Author: Pragya Shukla

  • दिलों में गर्मी

    दिलों में गर्मी बहुत है
    थोड़ी हवा चल जाये तो अच्छा है

  • अब बहुत हो गया

    अब बहुत हो गया लेती हूँ मैं विदा
    कल फिर लेकर आऊंगी
    कुछ अल्फ़ाजों की लड़ी
    प्रीत से भीग जायेगा तन-मन तुम्हारा
    लग जायेगी आँसूओं की झड़ी।

  • गूलर का फूल

    वो तो गूलर का फूल लगता है
    मेरे दिल का फ़ितूर लगता है ।

    ना शाम लगता है ना सुबह लगता है
    सर्दी की दोपहर वो लगता है ।

    वो तो भीगा गुलाब लगता था
    वो तो भीगा गुलाब लगता है

    मेरा दर्पण तो वही है लेकिन
    चेहरा कितना उदास लगता है ।

    वो तो छूते ही चीख उठता है
    कितना कोमल है फूल टेसू का

    दर्द मेरा बढ़ गया है अब इतना
    फूल से प्यारा शूल लगता है ।

    वो रजनीगंधा है महकता है
    जाने दिन-रात किसके दामन में

    मेरी किस्मत में नहीं है फिर भी
    मुझको मेरा नसीब लगता है ।

  • तुम्हारी चादर में

    तुम्हारी चादर में लिपटे
    कुछ शक के दाग थे।

    तुम मेरी मंज़िल और
    तुम्ही हमराज थे।

    क्या थे दिन और
    क्या लम्हात थे।

    कुछ अंजाम और
    कुछ आगाज़ थे।

    इल्जाम लगा किस्मत और
    हालात पर हम तो,
    बचपन से ही बर्बाद थे।

    सुबह हुई तो देखा
    तकिये पर पड़े सूखे,
    अश्कों के दाग थे।

    वो खिड़कियाँ अब
    बन्द ही रहती हैं ,

    जिनके दीदार के कभी
    हम मोहताज़ थे।

    अर्सा हुआ ना मिले उनसे
    जिनके हुआ करते कभी हम
    तलबगार थे।

  • ज़रा देखूँ तो सही

    जरा देखूं तो सही
    तुम्हारे दिल में उतर कर
    दिल है अभी या दिल है ही नहीं
    दिल है तो उसमें पत्थर हैं
    या मांस के कुछ लोथड़े भी हैं
    एहसास है या है ही नहीं
    मैं हूं या हूं ही नहीं
    या हृदय विहीन हो तुम
    जो मुझसे प्यार नहीं
    मेरा एहसास नहीं
    कोई जज्बात नहीं
    जरा देखूँ तो सही
    तुम्हारे दिल में उतर कर
    मैं हूं या मैं हूं ही नहीं।
    यदि मैं हूँ तो अपने
    एहसास छुपाते क्यूँ हो
    भली महफिल में रूसवा
    कर जाते क्यूँ हो।
    जरा देखूँ तो सही
    मै तुझे स्वीकार हूँ या
    हूँ ही नहीं
    तू गुनहगार है या
    निर्दोष—–
    ज़रा देखूं तो सही

  • दरवाजा खोलना

    उनके आने की खबर से
    मैं यूँ बेचैन हो गई
    खिड़की से देखती रही
    दरवाज़ा खोलना भूल गई

  • पर्त दर पर्त

    पर्त दर पर्त तू खुलता जा रहा है
    ये दिल तुझसे दूर होता जा रहा है

  • किताब जब

    किताब जब खोलोगे
    तुम यादों की
    मेरा नाम सबसे नीचे होगा
    पन्ने जब पलटोगे वफ़ा के
    मेरा ही चेहरा दिखेगा

  • पहले खफ़ा

    पहले खफ़ा थे हम उनसे
    अब वो निभा रहे हैं
    जितना मैं पास जाऊँ
    उतना ही दूर जा रहे हैं

