हिन्दी-उर्दू कविता

बसंत पंचमी

माघ मास का दिन पंचम, खेतों में सरसों फूल चमके सोने सम। गेहूं की खिली हैं बालियां, फूलों पर छाई बहार है, मंडराने लगी है तितलियां। बहार बसंत की आई है, सुखद संदेशे लाई है। चिड़िया भी चहक रही हैं, हर कली अब महक रही है गुलाबी सी धूप है आई, कोहरे ने ले ली विदाई। पीली-पीली सरसों आने लगी, पीली चुनरी मुझको भाने लगी। नई-नई फसलें आती है, बागों में कोयल गाती है। भंवरे ने संगीत सुनाया है, फूल कहे मैं हूं यहां,... »

पायल को मीठी छम सी

बातें बना रहे हो बेकार में अनेकों चाहत कहाँ है गुम सी पायल की मीठी छम सी। डग-मग कदम चले हैं जिस ओर हम चले हैं नजरों का फर्क क्यों है मन से तो हम भले हैं। चारों तरह सवेरा मन में घिरा अंधेरा, उग आई क्यों निराशा खुद से ही खुद छले हैं। सोते समय जगे हैं जगते समय हैं सोये पाया नहीं है पाना अश्कों में हम गले हैं। तुम भी रहे हो बहका समझे हो क्यों खिलौना मुस्का दो आज फिर से मैं तो हूँ, अब कहो ना। »

*आशा का एक दीप जलाए*

बैठे हैं आशा का दीप जलाए, उम्मीद की लौ मन में लगाए। व्यथा का तिमिर अड रहा, नैराश्य का आंचल बढ़ रहा नेत्र नीर नैनों में आए, प्रेम की दिल में ज्योत जलाए मन के द्वार पर, सजा कर स्वप्नों के तोरण, ढूंढती है आंखें अब आपको आशा का एक दीप जलाए।। _____✍️गीता »

गीत लिखा करती हूं

अपने मन का हर भाव लिखा करती हूं, कभी-कभी दुख तो कभी, अनुराग लिखा करती हूं। छोटी-छोटी मेरी खुशियां लिखने से बड़ी हो जाती हैं। बड़े-बड़े दुख के सागर, फ़िर मैं पार किया करती हूं। कभी हंसाती हूं आपको, अपनी कविता से मैं, कभी दुखित हो कर एकान्त में नेत्र नीर बहा लिया करती हूं। कभी जुदाई में आंखें सूनी, कभी नेह लिखा करती हूं। कभी बुनती हूं ख्वाब सुहाने रातों में, कभी भोर के गीत लिखा करती हूं। हां मैं भी ... »

आर्यन कृष्णवंशी का शायरी संग्रह

1. जमाने की नजरों मे काफिर हैं हम क्योंकि मोहब्बत की मंज़िल के मुसाफिर हैं हम 2. आने दो गर्मी तो पहाड़ पिघल जाएंगे चट्टानों को तोड़कर समुंदर निकल जाएंगे लड़कपन है नौजवानी है अभी कर लेने दो मस्ती कँधों पर भार आएगा तो खुद संभल जाएंगे 3. आज मैं सोच रहा हूं कि आशिकी इतनी अजीब क्यों है ? जिससे मिलना असंभव लगता है वही दिल के करीब क्यों है ! 4. भगवान भी सब कुछ जान लेता है … समय तो बख्शता ही नही कठि... »

बता तो दो

बता तो दो क्यू तुम ऐसे हो, मेरे होकर भी परायों से कमतर हो। यक़ीनन दोष हममें, दुनियादारी की बूझ नहीं आकलन करें कैसे, रिश्ते- नातोंकी समझ नहीं साफ़ कहने की आदत, सुनने की हिम्मत नहीं पर क्या सारा दोष मेरा,तुम पाक वारी जैसे हों बता दो क्यूं तुम ऐसे हो। अपने जो हैं उनकी बातो पे चिलमन डालना कङवी-से-कङवी लब्ज को हंस के टालना इतना ही सीखें हो, कही बातों का गिरह बांधना ये गांठ बेधते मन को, कोई नासूर जैसे ह... »

