Ghazal

जय हिन्द साथियो

पहचान क्यों अलग सी है सारे जहान में
सब सोचते ऐसा है क्या हिन्दोस्तान में

है सभ्यता की मूल ये हिन्दोस्तां मेरा
कितनी मिठास मिलती हमारी ज़ुबान में

हर रूप में हैं पूजते नारी को हम यहाँ
तुमको खुदा मिलेंगे हमारे ईमान में

ख़ुश्बू उड़े हवा में सुबह शाम पाक सी
गीता सुनाई देती यहाँ पर क़ुरान में

यूँ लाँघना कठिन है फ़सीलों को भी यहाँ
बारूद भर दिया है यहाँ हर जवान में

है केसरी सफेद हरे रंग से बना
ऊँचा रहे तिरंगा सदा आसमान में

बस खुशनसीब लिपटें तिरंगे में ‘आरज़ू’
कर जाते नाम भी अमर दोनों जहान में

जय हिंद
जय जवान,जय किसान,जय विज्ञान

Arjun Gupta (Aarzoo)


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4 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - August 15, 2020, 3:02 pm

    Good

  2. Satish Pandey - August 15, 2020, 8:24 pm

    जय हिंद

  3. Pragya Shukla - August 15, 2020, 11:53 pm

    behtarin Kavita

  4. ARJUN GUPTA (AARZOO) - October 11, 2020, 5:56 pm

    Bahut baHut shukriya huzur.

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