  • वो मुझे यूँ

    वो मुझे यूँ रुला रहा है
    जैसे याद कर रहा है ।
    यूँ देखता है जैसे
    मुझे प्यार कर रहा है ।

  • तेरी अच्छाई

    तेरी एक अच्छाई बताऊँ:-
    अगर तू बेवफा ना होता तो
    मैं शायर ना होती
    कदर खुशियों की कैसे जानती
    जो रात भर ना रोती ।

  • वो मुझे कुछ यूँ

    वो मुझे कुछ यूँ चाहता था
    कि मेरी साँसो से मुझे पहचान लेता था
    एक दिन उसके दोस्तों ने पूंछा
    क्या है तुम्हारी ख्वाहिशे——
    उसने छोटी सी लिस्ट सुनाई
    जिसमें पहला नाम भी मेरा था
    और आखरी भी——
    वो मुझे कुछ यूँ चाहता था—-
    मेरे मुँह से निकले अल्फ़ाज
    मेरे चेहरे से जान लेता था—‘

  • रोक लिया

    रोंक लिया है हमनें
    अपने आप को
    जैसा चाहते थे तुम
    मैनें खुद को बना लिया

  • कली जो

    बहारें आने वाली थीं लेकिन ना आई
    कली जो खिलने वाली थी
    शाख पर ही ना आई

  • मद में

    कौन जाने यहाँ किसको
    सब व्यस्त हैं खुद में
    किसी से क्या शिकायत जब
    तू खुद ही तेरे मद में

  • मद में

    कौन जाने यहाँ किसको
    सब व्यस्त हैं खुद में
    किसी से क्या शिकायत जब
    तू ही खुद ही तेरे मद में

  • ज़ख्म

    छिपा कर ज़ख्म घूमती हूँ
    तेरे दिए हुए
    तड़प उठती है तन्हाई
    किसी का हाथ पड़ने से

  • यादें

    धुँधली यादों की परछायी
    छुपाने की जो कोशिश की
    मिट गई सांसों की रेखा
    लिपट कर आ गयी यादें

  • नामुमकिन है

    भूल जाऊँ मैं सब कुछ
    नामुमकिन है ये
    खुद को भुला सकना मेरे बस में फिर भी है
    तेरा नाम मिटा सकना नहीं बस में नहीं हद में

  • मै से मैखाने

    तेरे इश्क में किया है हमनें
    मै से मैखाने का सफ़र

  • मेरी साँस बाकी

    रात भी खत्म हो गई
    बस तेरा जिक्र बाकी है
    तूने तो मुझे मार डाला
    पर मेरी साँस बाकी है

  • कोशिश नाकाम

    कोशिश नाकाम ही रही
    गज़ब फ़ितूर छाया है
    लगता है क्यूँ ऐसा
    तेरा अक्श आया है

  • लौट आओ

    लौट आओ मुसाफिर
    देर हो चुकी है
    जिंदगी हमेशा मौका ना देगी

  • अम्बर रहा टपक

    बादल गरज़ यूं रहे थे
    के बरस ही जायेंगे
    बिज़ली कड़क के
    हमको तेरी याद दिला रही
    कुछ
    बर्फ के टुकड़े पड़े है
    सड़क पर—–
    बूँद तो बरस रही हैं स्नेहिल
    झीसियाँ थी पड़ रही
    मसल रही थी चैन—
    सब कहीं थी शान्ती
    और था रात का पहर
    जुगनू भीग जाने कहाँ
    छुप गए सभी–
    सब थे स्वप्न में खोये
    अम्बर रहा टपक।
    उफ़ कितनी बर्फ की
    चादर बिछी श्वेत वस्त्र सी
    श्याम- श्याम रात थी
    बर्फ़ में छुपी।

  • इत्मीनान

    इत्मिनान से पढ़िए
    — मेरे दिल के हैं अल्फ़ाज़—
    हर बात का मतलब नहीं होता
    कभी तो दिल से काम लीजिये
    तू ही तू बस नज़र आयेगा
    हर नफ़स ।