प्रेम और विज्ञान

एक महान विज्ञानी का कथन है… ‘हर क्रिया की बराबर किंतु विपरीत प्रतिक्रिया होती है’..!! प्रेम करने वाले इस तथ्य के जीवंत उदाहरण हैं…. समाज ने जितनी तत्परता से रचे हैं प्रेमियों को एक दूजे से दूर करने के षड्यंत्र… प्रेम उतने ही वेग से गहरी पैठ बनाता गया है प्रेमियों के हृदयों में…!! वास्तव में विज्ञान के समस्त सिद्धांतों की व्याख्या हेतु प्रेम सर्वोत्तम माध्यम है&#... »

तुम्हारे लिए

यह जीवन मेरा रहा है समर्पित हां बस तुम्हारे लिए। अपनी इच्छाओं के पंखों को अपने ही इन दोनों बाजुओं से टुकड़ों में बांट बिखेरा है हमने हां बस तुम्हारे लिए। अरमान मेरे ना गगन को चुमू इस धरा पर, तेरी होके जी लूं आश में खुद को तराशा है हमने हां बस तुम्हारे लिए। कभी साथ लेकर कहीं चलने में तकलीफ़ थी मुझे साथ रखने में अपनी तौहीन तुझी से सहा है हमने हां बस तुम्हारे लिए। तुझे सबसे ज्यादा चाहा है हमने तेरी स... »

प्रेम दिवस

आज प्रेम दिवस पर आई आपकी याद, जब देखे बागों में गुलाब, तब आई आपकी याद। आ गए याद कुछ बीते पल, आए याद कुछ मीठे गीत, कहां छिपे हो मन के मीत। आज अकेला पन खलता है, बहुत दिनों के बाद। आज आ गई आपकी याद, याद आए वो खिले गुलाब। किस से कहें मन का संताप, क्यूं रूठे बैठे हो हमसे, हम तो प्रतीक्षा में हैं कबसे। आज आई आपकी बहुत याद ।। »

पुलवामा शहीदों को नमन

याद है हमको प्रेम दिवस ऐसा भी एक आया था! थी रक्तरंजित वसुंधरा, और आकाश थरथराया था!! एक कायर आतंकी ने घोंपा था सीने पर खंजर! ख़ून बहा कर वीरों का, बदला था वादी का मंजर!! चालीस जवानों का काफ़िला चीथड़ों में बदल गया! था ऐसा वीभत्स नज़ारा कि हृदय देश का दहल गया!! गूँजी दसों दिशाओं में माताओं की भीषण चीत्कारें! ख़ून नसों का उबल गया, आँखो से थे बरसे अंगारे!! भारत की रूह पे दुश्मन ने गहरा ज़ख्म लगाया था! लेकिन... »

मै हूँ ना

आज valentine’s day है मौसम मनचला सा हो रहा है हर और इश्क खिल उठा है याद कर रही हूँ खूबसूरत लम्हों को, नही, मुझे नही याद आ रही वो कपड़े, गहने, फूलों की लम्बी फेहरिस्त…. झंकृत कर रहे है मुझे वो बेशकीमती पल जब-जब रूह से रूह का एकाकार हुआ, भीड़ में तुम्हारा धीरे से मेरा हाथ थाम लेना, घबरा जाना मेरे बीमार होने पर, समझ जाना अनकही मेरे मन की बात को, और मौन नज़रों से तुम्हारा यह कहना “मै... »

राष्ट्रीय शोक दिवस

बहुत दुख भरा दिवस है, आज राष्ट्रीय शोक का। टूटी थी किसी की राखी, और किसी मां की उजड़ी कोख का। इस दुख भरे दिवस को , आज,प्रेम दिवस ना कहना। आज ही के दिन….. पुलवामा में ग़म के बादल आए थे याद करो उन वीरों को जो, घर ओढ़ तिरंगा आए थे। जला लहू पुलवामा में, जिन वीर जवानों का हाथ जोड़कर नमन है उनको, कोई और-छोर नहीं उनके बलिदानों का। कैसे स्वीकार करें आज गुलाब, वतन के शहीदों की आई है याद। हाथ जोड़कर न... »

