इश्क–ए–खुदाई भी कैसा सौदाई है खुदी ख़ुद में घोल ख़ुद को ही पिलायी है
इश्क–ए–खुदाई भी कैसा सौदाई है खुदी ख़ुद में घोल ख़ुद को ही पिलायी है
इश्क–ए–खुदाई भी कैसा सौदाई है कैद–ए–खुदाई में ना कुंडी है ना पहरा है
इश्क–ए–खुदाई भी कैसा सौदाई है ख़ुद को ख़ुद में ख़ुद ही क़ैद दिलाई है
इश्क–ए–खुदाई भी कैसा सौदाई है लाज–शर्म–हया–तेह्ज़ीब इसने भुलाई है
इश्क–ए–खुदाई भी कैसा सौदाई है जग की बेजड़–सोचें इसने छोडा़ई हैं
इश्क–ए–खुदाई भी कैसा सौदाई है मन डोर झूम के यूँ तुझमें बंधायी है
माना के यह राह् है कुछ जटिल समाने का मुझमें है इरादा गर अटल तो मुश्क़िल हर पार तूँ कर जाएगा काँटों पे चल समा मुझमें जाएगा
दहक रही है जो आग तुझमें मिलेगा सकून उसे मिल मुझमें सिमटने की मुझमें तेरी बेकरारी है मुझे अपनी ख़ुदाई से भी प्यारी
हूँ मैं जो रौशनी है तूँ भी वही रौशनी हूँ तूँ जो रौशनी है मैं भी वही रौशनी
ज़िन्दगी ना थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी इस ज़िन्दगी के बाद भी यूई के बुलंद हौंसलों पे दुश्मन भी इतराते हैं
ज़िन्दगी ना थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी इस ज़िन्दगी के बाद भी सामने मेरे आने से अब तूफान भी घभराते हैं
ज़िन्दगी ना थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी इस ज़िन्दगी के बाद भी लिया है सीख रुख पलट बाधाओं के हर हाल में जीना हमने
ज़िन्दगी ना थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी इस ज़िन्दगी के बाद भी लिया है सीख अवरोधों को सर करना हमनें
ज़िन्दगी ना थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी आस्मानी अरमानो के ना थे पंख हमारे, जैसे तुम्हारे
ज़िन्दगी ना थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी आँखों में ना थे सपने रंगीन हमारे, जैसे तुम्हारे
ज़िन्दगी ना थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी बाज़ूओं को ना था कोई सहांरा, जैसा तुम्हारा
ज़िन्दगी ना थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी बचपन ना था बचपन हमारा, जैसा तुम्हारा
ज़िन्दगी ना थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी मजबूरियाँ थी अजब सबकी हमारी, ना जैसी तुम्हारी
ज़िन्दगी ना थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी दीवारें थी कच्ची कमजोर हमारी, ना जैसी तुम्हारी
ज़िन्दगी ना थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी पक्की छत ना थी सर पे हमारी, जैसी तुम्हारी
जो हूँ मैं वह जिंदा रंगों-छंदों मैँ, जो नहीं मैं वह दुनियावी धंधो में
जो हूँ मैं वह हर पल शिल्पकार है, जो नहीं मैं वह मुर्दा बेकार है
जो हूँ मैं वह अन्दर से हूँ सुंदर, जो नहीं मैं वह बाहर हूँ आडंबर
जो हूँ मैं वह है सबका सदा, जो नहीं मैं वह ना किसी का सगा
जो हूँ मैं वह पूर्ण एह्सास हूँ, जो नहीं मैं वह शून्य का वास हूँ
जो हूँ मैं वह तो है मेरे सुकर्म, जो नहीं मैं वह थे मेरे दुष्कर्म जो हूँ मैं वह सबका मीत है, जो नहीं मैं वह ख़ुद का गीत है
जो हूँ मैं वह हूँ हवाओ में, जो नहीं था मैं वह है चिताओ में जो हूँ मैं वह है सब जगह, जो नहीं मैं उसकी ना कोई जगह
