“कटार”

इल्ज़ामो की तलवार चली है हम पर बेबुनियाद मुकदमे चले हैं हम पर कोशिश बहुत की पर ना बचा पाये खुद को यार ने ही…

“रिश्वतखोर”

रिश्वत ————— रिश्वत लेकर ही काम करते हैं कुछ लोग और धर्मात्मा बनते हैं कुछ लोग यूँ उछल उछल कर अपने परोपकारों का गाना गाते…

बुरा वक्त था…

अब कब तक तुम उसे यूँ ही याद करोगी अपने बेचैन दिल को और बर्बाद करोगी जिंदगी जीने का नाम है उसे यूँ ना गंवाओ…

बूंदें…

टिप-टिप करती हुई बूंदे मन को बहुत भा रही हैं बूंदों की बौछार के साथ तेरा पैगाम ला रही हैं बिजलियों की गड़गड़ाहट सता रही…

“रोटी”

“रोटी” —————– तप्त अंगारों से नहा कर आई हूँ मैं ठंडक की आस मिटा कर आई हूँ मैं बुझा लो अपनी जठराग्नि को तुम्हारी ही…

जी नहीं करता।।

आज सुकून की तलाश करने को जी नहीं करता तुमसे बात करने को भी जी नहीं करता जलते हुए चिरागों में रह लिये बहुत, चिराग…

चांद का मुंह टेढ़ा है ! !

कंबल की अभिमंत्रित प्यासी जटाएं, एकाकीपन में डूब गईं… जिसकी सुगंध वासुकी की स्वांसों को महका रही थी•• तभी कोई अनजानी अन- पहचानी आकृति, बादलों…

हिंदी साहित्यकार एवं आलोचक:- रघुवंश सहाय वर्मा जी

हरदोई के गोपामऊ में जन्मे रघुवंश सहाय वर्मा जी को उनकी जन्मतिथि पर, प्रज्ञा शुक्ला’ की तरफ से शब्दों का सुनहरा गुलदस्ता सप्रेम भेंट:- ————————–…

“स्वाभिमान और झुकाव”

जीवन में स्वाभिमान और झुकाव दोनो जरुरी हैं स्वाभिमान कभी°°° स्वयं का अपमान होते नहीं देख सकता और झुकाव कभी अपमान होने नहीं देता। •••झुकी…

बाँस की तरह

बाँस की तरह सदा तना रहता हूँ मुश्किलों के आगे भी नहीं झुकता हूँ पवन के झोंको के थपेड़े खाकर अनर्गल वार्तालाप और प्रपंच में…

मैं समय हूँ…!!!

“वक्त” ——— मैं डूबता-सा कल हूँ आऊंगा नहीं जकड़ लो बांहों में फिर आऊंगा नहीं जो भी करना है निश्चय कर तुम आज ही करो…

“सैनिक की मोहब्बत”

लिफाफे में बंद करके कुछ शिकायतें भेजती हूँ उनको तुम्हारे पास अभिलाषा है तुम तक पहुंचेंगी मेरी चिट्ठियां और मेरे मन की बात सुनवाई होगी…

तबाह हो गए…

दुश्वार हो गया जीना अब तो काटों से छिल गए तलवे अब तो। मोहब्बत में हुए हम तबाह लोग कहते हैं, हम बन गए शायर…

चरित्रहीन

तड़पाने के अलावा और तुमने किया ही क्या है बार बार मुझको चरित्रहीन कहा है ये कैसी मोहब्बत है तुम्हारी ? जिससे प्यार किया उसी…

भावनाओं के भवसागर में

सर्वस्व न्योछावर कर दिया तुझ पर मोती, माणिक्य पन्ना, हीरा हृदय की विक्षिप्त भावनाएं, क्रूर सम दृष्टियों से दृष्टिपात करके यौवन की प्रथम वर्षगांठ पर…

नन्हें सुमन हैं

“बाल श्रम निषेध दिवस” —————— नन्हे सुमन हैं इनसे क्यों करवाते हो मजदूरी पढ़ने दो स्कूल में इनको ना करवाओ अब मजदूरी खिलेगे नन्हे पुष्प…

गीत नया गाता हूँ

तेरी कल्पनाओं का कायल हुआ जाता हूँ भावनाओं में तेरी बहता-सा जाता हूँ शब्द तुम्हारे फूटते हैं अंकुरित होकर तेरी स्मृतियों में खोया सा जाता…

“बन्धन में होना बाध्य नहीं”

बन्धन में होना बाध्य नहीं अपितु एक स्वतंत्रता है विचारों की स्वतंत्रता, भावों की स्वतंत्रता, जीवन के अद्भुत अनुभवों की स्वतंत्रता, सागर के विशाल गर्भ…

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