इजहार का दिन है

प्रेम के इजहार का दिन है प्यारे तू क्यों पीछे होता है, दे दे प्रिय को तोहफे में फूल, नहीं तो चुभेगा हृदय में शूल आँखों से बहेगी लघु सिंचाई की गूल इससे पहले कि हमारे भीतर उग आयें पुराने ख्यायलात रूढ़ि के वशीभूत हम मामले को दे दें तूल हैप्पी वेलेंटाइन डे कहना मत भूल..। अन्यथा हृदय में रह जायेगी कसक क्यों नहीं कहा होगा सोच कर भीतर चुभेंगे शूल, अतः कह डाल मिटा दे प्रेम पर पड़ी धूल, अभी भी समय है प्यारे ... »

भारत कोकिला

हे भारत कोकिला! मुबारक हो तुम्हें जन्मदिन तुम्हारा। वतन के लिए कर खुद को समर्पित जीवन तेरा स्वतंत्रता को अर्पित हैदराबाद में जन्मी अघोरनाथ की सुता कहाई माता दी कवयित्री निज रचना की लोङी सुनाई पालना में जिनकी गुन्जती हो बांग्ला कविता पश्चिम तक गुंजायमान था स्वर तुम्हारा हे भारत कोकिला! मुबारक हो तुम्हें जन्मदिन तुम्हारा। मानवाधिकार की संरक्षक, गोविराज की भार्या किंग्स कौलेज लंदन में जिसने शिक्षा पा... »

चुम्बन

वो भटकता रहा लफ़्ज़ दर लफ़्ज़ गढ़ने को परिभाषायें प्रेम की, रिश्तों की, विश्वास की…!! और मैंने अंकित कर दिया हर एहसास उसके दिल में सिर्फ चूम के उसके माथे को…!! ‘दरअसल चुम्बन, आलिंगन और प्रेमल स्पर्श मानव को सृष्टि द्वारा प्रदत्त सर्वश्रेष्ठ भाषाएँ है..!!’ ©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’ (13/02/2021) »

यह कौन लोग का हुजूम है?

भारत की राजधानी दिल्ली के बॉर्डर सिंघु और टिकरी में यह कौन लोग का हुजूम है? देखो देखो यह लोग और कोई नहीं हमारे देश के अन्नदाता जो रोज मेहनत की पसीना बहाकर औरों का पेट भरने का प्रयास करने वाले हमारे देश की शान सैनिक किसान सैनिक किसान सड़क में क्यों? जो दूसरों का पेट की चिंता करने वाला खून पसीना एक करके फसल उगाने की लड़ाई में सैनिक की तरह लड़ने वाला इज्जत की ताज सर पे होनी चाहिए जिनके वह आखिर सड़क म... »

आदमी का आदमी होना बड़ा दुश्वार है

सत्य का पालन करना श्रेयकर है। घमंडी होना, गुस्सा करना, दूसरे को नीचा दिखाना , ईर्ष्या करना आदि को निंदनीय माना  गया है। जबकि चापलूसी करना , आत्मप्रशंसा में मुग्ध रहना आदि को घृणित कहा जाता है। लेकिन जीवन में इन आदर्शों का पालन कितने लोग कर पाते हैं? कितने लोग ईमानदार, शांत, मृदुभाषी और विनम्र रह पाते हैं।  कितने लोग इंसान रह पाते हैं? बड़ा मुश्किल होता है , आदमी का आदमी बने रहना। रोज उठकर सबेरे पेट... »

रिश्ते क्षितिज की तरह

रिश्ते क्षितिज की तरह मिले से प्रतीत होते हैं बंधन में बंधे लोग कब इक दूजे करीब होते हैं आकर्षण करीब लाता है विकर्षण भी खूब भाता है पास में टकराव है लेकिन दूरी से ही सच नजर आता है लम्बी सी कतार है लेकिन इक तरफ झुकाव है लेकिन आगे को ही स्नेह बरसता है पीछे वाला अक्सर तरसता है »

प्यार के अनदेखे सपने * मोहब्बत पर कविता

जब आर्यन को फिलहाल मे किसी लड़की से सच्चा प्यार हुआ मगर अभी तक वे उस लड़की के सामने प्यार का पैगाम नही भेज पा रहे थे तब उनके दिल की प्रबल भावनाएं इस सुंदर कविता के द्वारा बाहर आयीं * प्रस्तुत है कविता * प्यार के अनदेखे सपने आँखों मे निखरे हुए हैं टूटती आशाओं मे वो ख्वाब भी बिखरे हुए हैं !! सामने मौसम सुहाना पतझड़ों में फंस गए हम दीन से हालात मेरे देखकर क्यों हंस रहे तुम प्यार है कोई रण नहीं निर्भय... »