जो हूँ मैं वह है स्दीवि यहीं, जो नहीं मैं वह था कभी नहीं जो हूँ मैं बचा वह तो है असल, जो नहीं बचा वह था नकल
पल – पल बदलती–रचती–घटती इस दुनिया मॆं , मन कैसे कहे , तुझे पा ही लिया , है यूई जानता अब , था जो कल , है वोह आज नहीं , है जो आज , […]
पल – पल घटता बहुत कुछ यहां , जो रिश्ते कल बुने , देखा उनका अंत आज यहीं , ख्वाब नये जो देख रहा , होगा उनका भी अंत यहीं
पल – पल रचता यहां कुछ नया , जो था कल तक सच , जिंदा वोह आज नहीं , है लगता जो आज सच , मौत उसकी कल यहीं
पल – पल बदलता सब कुछ यहां , जो कल था तूं , है वोह आज नहीं , है जो आज तूं , होगा वोह कल नहीं
ਅਜ ਦਾ ਮੁਬਾਰਕ ਦਿਨ ਦੋਸਤੋ ਅਜ ਪੋਹੁੰਚ ਨੀ ਸਕਿਆ , ਏਹਦਾ ਅਫਸੋਸ ਏ ਮੇਨੂੰ I ਪਰ ਨਾ ਪੋਹੰਚ ਕੇ ਭੀ , ਤੁਹਾਡਾ ਹਿੱਸਾ ਆ I ਸਚ ਤਾ ਏਹਿ ਏ , ਮੈ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ […]
ਠੰਡ ਦੇ ਮੋਸਮ ਦੀਆਂ ਪਿਆਰੀਆ ਨਿਸ਼ਾਨੀਆ, ਸਾੰਭ ਸਾੰਭ ਰਖੀਆ ਮੈ ਪੂਰੀਆ ਜਵਾਨੀਆ, ਵਿਜੇ ਦੇ ਦਿਲ ਤੇ ਲਿਖੀਆ ਜਿਨਹਾ, ਨਿਘੇ ਪਿਆਰ ਦੀਆ ਕਿਨੀਆ ਕਹਾਨੀਆ I
ਨਿਘੀ – ਨਿਘੀ ਠੰਡ ਮੇਰੇ ਪਿੰਡ ਦੀ , ਨਿਘੀ – ਨਿਘੀ ਠੰਡ, ਨਿਘੇ – ਨਿਘੇ ਪਿਆਰ ਦੀ , ਅਵਾਜ਼ ਬਣ ਜਾਂਦੀ ਏ I ਭਾਪਾ ਜੀ ਦਾ ਮੈਨੂੰ ਭਰ ਸਰਦੀਆ, ਸਾਇਕਲ ਤੇ ਬਿਠਾ ਪਹਲੀ […]
ਮੇਰੀ ਹੱਟੀ ਅਨਮੋਲ ਏਹਦਾ ਨਹੀਓ ਕੋਈ ਮੋਲ ਵਿਜੈ ਨੂੰ ਕਹਿਦੇ ਨੇ ਵਪਾਰੀ ਹੈ ਏਹ ਸਿਰਫ ਰੂਹ ਦਾ ਲਿਖਾਰੀ
ਜੇ ਤੈਨੂੰ ਤਨ ਤੇ ਏ ਮਾਣ ਤਾ ਕੋਈ ਹੋਰ ਹਟ ਪਛਾਣ ਮੇਰੇ ਮਨ ਨੂੰ ਨਾ ਜਾਣ ਏ ਝੂਠ ਨਾ ਕਮਾਨ
ਮਨਾ ਦੇ ਰਿਸ਼ਤੇ ਸਦਾ ਨਿਭਨ ਸਾਹਾ ਤਾਈ ਤਨਾ ਦੇ ਰਿਸ਼ਤੇ ਕਦੀ ਸਵੇਰ ਨਾ ਵਿਖਾਈ
ਮੇਰੇ ਇਸ਼ਕੇ ਦੀ ਹੱਟੀ ਬਸ ਮਨ ਬਿਕਦਾ ਮੈਂ ਹਾ ਮਨ ਦਾ ਵਪਾਰੀ ਮੇਰਾ ਮਨ ਮਨ ਚ ਹੀ ਰਿਸਦਾ
आँखों से जो बह निकले , वोह दर्द ज़रा से हल्के थे जो दिल ही दिल में द़फन हुए , वोह दर्द यूई के अपने थे …… यूई
याद–ए–बचप्न दिल को मुसकराती है याद–ए–मेह्बूब खून–ए–अश्क रूलाती है ए ख़ुदा मेरा यार लौटा दे या अगले बचपन में पहूँचा दे ..…. यूई
उदास लम्हों की गहराईयों में मैं खामोश महफिलो की रंगीनीयों में मैं खामोश यह खामोशी ही अब यूई की […]
यह रुके हुए आँसुओं का हिज़ाब है या फिर आने वाला कोई सैलाब है […]
इस दर्द में जीने की आदत सी हो गई लगता था उस पल कि मर जायेंगे तेरे बिन अब तो यह मौत ही अपनी ज़िन्दगी हो गई …… यूई
यह नशा वोह नशा इसमे नशा उसमें नशा नशे में नशा सबसे रंगीन नशा रुक जाओ ज़रा इतनी जल्दी क्यों है तुमने वोह नशा चखा ही कहाँ अभी मैंने तुम्हे छुआ ही कहाँ एक पल […]
कभी यहॉ तो कभी वहॉ मेरा यार मुझ्से पूछे कि तुम कहॉ मेरा मन कहे कि तुम ही हो मैं कहाँ
दो इशको का मिलन है यह हमारा इशक है खुदा की तसवीर यह इशक यह तेरा इशक और यह मेरा इशक
है यह तेरा भी इशक और है तो मेरा भी इशक ना कम तेरा इशक ना कम मेरा इशक दो एह्सासो का मिलन है यह हमारा इशक
मेरा इशक तेरे मन में सिमटा हुआ परिंदा तेरा इशक मेरे मन को अपने संग ऊङाता हुआ परिंदा मेरा इशक तेरे आँचल में सिमटी हुई मेरी रूह तेरा इशक मेरी रूह में सिमटी […]
मेरा इशक झील का रुका हुआ पानी तेरा इशक नदी की बहती हुई धारा मेरा इशक वोह आग, जो आग को पानी कर दे तेरा इशक वोह आग, जो पानी को आग कर […]
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