जटायु अंत में आंखें खोल हाथ जोड़ के करे वंदना रोता रोता बोली जटायु अपनी आंखें खोली जली जो पीले तो वह नहीं पीता राम बचा लो दुखी है सीता भक्ति रस में डुबके देखो […]

बड़ा इतराता है जुगनू चांद की धूल को मल कर तेरी तारीफ तो बस इस रात ने की है बेपर्दा कर सके जो अख्ज की भीड़ को इतनी हिम्मत तो बस अफताब ने की है

मेरे जीवन की पहली कविता मेरे गुरु को समर्पित Teachers Day स्कूल का वह दिन मेरे जीवन का एक सबसे खास दिन बन गया जिसे मैं कभी भुला नहीं सकती उस दिन मुझे पहली बार […]

शक्ति संपन्न की जनक दुलारी जब तुमने लांछन लगाया था चाहती प्रलय वो ला सकती थी धरती की गोद में सो जाती है शुक्र मनाओ कि वो रो जाती है धरती पर एक कण बचता […]

मेरे देश मुझे तेरे आंचल में अब रहने को दिल करता है जो जख्म दिए अंगारों ने उसे सहने को दिल करता है कांटो पर जब तू चलता था हम चैन से घर में सोते […]

💐 शायरी 💐 पंछियों के बगीचे आसमान में होते हैं बुद्धिमानी के चर्चे जहान में होते हैं उठाकर जो चलते हैं ज्ञान की वैशाखी हजारों सितारे उसकी शान में होते हैं

आज मैं खुश हूं सभी बुराई पोंगल पर्व में झोंक जलधर फाटक आज ना बंद कर पतंग ना मेरी रोक सजि पतंग वैकुंठे चली थी अप्सरा संग करे होड़ रंभा मेनका झांक के देखे किसके […]

आज मैं खुश हूं सभी बुराई पोंगल पर्व में झोंक जलधर फाटक आज ना बंद कर पतंग ना मेरी रोक सजि पतंग वैकुंठ चली थी अप्सरा संघ करे होड़ रंभा मेनका झांक के देखे किसके […]