आलिंगन

सांसारिक कुचक्रों में उलझ कर अपनी मौलिकता से समझौता करते मानव सुनो..!! अपने भीतर हमेशा बचा कर रखना इतना सा प्रेम…!! कि जब भी कोई व्यथित हृदय तुम्हारा आलिंगन करे तो उस प्रेम की ऊष्मा से पिघलकर आँसू बन बह उठे उसके मन में जमी पीड़ाओं की बर्फ…!! ©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’ (12/02/2021) »

जग में जब छा गया प्रकाश

कोई सो रहा हो, शयन कक्ष में अंधकार भी हो रहा हो, सूर्य की किरणें आएंगी, आ कर उसे जगाएंगी ऐसा वह सोच रहा हो किंतु यदि उसी ने, किरणों के प्रवेश का, बंद कर दिया हो द्वार तो किरणें कैसे जाएंगी उस पार कौन उसे जगा पाएगा कौन उसे बता पाएगा, कि दिनकर तो कब के आ चुके अपनी रौशनी फैला चुके, जग में छा गया प्रकाश भी, उसे उठाने का किया प्रयास भी, किंतु जो जगना ही न चाहे, उसे यह जग कैसे जगाए। _____✍️गीता »

सपने आज़ाद है

बात एक शायर की करता हू जिसे अपनों ने ठुकराया वफ़ा की साजिस देखो बेवफाए मोहब्बत ने ज़िन्दगी की सबसे बड़े सच से वाकिफ बनाया की यह चलती जाती है सुर्ख हवाएं बस ये एलान किए जाती है ज़िन्दगी जिए जाती है ज़िन्दगी जिए जाती है कुछ लम्हे अधूरे ही शायद ठीक है जो ज़िन्दगी मे लड़ने का जज़्बा दिए जाती है बात पूरी हो तोह ज़िन्दगी के फसादो की सीख बोझिल हो जाती है अधूरी हो तोह कुछ अनकही बाते रातों को याद आ जाती है ज़िन्दगी ... »

वहम

सोचता था हक़ से मांग सकता हू तुझसे कुछ भी देखा तोह वोह हक़ तूने कब किसी और को दे दिया जिस नाम को तबीर बना के घूमते थे वोह हर किसी के साथ जुड़ गया गम नहीं है तेरे बेवफाई का बस खुद के भरोसे से भरोसा उठ गया जिस्म से तेरे सिर्फ प्यार नहीं था जो था वोह तू नहीं जान सकती कभी खोया मैंने जो कभी मेरा ना था खोया तूने जो सिर्फ तेरा ही था »

बात शयाद कम कीमत वाली की है

बात शायद कम कीमत वाली की है हर चीज़ को दौलत से जो देखती हो पर प्यार सौ टाका तुमसे ही किया था »

वचन

यदि बाँधने जा रहे हो किसी को वचनों की डोर से, तो इतना स्मरण रखना कहीं झोंक न दे वचन तुम्हारा उसे उम्र भर की अनन्त प्रतीक्षा में… क्योकि, प्रतीक्षा वह अग्नि है जो भस्म कर देती है स्वप्नों और उम्मीदों के साथ-साथ मनुष्य की आत्मा को भी…!! ©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’ »

आज छोटी बिटिया रानी

आज छोटी बिटिया रानी एक बरस की हो गई है हाव-भाव से हमें लुभाती बड़ी सरस सी हो गई है। खुद के छोटे छोटे पांवों से कदमों को उठा रही है, मम, पप, अम्म आदि शब्दों से संबोधित कर बुला रही है। हैप्पी बर्थ डे कहने पर प्यारी नजरों से देख रही है कुछ तो नया आज है शायद मन ही मन में समझ रही है। ———- सतीश चंद्र पाण्डेय चम्पावत। »