  • तेरे शहर में

    तेरे शहर में मेरा कितना नाम हो गया
    तेरे नाम से जुड़कर मेरा चर्चा आम हो गया

  • थक के चूर

    थक के चूर
    —-हो गई है रात—
    बादल गरज़ रहे हैं
    है इतना शोर फिर भी
    जाने कैसे लोग सो रहे हैं

  • जीवन का अवकाश

    अब जीवन का अवकाश रहेगा
    कल से मेरे पास रहेगा
    __________क्षुब्ध होकर
    अपंग से तेरे बोल के टेसू
    अब ना सूखेगे मेरे आँगन में
    ______कुसुम का बंदन
    ना महकेगा प्राणवायु के दामन में
    गलियारों की उड़ती_ _ _धूल
    ना पड़ेगी निर्विघ्न मुख पर
    ____व्यथित मन की
    वेदना को अब ना बूंदे
    महकायेँगी—-‘
    निस्तेज यौवन पर अब
    प्रीतम की छटा ना छायेगी
    सुखद जीवन की कल्पना
    में अब ना दंश आएगा
    निस्पंंदन करती नब्ज़ में
    मेरा अतरंगी अब ना
    गुनगुनायेगा_ __ _ __
    अब ना होगी कोई
    अभिलाषा और ना
    कोई स्पंदन…..
    क्यूँ कि अब से जीवन का अवकाश
    रहेगा……..।

  • ए ज़िन्दगी

    ए ज़िन्दगी अब तेरी
    आरज़ू ना रही
    मेरी सासें इक डोरी सी हैं
    पर मन की वो तिजोरी ना रही
    अब तक तो गनीमत थी पर अब तो
    माँ भी सुनाती है
    तू मेरी थी पर अब मेरी ना रही
    ए ज़िन्दगी अब मुझे
    तेरी ज़रूरत ना रही।

  • हम मुर्दा हैं

    हम मुर्दा हैं या जीवित तुम्हें कोई
    फर्क नहीं
    तुम्हें इस बात का कोई इल्म नहीं
    के हम किस हाल में रहते हैं
    सब दिल का खेल है
    तुम्हें मेरे जीवन की भी खबर नहीं
    मगर तू मेरी हर
    नब्ज़ में धडकता है
    और हर साँस में महसूस
    होता है
    रूबरू होने का मौका नहीं
    देती दुनिया
    पर तू तो हर एहसास में
    रहता है मौजूद
    बस दिल का फर्क है
    तेरा किसी और की खातिर धडकता है
    मेरा तेरे लिये धडकता है

  • ना झूठे थे

    ना झूठे थे मेरे वादे ना झूठी थी
    मेरी कसमें
    तुमने इल्जाम दे देकर
    मेरे दिल को दुखा डाला

  • हरित है वसन

    अम्बर झुका हुआ है
    और वसुंधरा है बसंती
    कोपल की तरह प्रस्फुटित हो रहा है मन
    हर शाख पर खिल रहा है
    सुमन ।
    हर पत्ता बूटा भीगा है लतपत है
    उपवन
    वृन्त से पृथक हो
    झूमता है मन-गगन
    प्राणवायु भर रही है
    लहरों की छुअन
    गीत क्षुभ्ध हैं और
    हरित है वसन

  • खुशी से मेरा पता

    ख़ुशी से मेरा पता दे रही है
    यह कैसी उदासी है
    जो दिल छू रही है
    सब छोड़ गए मेरा साथ
    पर यह नहीं छोड़ती जानती हूं
    यही है मेरी हमराज़
    कोई जिंदगी में नहीं टिका
    पर यह उदासी है मेरे पास
    रात की तन्हाई हो
    चाहे दिन का उजाला हो
    यह उदासी ही है
    मेरी सौगात कैसी उदासी है
    जो रहती है हर वक्त मेरे पास
    यह जानते हुए भी एक दिन मुझे
    छोड़ कर चली जाएगी
    लेकिन फिर कुछ वक्त बाद मेरे वापस आ जाएगी

