दिल की दवात से स्याही लहू का बहता रहा, कभी वक्त ने मुझको लिखा, कभी तारीख अपनी मैं लिखता रहा ।   कभी लिखा बेमुकद्दर दस्ताने-जीस्त अपनी, कभी अस्क बहाती आरज़ूओं को कहता रहा । […]

वो मिला ले नज़र तो इनायत, वो फेर ले नज़र तो शिकायत । वो पत्थर की सही पर, करता मैं उसकी इबादत ।   चखता वो मेरे दिल को देकर अपनी उल्फ़त, बढ़ता है नशा […]

मैं हूँ एक नन्ही कली जरा मुझको तू खिलने देना, होगा तेरा उपकार बड़ा मुझे इस दुनिया से मिलने देना, मैं हूँ एक नन्ही कली जरा मुझको तू खिलने देना, मान बढ़ाउंगी हरपल तेरा इतना […]

तिनके बटोर बनाया आशियाना बर्क ने फिर गिराया आशियाना मेरे हाथों से लिपटी फिर रेखाएं रेखाओं ने फिर बनाया आशियाना          राजेश’अरमान’

अपने ख़्वाबों के लिए कोई रात रखना अपने हिस्से की खुद से मुलाकात रखना मौसम चाहे जैसा बदले जब बदले अपने ही अंदर कोई बरसात रखना             राजेश’अरमान’