गीत – जान ए जिगर |

गीत – जान ए जिगर | तेरी नजर का करम मुझपर अगर हो जाये | मिल जाये साथ तेरा आसान सफर हो जाये | लहराकर तेरी जुलफ़े हवाओ जब बलखाती है| सच कहूँ बिन मौसम सावन असर हो जाये | तेरे नजरो का तीर दिल पर जब लगते है | मेरे सनम अब मेरी जान पर कहर हो जाए | देख तेरे होठो की मुस्कान घायल हम हुये | तुम नगमो के गीत हर लब्ज बहर हो जाये | तेरी कातिल अदाए गिराती दिल पर बीजलियाँ | चलो न चाल मचल जख्मी शहर हो जाये | आय... »

इंसान तेरे रूप अनेक

इंसान तेरे रूप अनेक कोई ईमानदारी का प्रतीक कोई बेमानी की मिसाल, कोई जलता दीपक मंद करता है कोई जलाता है मशाल, कोई शांति का प्रतीक कोई करता है बवाल कोई बेशर्मी की हद पार करता है कोई रखता है मुंह में रुमाल। कोई निष्क्रिय रहता है कोई करता है कमाल। कोई खुद का ही पेट भरता है कोई जरूरत मंद के लिए सजाता है थाल, कोई कर्म से परिचय देता है कोई बजाता है गाल। कोई दूसरों के लिए मार्ग खोलता है कोई दूसरों के लिए ... »

तुम्हारा बहुत-बहुत आभार ज़िन्दगी

तुमने जो किया सब भला ही किया, तुमने जो दिया सब भला ही दिया। आरम्भ भी तुम्हीं से और अन्त भी तुम्हीं तक, तुम्हारा बहुत-बहुत आभार ज़िन्दगी । बिखरते ही जा रहे थे, एक माला के मनके ठहराव सा पा गए हैं,जज़्बात मेरे मन के। तुमने मुझे मुस्कुराना सिखाया ज़िन्दगी, कभी कठिन समय भी दिखाया ज़िन्दगी। मेरा हाथ थामें चलती रही सदा तुम, कभी जीत मिली, कभी मिली हार ज़िन्दगी। हर पल है तुम्हारा आभार ज़िन्दगी जो पल मिले न... »

मगर है चाँद सा

आप खो गए थे मन उद्वेलित था अब आ गए हो है प्रफुल्लित सा। नभ में सूरज उदित सा, मन है मुदित सा। आपका होना रात को चाँद सा, काजल लगी आंख सा। मगर प्रविष्टि है कठिन दिल में क्योंकि वो बना है शेर की माँद सा। मगर है चाँद सा। »

यह कैसी विपदा आई है

उत्तराखंड की ऋषि गंगा में, ढह गया एक हिम-खंड। कुछ ही पलों में गिरी हिम-शिला, और नदिया उफन गई, ढह गए और बह गए, उस नदिया में घर कई। एक सुरंग में काम कर रहे, श्रमिकों पर टूटा कहर। करुण क्रंदन और त्राहि-त्राहि की, आ गई थी एक लहर। किसी ने अपना बेटा खोया, किसी का बिछुड़ा भाई है। एक बुजुर्ग सी दादी गिरकर, लहरों में समाई है। रो पड़े परिजन जिन्होंने, यह आंखों देखी सुनाई है। हे प्रभु बचाले उन लोगों को, यह क... »

मीठी वाणी बोलिए

वाणी से ही विष बहे, और वाणी से ही,बहे सुधा-रस धार। मीठी वाणी बोलिए, यही जीवन का सार। कण-कण में ईश्वर बसते, यही प्रकृति का आधार। निज वाणी से मनुज, न करना किसी पर प्रहार। घाव हो तलवार का, एक दिन जाए सूख। घाव हरा ही रह जाता है, जो वाणी दे जाए। सोच समझ कर बोल रे बंदे वरना अपने जाएंगे रुठ।। _____✍️गीता »

सैकड़ों लोग लापता हो गए

हिमखंड टूटा पानी का ऐसा प्रवाह आया वे पत्तों की तरह बह गए देखते ही देखते सैकड़ों लोग लापता हो गए। जाने कहाँ खो गए। चीत्कार- करुण-क्रन्दन से रो उठी घाटी, प्रवाह बह गया केवल मजदूरों के निशान रह गए बाकी। »