  • तोहरे प्यार में

    तोहरे प्यार में होखे दीवानी
    बड़ा नीमन लागेले
    कवने जतन से तोहका मनावे
    कुछ ना समझ में आवेले

  • बढ़ी कीमत

    बढ़ी कीमत चुकाई मैने प्यार की
    तुझे रास ना आयी तो मैं क्या करूं

  • बढ़ी कीमत

    बढ़ी कीमत चुकाई मैनें प्यार की मगर
    तुझे रास ना आत
    आयी तो मै क्या करूँ

  • धूप मल ही रहे थे

    धूप मल ही रहे थे
    तुम्हारे प्यार की
    कि तुम तुमने दिल से
    बेदखल कर दिया देखो
    मेरे प्यार की शाम हो गई

  • अफसोस ना कर

    भिगोकर बादाम दूध में
    केसर छिड़क दिया
    खुदा ने कुछ यूं ही
    तुमको बनाया होगा
    अफसोस ना कर तेरा रंग श्याम है
    मैंने कुछ ऐसे भी लोग देखे हैं
    जो दिल के काले होते हैं

  • इल्म नहीं

    मैंने कोई धोखा नहीं दिया तुम्हें
    तुमको ही धोखा हुआ
    अफसोस इस बात का है
    कि तुम्हें इस बात का कोई इल्म नहीं

  • ख्वाहिशों के जुगनू

    ख्वाइशों के जुगनू पकड़कर
    बोतल में बंद कर दिए
    चिराग दिल के बुझाए बैठे हैं
    रफ्ता रफ्ता चल रही हैं सांसें
    सारे ख्वाब छुपाये बैठे हैं

  • आसमान की चादर

    आसमान के चादर में
    लिपटे अनगिनत सितारे हैं
    चांद फिर भी तन्हा है,
    जबकि लाखों उसके दीवाने हैं।

  • ना खालिश होती

    काश! तुम मेरी
    मजबूरियाँ समझ पाते
    जो मेरे दिल में था
    वो कह पाते
    क्यूँ सिमट जाती मेरी
    ज़िन्दगी यूँ कोने में
    क्यूँ दर्द होता मेरे सीने में
    ना हम अपनी मजबूरी का
    हवाला देते
    ना घूंट कर अश्कों का
    प्याला पीते
    रहा करते हम तेरे सीने में
    ना खालिश होती
    यूँ मेरे ज़ीने में ।

  • वो आया था

    वो आया था घर
    बहुत ही शान्त था
    खूबसूरत आंखें और मुस्कुराहट
    जब मेरी तरफ देखा तो
    उन नज़रो में छुपे
    हजारों सवाल थे

  • उधार

    गजब का फ़ितूर है मेरे दिमाग मे भी,

    कौन मिलता है यहाँ उधार लेने के बाद भी।।

  • रंग

    होली के रंग अब फीके न पड़ेंगे।

    हम उनमे रोज महसूस होंगे।।

  • Gair

    आदत नही है कि हर पल मनाये मुझे कोई।

    पर अच्छा नही लगता गैर जताए मुझे कोई।

  • बदल

    तुम क्यो चुप से हो गये हो।

    फिर से कुछ बदल से गये हो।।

  • रब का वास्ता

    मैनें हर रिश्ते को शिद्दत से निभाया है
    जिसने मुझे प्यार किया उसे अपनाया है
    जिसने दिल से जाना चाहा उसे,
    उसे रब का वास्ता भी दिलाया है ।

  • कोरोना वायरस

    तेरा नशा कोरोना वायरस की तरह फैल तो गया
    तू दिल में बिन बुलाए मेहमान की तरह
    आ तो गया मगर कान खोल कर सुन ले
    मेरा प्यार कैंसर है
    मरने के बाद ही जायेगा ।

  • उनका दिल

    😉उनका दिल इतना नादान है
    😘जिसे भी देखता है मोहब्बत हो जाती है 🤐🤐

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