पहचान क्यों अलग सी है..

जय हिन्द साथियो

पहचान क्यों अलग सी है सारे जहान में
सब सोचते ऐसा है क्या हिन्दोस्तान में

है सभ्यता की मूल ये हिन्दोस्तां मेरा
कितनी मिठास मिलती हमारी ज़ुबान में

हर रूप में हैं पूजते नारी को हम यहाँ
तुमको खुदा मिलेंगे हमारे ईमान में

ख़ुश्बू उड़े हवा में सुबह शाम पाक सी
गीता सुनाई देती यहाँ पर क़ुरान में

यूँ लाँघना कठिन है फ़सीलों को भी यहाँ
बारूद भर दिया है यहाँ हर जवान में

है केसरी सफेद हरे रंग से बना
ऊँचा रहे तिरंगा सदा आसमान में

बस खुशनसीब लिपटें तिरंगे में ‘आरज़ू’
कर जाते नाम भी अमर दोनों जहान में

जय हिंद
जय जवान,जय किसान,जय विज्ञान

Arjun Gupta (Aarzoo)

Comments

15 responses to “पहचान क्यों अलग सी है..”

  1. Virendra sen Avatar
    Virendra sen

    शानदार

    1. ARJUN GUPTA (AARZOO) Avatar
      ARJUN GUPTA (AARZOO)

      शुक्रिया हुज़ूर

  2. Prayag Dharmani

    Nice Poetry Lines

    1. ARJUN GUPTA (AARZOO) Avatar
      ARJUN GUPTA (AARZOO)

      Thanx a loy

    1. ARJUN GUPTA (AARZOO) Avatar
      ARJUN GUPTA (AARZOO)

      हार्दिक आभार अभिनंदन

    1. ARJUN GUPTA (AARZOO) Avatar
      ARJUN GUPTA (AARZOO)

      शुक्रिया हुज़ूर

    1. ARJUN GUPTA (AARZOO) Avatar
      ARJUN GUPTA (AARZOO)

      जी शुक्रिया

  3. आप बहुत ही अच्छा लगते हो परंतु आपकी कविताओं का इंतजार अधिक समय तक करना पड़ता है

    1. ARJUN GUPTA (AARZOO) Avatar
      ARJUN GUPTA (AARZOO)

      जी जल्दी आने की पूरी कोशिश रहेगी

  4. ARJUN GUPTA (AARZOO) Avatar
    ARJUN GUPTA (AARZOO)

    आप सभी का दिल से शुक्रिया।
    बहुत मशकूर हूँ आपकी मुहब्बत के लिए

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