ढलना पड़ता है

अनुकूल वातावरण मुश्किल से मिलता है या तो स्वयं ढलना पड़ता है या उसे अपने अनुसार ढालना पड़ता है। कर्म किए बिना कुछ नहीं होता है कर्म के बावजूद परिणाम में ईश्वर की इच्छा को ही मानना पड़ता है। आग जलाने को माचिस को रगड़ना ही पड़ता है भाग जगाने को परिश्रम करना ही पड़ता है। »

मोहब्बत

मोहब्बत में मेरा क्या हुआ, यह मुझको है पता। मोहब्बत में तेरा क्या हुआ, तू मुझको दे बता। मोहब्बत से तो पत्थर में भी प्राण आते हैं, बेरुखी से जीवित भी निष्प्राण हो जाते हैं।। »

आँगन खुन्दी लो सांवरो,,,

आँगन खुन्दी लो सांवरो,,, जीवन संवार दो हमरी,,,, चरणों की रज बनायी के कर दो कृपा एक आंखरी आँगन खुन्दी लो सांवरो ,,,, जीवन संवार दो हमरी,,,, हम पर विपत्तियों की जब जब बही है धारा तेरा ही तो आसरा है तेरा ही तो है सहारा इतना करी दो सांवरो हो पास हम तेरे ही आँगन खुन्दी लो सांवरो,,, जीवन संवार दो हमरी,,, _____✍ »

रिक्तता

निकाल कर फेंक दिया है मैने अपने भीतर से हर अनुराग, हर संताप… अब न ही कोई अपेक्षा है बाक़ी औऱ न ही कोई पश्चाताप..!! मैं मुक्त कर चुकी हूँ स्वप्न पखेरुओं को आँखो की कैद से… वो उड़ चुके हैं अपने साथ लेकर मेरे हृदय के सारे विषादों को.. अब मेरे अंतस में है एक अर्थपूर्ण मौन और रिक्तता.. रिक्तता जो स्वयं में है परिपूर्ण जो पूरित है सुखद वर्तमान से…!! वर्तमान,जो स्वतंत्र है विगत की परछाइयो... »

कैसा है ये खयाल,,

कैसा है ये खयाल ऐसा है अपना हाल जैसे,,,, लठ्ठे जल के बनता हो राख राख के भीतर छोटी सी आग आग मरता रहता है हाल अपना वैसा है,, जैसे,,,,, गर्मी के दिन में सूरज कि ताप मन में रखकर बरखा कि याद ताप पत्थर सहता है हाल अपना वैसा है,,, »

जिन्दगी संघर्ष है

जिन्दगी संघर्ष है, संघर्ष कर, संघर्ष कर सोच में नेकी उगा ले हार से बिल्कुल न डर। सोच दिल से कौन है जो दर्द ने जकड़ा नहीं, कौन ऐसा है जिसे पीड़ ने पकड़ा नहीं। संघर्ष कर संघर्ष कर सोच कुछ मत पार लगती है उसी की जो सत्य से डरता नहीं। »

‘सच’ बस तु हौले से चल…

वो पलकों की सजावट से, वो गलतियों की बिछावट से, दिखावटी फिसलन की दौड़ में…. मैं नदी से हौसला भर लाऊंगा, ‘सच’ बस तु हौले से चल… मैं पगडंडी से दूर निकल जाऊंगा|| ऐ जिंदगी तु बतला तो सही, प्रीत का कितना है फासला??? हो रही जो झूठ की बौछारें, कितना है नम अब रास्ता, आत्मविश्वास का छाता लिए… मैं अपनापन सहज लाऊंगा, ‘सच’ बस तु हौले से चल… एक दिन मैं मंजिल पर पह... »

*हमें आजकल फुर्सत नहीं है*

आजकल चाय कॉफी का है सहारा, इसके बिना दिन कटे ना हमारा। हमें सिर उठाने की भी फुर्सत नहीं है, कभी कॉपी जांचो कभी प्रश्नपत्र बनाओ, कोई छात्र विद्यालय न आए तो उसको मनाओ। करके दूरभाष पर बात मात-पिता से, विद्यालय आने के लिए समझाओ। उंगलियों में कलम है हाथों में है कागज़ भी, हाय! कविता लिखने की हम को फुर्सत नहीं है। छात्रों की आजकल बस कॉपियां जांचते हैं, थोड़े-थोड़े उनको नंबर भी बांटते हैं। कितनी मिस कॉल ... »

