सूनी आँखें पथरीली आँखें सूनी राहें पथरीली राहें …… यूई
सूनी आँखें पथरीली आँखें सूनी राहें पथरीली राहें …… यूई
मन आतुर नयी सुबह को सुबह आदत से मज़बूर
ख़ुद से ख़ुद को बहला लिया है यादों में तेरी मन सहला लिया है …… यूई
सुनापन मोहे अपना गया है ज़िन्दा मोहे दफना गया है …… यूई
मोहे अकेला छोड़ गए हो किसके सहारे छोड़ गए हो …… यूई
कौनसे देश तूने उडारी मारी जो तोहे घर की ना थारी …… यूई
शाम ढली है अब तो आ जा या मुझको अपने संग ही ले जा …… यूई
कैसी तूने उडारी मारी मेरी फिर थाह ना मारी . ….. यूई
रात ढली सब लौट आए हैं मेरे माही अब तूँ भी आ जा …… यूई
वफ़ा क्यों ढूँढ़ते हो गुमी हुई है गुमी रहेगी
उड़ते पंछी लौट आए हैं शाम ढली लौट आए हैं …… यूई
दर्द के पंजों में दर्द है
मेरे मन की रज़ा जो तूँ समझ जाएगा दिल में मेरे जगह तूँ अपनी बना जाएगा …… यूई
मेरी डगर मन से तूँ अपना जाएगा पा मुझको हर हाल में तूँ जाएगा …… यूई
क्या लिखता है सब दिखता है इंसा बिकता है
रिश्ते सब रंग के देख् लिए अब पानी की दोस्ती रास आई …… यूई
जब भी अंधेरों ने लूटा है हमको आपके आँचल ने समेटा है हमको …… यूई
अंधेरों ने निभायी दोस्ती हमसे उजालो से कही ज़्यादा हम्से …… यूई
ना जाने कितने टूटे दिलो को दी है पनाह आगोश में अपनी …… यूई
उनकी तकलीफ देखी न गई जब तकलीफ देखी न गई वजह भी पूछी न गई कुछ निशान खामोश है
क्यों भटक गए अकेले राह् में तुम तो शायद बेवफ़ा ना थे …… यूई
अंधेरों सी हमें नफरत ना थी हाँ उजालो से दोस्ती ना हुई …… यूई
वो जलते क्यों है क्या शमा से रिश्ता है
वफाए लेती है सबक वफ़ा का हमसे क्या वफ़ा का सबक तुम सिखाओगे …… यूई
कोई अजनबी छोड़ जाता आवाज़ दबी
ख़ुद से ही नजर चुराते हो तुम ख़ुद को ख़ुद ही जलाते हो तुम …… यूई
किसकी कितनी उम्र वो जाने हम तो ज़िंदगी का हिसाब नहीं करते
अंधेरों ने नही लूटा हमको उजालो नी ही आग लगाई है …… यूई
लोग अंधेरी राहो में गिरते हैं हमने उजालो में ठोकर खाई है …… यूई
दिन के उजालो ने दिखाए वोह रंग भा गए मोहे अंधेरों के अब संग …… यूई
जो उसकी तमन्ना बाकि फिर क्या करना
अंधेरों से अब मोहे डर ना लगे जबसे तेरे प्यार की टूटे धागे …… यूई
तेरी तसवीर जिस मन संग पूरी उतरी नैया उसकी भाव सागर पर फिर उतरी …… यूई
राम नाम जिसने भी धियाया उसने ख़ुद का जीवन पर लगाया …… यूई
कोई रहबर नहीं कोई सहर नहीं अपनी भी खबर नहीं
राम नाम राह् दिखाएगा तोहे जीवन चाह दिखाएगा …… यूई
नीले सपनो में काले से है शुमार अपनों में
नाम राम यू ही नही बलवान शक्ति है वोह सबसे महान . …. यूई
मीरा ने यू भक्ति भाव से नाम धियाया ख़ुद भगवान को भी गद गद कर पाया ….. यूई
उसने की थी शुरू लड़ाई मात मैंने भी कभी न खाई
मीरा ने यू प्यार निभाया तभी तो उसको पूरा पाया ….. यूई
मैंने जीतने की खवाइश की हार खुदबखुद शर्मा गई
यूँ मीरा है क्रिशन नाम की प्यासी बस कुछ यूँ ही हू मैं तेरी भी प्यासी ……. यूई
प्रीत तोरी मोहे ऐसी भाई इसने जीवन नैया पर लगाई ……. यूई
वक़्त पकड़ता लम्हा इस दुनिया में हर इंसा तनहा
जंग इंसानियत की इंसान हो रहे लुप्त
उसके क़दमों की चाप सनाटों को रौंद गई चुपचाप
नफरतें बेहिसाब पहने नक़ाब निकलते जनाब
काश कोई पिंजरा ऐसा होता जो आसमा में टंगा होता
कौन आया कौन गया यही दुनिया
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