हैं, हिन्दोस्ताँ में फिर भी, क्यों ‘आरज़ू’ ये अपना अधिकार माँगती हैं... »

ग़ज़ल। सभी को मौत के डर ने ही..

आदाब सभी को मौत के डर ने ही ज़िंदा रक्खा है ख़ुदाया फिर भी ये इंसाँ इसी से डरता है हमारी साँस भी चलती उसी की मर्ज़ी से ही जहाँ में पत्ता भी उसकी रज़ा से हिलता है हमेशा आस का दीपक जला के रखना तुम अँधेरे रास्ते है, तू सफ़र पे निकला है वो सारे चल पड़े थे, तिश्नगी लिये अपनी किसी ने कह दिया सहरा में कोई दरिया है ज़मी पे अजनबी भी अजनबी नहीं होता बुलंदी पे जो है अक्सर अकेला होता है ये ज़िंदगी है, इसे नासमझ सा बन... »

(मैं तेरी पहचान हूँ)

(मैं तेरी पहचान हूँ)

(पहचान) मैं कभी तेरे होटों की मुस्कान हूँ तो कभी तेरी साँसों की पहचान हूँ तेरे दिल में गूँजती घंटियों का शोर तो कभी शाम को मस्जिद की आज़ान हूँ मेरी खुशबू है तेरे हर अलफ़ाज़ में मैं कभी गीता, बाइबल तो कभी कुरान हूँ तू चाहता है जिस पिण्ड को पवित्र करने को मैं वही कुम्भ और अमृत सरोवर का स्नान हूँ मैं खेलता हूँ इन बाग़ बगीचो और जंगलों में मैं ही तेरे सुनहरे खेत और खलियान हूँ तू सराबोर है जिस आधुनिकता ... »