तेरी कश्ती मेरी कश्ती   बस इतनी सी तो रवानी है हर ज़िन्दगी की कहानी है सब कागज की कश्ती है और ख़ुद को पार लगानी है   दिखती सब अलग सी हैं असल में […]

वैराग-चित्‌ संपदा   कर पाए जब तूं दिल से प्रति सुख और दुख के, एक समान उपेक्षा  कर पाए जब अंतर मन से विभिन भ्रांतियों पर, चिरकाल विजय  कर पाए जब यह अनुभूति ना इधर […]

गुरु – महिमा   यह रचना है , गुरु-देव की महिमा का गुनगान , वो ख़ुद के चित्‌ में है अन्तहीन , जिनकी परिभाषा है असीम , ऋषि की विशिष्टताओं का पैग़ाम  जो देकर हमको […]

धीरे से उठाना    सदियों से गह्न निद्रा में , है सोया यह समाज़ , धीरे से उठाना  युगों का अंधकार समेटे , है सोया यह समाज़ , धीरे से उठाना    इसको सुबह की […]

ज़िंन्दगी एक दिन की   मेरा हर सुबह मौत के गर्भ से ख़ुद को जन्म देना हर रात ढले अपने ही कंधों पे ख़ुद को मरघट ले जाना उस मंदिर के आँगन में, ख़ुद को खुद […]

अर्जुन की राह    मन मेरा शंकित हो कहता , अर्जुन मैं भी हो जाता , गर सारथी मेरा कृष्ण हो पाता , जीवन मेरा भी तर जाता , गर कृष्ण को मैं ढूंढ़ पता  […]

मृत्यु – एक पड़ाव   अंधकार नही , जीवन का द्वार है मृत्यु  भय नही , उससे मिलने की राह है मृत्यु    होता तात्पर्य मृत्यु का मिटना , पर मिटता यहां कुछ भी नहीं […]

ख़ुद को कर्म–पथ पे जिवा, धर्म–पथ भी निभाना है धर्म–पथ पर चलते हुए, भूलों को राह दिखानी है अपने तन की पीर भुला, औरन की पीर घटानी है जिनके अपने भूल चुके, अपना उन्हेँ बनाना है हार चुके मनों को , जीत की राह दिखानी है   नाम, वैभव, वित की चाह भुला, परार्थ की राह अपनानी है लोग जो तम में बस्ते है, दिल में उनके दीपक की लो जलानी है ना–उम्मीदी से भरे दिलों को, उम्मीद की किरणों से सजाना है जिन्हें लोग तुछ मान चुके, सम्मान उनका लौटाना है सबके दिलो में सम्मानता ला, भिन्नता को दफनाना है   यह जो मेरा जीवन है , यह कर्म–धर्म का जीवन है यूई कर्म–धर्म की राहों को, अब सहर्ष निभाना है तन–मन से अपना इस राह को, मानव–धर्म को नयी ऊँचाई दिलाना है                                       […]

कर्म–पथ  कर्म–पथ पर चलना है, कोई दुरमति राह अपनानी नहीं मिलेगी उलझी डगर यहां, इसमें कभी घभ्ह्रना नहीं बड़ते हुए कठिन राहो पर, भूले से कभी उक्ताना नहीं मंज़िल अपनी पाए बिना, मन से कभी […]

अधूरे ख्वाब   थे ख्वाब जो चुन-बुन सजाए हमनें पा मुझको तन्हा , बहुत तड़पाते हैं .   कारवाँ तेरी यादों का लंबा है , या मेरे ग़मों की रात गहरी है , दशकों बीते, […]

ए ज़िन्दगी    कैसे शिकायत करूँ तुझसे खुदा की बंदगी पाई तुझसे बस तुझमें सिमटा रह्ता हूँ हर पल तेरे ही संग रहता हूँ   कभी टेडी मेडी लकीरों में कभी रंग भर उन्ही लकीरों […]

मुझे याद रहा,  तुम भूल गए  कहने को दो दिल चार आँखे हम, थी एक रूह में बस्ती जान हमारी कहने को दिया और बाती हम, थी बस लौ ही पहचान हमारी   मदमस्त हवाओं के झोंकों से, थे लहराते गाते जज़्बात हमारे, उतार सजाया आस्मानो में, थे सपने जो जनमें पलकों तले हमारे   कुछ यूँ खाईं थी क़समें हमने, हर हाल में प्यार निभाएँगे मिल पाए तो ज़िन्दा हैं, ना मिल पाए तो यादों में निभाएँगे   हुए गर तन से ज़ुदा तो क्या, ज़ुदा ना मन से कभी हो पाएँगे गर साँसें छोड़ जाएँ साथ तो क्या, जन्मो का साथ निभाएँगे   बरसों से हम उसी मोड़ पे अटके, राह जहां से तुम बदल गए मोहब्बत को नए मायने दे कर, उन मायनों को ही तुम बदल गए   उठा फर्श से अर्श पे बिठा हमको, अपना अर्श ही तुम बदल गए वफाएँ लेती थी तुमसे सबक वफ़ा का, अपना सबक ही तुम बदल गए   जब मुझको सब यह याद रहा, कैसे तुम सब भूल गए मर के भी यूई भूल ना पाया, […]

अच्छा है , जितना जल्दी जान लो काले कर्म जितने किये यहाँ हैं, अकेले देना हिसाब वहाँ हैं,   खातिर जिनकी किये कुकर्म यहाँ, उनमें होगा ना कोई संग वहाँ