4 liner#3

कर के दरकिनार फासलों को तू बढ़ता जा

तू चढ़ता जा सीढियां वो तमाम

जो हर पल गोल घूम जातीं हैं सताती हैं पर

बताती हैं कि बढ़ना ही जिंदगी है चढ़ना ही जिंदगी है

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10 Comments

  1. Panna - November 14, 2015, 9:22 am

    बहत खूब!

  2. Kapil Singh - November 14, 2015, 4:07 pm

    sach kahe…dil ko choo gayi aapki char lines

  3. Sumit Nanda - November 14, 2015, 8:17 pm

    chadte chadte pata nahi kis unchai pe le jaaegi jindagi
    kya pata choti pe paunch ke bas tanhaai mile

  4. Priya Khanna - November 14, 2015, 11:22 pm

    short but with deep meaning…elegant poetry

  5. राम नरेशपुरवाला - September 12, 2019, 12:56 pm

    Good

  6. राम नरेशपुरवाला - September 30, 2019, 10:12 pm

    वाह

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