Bhukha pyasa nanha sa balak

भूखा प्यासा नन्हा सा बालक,
सड़क किनारे बैठा था वो,
फटे थे तन पर कपड़े उसके,
मांग कर खाना ही फितरत थी उसकी,
ममता उसे नसीब न थी,
मां बाबा कहकर किसी
को पुकारा भी न था,
पडी निगाह एक दिलदार की
उस पर, दिया सहारा
उसने उसे बेटा बना कर,
होते बहुत कम है ऐसे रहमदिल,
सबको अपनी की परी है आजकल,
देता नहीं कोई साथ किसी का,
बस अपना स्वार्थ देखते हैं आजकल |

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9 Comments

  1. Archana Verma - September 20, 2019, 2:04 pm

    bahut accha likha apne

  2. राम नरेशपुरवाला - September 20, 2019, 2:38 pm

    वाह

  3. देवेश साखरे 'देव' - September 20, 2019, 3:07 pm

    बहुत सुन्दर

  4. NIMISHA SINGHAL - September 20, 2019, 9:34 pm

    🙂🙂

  5. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 21, 2019, 3:03 pm

    वाह बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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