अपनी  बेचैनी और घबराहट की निरर्थकता पर उभरी हुई इस  रचना ( गीत) को  इसके podcast के साथ प्रस्तुत और share करने बहुत खुशी महसूस कर रहा हूँ  ……   बेकार की ये बेचैनी है ….! […]

सूनी है सब डगर तेरे बिन सूनी है मेरी नजर तेरे बिन सूना है यह शहर तेरे बिन क्यों सब सूना कर छोड़ गए मुझको क्यों अकेला तोड़ गए ….. यूई