मीरा ने यू प्यार निभाया तभी तो उसको पूरा पाया ….. यूई
मीरा ने यू प्यार निभाया तभी तो उसको पूरा पाया ….. यूई
मैंने जीतने की खवाइश की हार खुदबखुद शर्मा गई
यूँ मीरा है क्रिशन नाम की प्यासी बस कुछ यूँ ही हू मैं तेरी भी प्यासी ……. यूई
प्रीत तोरी मोहे ऐसी भाई इसने जीवन नैया पर लगाई ……. यूई
वक़्त पकड़ता लम्हा इस दुनिया में हर इंसा तनहा
जंग इंसानियत की इंसान हो रहे लुप्त
उसके क़दमों की चाप सनाटों को रौंद गई चुपचाप
नफरतें बेहिसाब पहने नक़ाब निकलते जनाब
काश कोई पिंजरा ऐसा होता जो आसमा में टंगा होता
कौन आया कौन गया यही दुनिया
दिखते तो अब जो कभी दिखाई देते पर दिखने जैसे नहीं
कुछ तो था खास कैसे कोई भूले था वो ख़ास
कुछ गहने मैंने देखे सपनों ने पहने
अपनी हर लिबास रखना संभाल कब कैसी जरूरत आ जाएँ
अंदर जिस्म में बैठा मुझ जैसा मेरा दुश्मन
कितना गहरा रिश्तों से समुंदर में सहरा
तौबा मेरी तौबा अपने ग़रूर से अब मेरी तौबा ……. यूई
तौबा मेरी तौबा इश्क से ही अब मेरी तौबा ……. यूई
जिंदा तो अभी ही हुए हैं जबसे तुम्हे जान गए है ……. यूई
भूलाएँ भी ना कभी है भूलती बचपन के दोस्त और दोस्ती ज़िन्दगी थी जिनमें ख़ुद हँसती ……. यूई
एहसान तेरे काफी भूला देंगे हम एक यह एहसान रहेगा याद ह्मे इतनी जल्दी ही बस दिखा दिया अपनी बेवफ़ा रूह का असली दिया ……. यूई
अपने सर की खूब कसमें दी , दिल पे हाथ रख वायदे लिए, के बस अब भूला देना हमको क्या हुआ, कुछ ना कर पाए सब क़समें वायदे भूल गए तुमको ही ना बस भूल […]
सोचा था दिल से भूला देंगे फिर सोचा क्यों दिल से भूला देंगे ……. यूई
भूलना भुलाना लगता था बस यूँ ही जांएगा ज़िन्दगी पाना और गँवाना यूँ ही हो जाएगा ……. यूई
सोचा था इक पल में ही भूला देंगे कुछ भी तो ना कर पाए शाम ढले ……. यूई
बनते थे हम यूँ ही सख्त जान इक पल में ही कर गया बेजान ……. यूई
टूटे आसेँ मेरी बंधाता क्यों है अब भी मुझे रुलाता क्यों है ……. यूई
रूह मेरी में बस गई है खुशबू तेरी या खुशबू तेरी बन गई है रूह मेरी ……. यूई
तुझको लगा नही कभी के कर लिया तुमने झूठा सौदा ……. यूई
हम कर ना पाए बस मोहब्बत का सौदा हमको हर पल लगा यही है सच्चा सौदा ……. यूई
क्या एक खता हमारी तुम माफ ना कर पाए ……. यूई
खौफ-ए-खुदाई कभी भूला ना सके बदला-ए-बेवफ़ाई तुमसे ले ना सके ……. यूई
तमाम बेवफ़ाईया तेरी ओ मेरे यार चुरा ना पाई मेरी वफ़ा ओ मेरे यार ……. यूई
कुछ भी ना हम कभी भूला पाए क्या तुम कभी भी हमें भूला पाए ……. यूई
ज़िन्दगी ने रूह को लुटा है जबसे रूह-ए-ज़िन्दगी हम भरते है तबसे ……. यूई
अंदाज़-ए-ज़िन्दगी दम भरते हैं हमसे खौफ-ए-ज़िन्दगी ना मिलते हैं हमसे ……. यूई
बन खुशी के फूल छा गए हो ज़मीन पे मेरे अप्नी खुशबू से छा गए हो आसमान पे मेरे ……. यूई
अब नही बह्ता लहू रगो में मेरी बहती हैं तू बन खुशबू रगो में मेरी ……. यूई
मसला क्यों अरमानो को तुमने ख़ुद के भरोसा कुछ पल तो रखा होता मुझ पे ……. यूई
एहसान कभी हम जता ना पाए हसरत-ए-दिल कभी बता ना पाए ……. यूई
डर मौत का क्या सतायगा मुझको ज़िन्दा ही दफन किया है खुद् को ……. यूई
कितना भी चाहें हम पत्थर मोम नही होता ……. यूई
मोम तो फिर मोम ही है चाह के भी पथर ना होगा ……. यूई
अपनी बेचैनी और घबराहट की निरर्थकता पर उभरी हुई इस रचना ( गीत) को इसके podcast के साथ प्रस्तुत और share करने बहुत खुशी महसूस कर रहा हूँ …… बेकार की ये बेचैनी है ….! […]
न तुम बदले न मैं बदला वक़्त बदलते दोनों ने देखा सिलसिले बस युँ ही चलते रहे फासलों को बदलते हमने देखा राजेश’अरमान’
न हो गर हमनवां कोई बात नहीं गर हो तो कोई बात जरूर हो
हर राह पर कारवां तो मिला मंज़िलों का ठिकाना न मिला
तेरी आँखों में जब भी देखा कोई ख्वाब सा दबा देखा
जुस्तजू इलज़ाम बन गई जुस्तजू जो खुद को खोने की थी
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.