धीरे-धीरे चल

सिर पर दुपट्टा मेरा, पैरों में झांझर। कमर में पानी की गगर बोले, धीरे-धीरे चल गोरी गांव में आकर, झांझर के घुंघरू छम-छम बोलें। सिर पर दुपट्टा मेरा, माथे पर बिंदिया है। कानों में मैंने कुंडल हैं डाले, धीरे-धीरे चल गोरी गांव में आकर। कानों के कुंडल हौले से बोलें।। ____✍️गीता »

क्या है इसका राज (कुंडलिया छन्द)

बोलो क्यों तुम हँस रहे, बिना बात के आज, इतने गदगद हो रहे, क्या है इसका राज, क्या है इसका राज, प्रेम की आहट है क्या, उमड़ रही मन आज, किसी की चाहत है क्या, कहे लेखनी भले, छुपा लो चाहत को तुम, कवि से कैसे छुपा सकोगे आहट को तुम। »

रसोई घर में खलबली

आज कल रसोई घर में खलबली सी मच रही है चाय और काफ़ी रहती थी सगी बहनों सी ग्रीन टी आकर सौतन सी अकड़ रही है आज कल रसोई घर में खलबली सी मच रही है दूध,दही,छाछ की बहा करती थी नदियां स्मूदी,माॅकटेल रंगीन बोतलों में बंद रंग जमा रही है आज कल रसोई घर में खलबली सी मच रही है मक्खन और घी से महकता था आंगन चीज़ और म्योनीज चिकनी चुपड़ी बातें कर भरमा रही है आज कल रसोई घर में खलबली सी मच रही है दाल,रोटी सब्जी,चावल,प... »

आंखें बोझिल हैं मगर

आंखें बोझिल हैं मगर, नींद गई है रूठ, लगता है कुछ आस भी, आज गई है टूट। वो खर्राटे मार कर, उड़ा रहे हैं नींद, हम कोशिश करते रहे, अपनी आंखें मीच। »

हे भक्त-वत्सल हे रघुनंदन

संगीत सहित हे भक्त-वत्सल हे रघुनंदन काटो भव-बंधन मेरे हे भक्त-वत्सल हे रघुनंदन काटो भव-बंधन मेरे राम तुम्हीं हो भव-भय हरन वाले — 2 बार गायें काटो भव-बंधन मेरे ———————————— हे भक्त-वत्सल हे रघुनंदन काटो भव-बंधन मेरे ।।1।। ————————————– गणिका उद्... »

मेरी भक्ति-भजन को यदि तुम पढ़ोगे

मेरी भक्ति-भजन को यदि तुम पढ़ोगे तब जाके कहीं तुम मुझे समझोगे मेरी भक्ति-भजन को यदि तुम पढ़ोगे तब जाके कहीं तुम मुझे समझोगे ——————————————– मेरी भक्ति-भजन को यदि तुम पढ़ोगे तब जाके कहीं तुम मुझे समझोगे ।।1।। ——————————————R... »

प्रभु राम देना साथ हमारा

प्रभु राम देना साथ हमारा हम किस मुख कहे कि, हम हैं दास तुम्हारा प्रभु राम देना साथ हमारा हम किस मुख कहे कि, हम हैं दास तुम्हारा ———————————————– प्रभु राम देना साथ हमारा हम किस मुख कहे कि, हम है दास तुम्हारा ।।1।। —————————————... »

जिस भजन को सुनके तेरी नैनों से बहते हैं नीर

जिस भजन को सुनके तेरी नैनों से बहते हैं नीर वह भजन हैं तेरे लिए अमृत तुल(तुल्य) (2 बार गाये) ————————————————————————– जिस भजन को सुनके तेरी नैनों से बहते हैं नीर वह भजन हैं तेरे लिए अमृत तुल(तुल्य) ।।1।। ——————... »

जिसके हृदय में पूर्ण राम बसते हैं

संगीत सहित जिसके हृदय में पूर्ण राम बसते हैं उनकी काया विकृतियों से दूर है जिसके हृदय में पूर्ण राम बसते हैं उनकी काया विकृतियों से दूर है ————————————— जिसके हृदय में पूर्ण राम बसते हैं उनकी काया विकृतियों से दूर है ।।1।। —————————————— ... »

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