चंद सिक्के हैं जेब में और बेशुमार जरूरतें, चलो चलकर बाज़ार से कुछ ख़्वाहिशें ख़रीद लें।
चंद सिक्के हैं जेब में और बेशुमार जरूरतें, चलो चलकर बाज़ार से कुछ ख़्वाहिशें ख़रीद लें।
क्या बताएँ आपको दास्ताँ-ए-दिल 1 अब हम, क़त्ल कर के ख़ुद का, हुए क़ातिल अब हम। तमीज़दार ख़ल्क़ 2 में तमाशबीन 3 हम बन गए, मुहज़्ज़ब 4 बज़्म में, इकलौते जाहिल अब हम। समंदर-ए-इश्क़ में […]
आपकी बेरहम यादें और मैं, बहुत सारी फरियादें और मैं। चुप रहेंगी खींचकर आज साँसें, मेरी बेबस निनादें 1 और मैं। इंतज़ार कर रही हैं बरखा 2 का, सूखी पड़ी ये आँखें और मैं। लगा […]
मर्ज़ 1 नहीं मालूम गर तो दवा न दीजिए, बुझा न सको आग तो, हवा न दीजिये। छुपा लो जख्म-ओ-दर्द ज़ेहन 2 में कहीं, यूँ ही पिघल कर, जू-ए-रवाँ3 न कीजिये। कुचल देती है दुनिया […]
साथ तो सब हैं, फिर भी तनहा सफ़र अपना, हज़ारों मकाँ की बस्ती में, अकेला घर अपना। तुम हो ख़ामोश, मैं भी गुमशुम-सा हूँ यहाँ, तूफ़ाँ में झुकाए सर बैठा है शजर1 अपना। दुनिया के […]
शजर1 सूखा है, खिज़ाँ2 अरसे से ठहरी है, लगेगा वक़्त कुछ और, चोट ज़रा गहरी है। लगता है एक और बम पड़ेगा फोड़ना, सुना है सरकार यहाँ की ज़रा बहरी है। मायूस मख़्लूक़ 3 को […]
बेवजह उनका नाम बार-बार याद आता है, ज़ेहन में जमा दर्द आँखों में पिघल जाता है। अब निगाहों ने भी पकड़ ली है दिल की राह, अनजाने चेहरों में भी बस तू नज़र आता है। […]
मुस्कुराता हूँ ग़म को, लिखता जाता हूँ, क़त्ल कर जिंदगी को, मैं जीता जाता हूँ। पन्ने पलटता हूँ जब जिंदगी की किताब के, तेरा नाम ही, हर वरक़1 पर मैं पाता हूँ। जो बातें रह […]
अपने फ़साने-ए-ग़म मैं किसको सुनाऊँ, हाल-ए-दिल-ए-हस्सास1 किसको बताऊँ। ये दिल की उलझन, ये सितम-ए-हयात2, अब इन हालातों को मैं कैसे सुलझाऊँ। हर शख़्स ख़ुश है, अपनी ही दुनिया में, अपनी तन्हाई से मैं किसको मिलाऊँ। […]
ये ग़म मेरे प्यार का उन्वान 1 बन गया, जो था अपना आज अनजान बन गया। मलहम की चाह में सूखे सारे ज़ख़्म, हर ज़ख़्म अब एक निशान बन गया। रहम-ए-इश्क़ की दरकार 2 थी […]
मेरी आँखों से इतना बहा है तू, देखूँ मैं जिस जगह, वहाँ है तू। मुबालग़ा1 नहीं है ये मोहब्बत का, मुत्तसिल 2 है मेरा मकाँ, जहाँ है तू। कैसे देखोगी तुम दर्द का मंज़र, खुली […]
जिंदगी कैसे – कैसे जली देखो, कुंदन – सी 1 निखर चली देखो। ख़िज़ाँ-दीदा2 काँटों से सँवर कर, गुलशन हो गई मेरी गली देखो। मीठी मोहब्बत की तासीर 3 में घुल, निबोली बनी, मिस्री की […]
जिक्र करता हूँ बस हिज़्र1 का, ऐसी बात नहीं, कभी वस्ल2 का कुछ न कहा, ऐसी बात नहीं। ठहरे हुए हैं कई ख़्याल, आकर ज़ेहन3 में मेरे, कोई ख़्याल आँखों से न बहा, ऐसी बात […]
मु’अय्यन 1 मंज़िल न सही, कहीं तो पहुँच जाऊँ, मुकम्मल2 नज़्म न सही, चंद लफ़्ज़ में ढल जाऊँ। इक मुब्हम3 मुअम्मा4 सी हो गई है ज़िंदगी मेरी, जितना सुलझाऊँ, उतना ही मैं उलझता जाऊँ। मेरे […]
लिखा है बस वही, जो दिल पे गुज़री है, कैसे कहें ये शब 1, कैसे अकेले गुज़री है। ओढ़ कर आ गए वो आज मेरे हालातों को, कैसे बताएंगे वो क्या शानों2 पे गुज़री है। […]
दर-दर गिरते रहते हैं, अक्सर संभलने वाले, खाते हैं अक्सर घाव, मरहम रखने वाले। कर लिया था तौबा इश्क़ की गलियों से, मगर मिले हर तरफ़ मोहब्बत करने वाले। किसके ख़्वाबों में खोया रहेगा हमारा […]
जिंदगी अंधेरों में तो हमें गँवानी थी, रोशनी दो पल की जो कमानी थी। जिन्हें हमने ख़ुद से भी करीब माना, वो शख़्सियत असल में बेगानी थी। रैली के जमघट 1 ने जाम2 किए रास्ते, […]
इंतज़ार के बाद की कैसी सहर 1 होगी, बिन तनहाई के जिंदगी कैसे बसर2 होगी। 1. सुबह; 2. गुज़ारना।
अपने अश्क़ो को हम दफ़नाने आए हैं, दर्द की नई फसल हम उगाने आए हैं। चुनावी वादों को पूरा करेंगे आज वो, अंधी भीड़ को जो आईने बंटवाने आए हैं। इस बार खिलेंगे सूखी दरख़्तों […]
चंद सिक्के मिले हैं मुझे दिनभर की मज़दूरी के, आँखों में आँसू आते हैं मेरी मजबूर मजबूरी के। कौन उठाए आवाज़ आज नाइंसाफ़ी के खिलाफ़, बहुत मालदार होते हैं शख़्स यहाँ जी-हुज़ूरी1 के। क्यों लिखें […]
अब कहाँ वो ज़माना रहा जाँ लुटाने का, रिवाज़¹ नहीं अब रूठे को मनाने का। किसके हवाले करें आज दिल हम अपना, गुज़र गया वह वक़्त दिल लगाने का। हदीस²-ए-गम-ए-यार सुनेगा अब कौन, नया रिवाज़ है […]
बेगाने है वो तो फिर अपने से लगते हैं क्यों, आने से उनके मौसम आख़िर बदलते हैं क्यों। आँखों में जो जम गए थे हिज्र 1 के आँसू, वस्ल 2 के वक्त वो आख़िर पिघलते […]
लब भी न हिले और हमारी बात हो गई, आधी-अधूरी ही सही, मुलाक़ात हो गई।
आपकी यादों को अश्कों में मिला पीते रहे, एक मुलाक़ात की तमन्ना में हम जीते रहे। आप हमारी हक़ीक़त तो कभी बन न सके, ख़्वाबों में ही सही, हम मगर मिलते रहे। आप से ही […]
क्यों याद आता है वो सब, जो कभी हुआ ही नहीं, इक रिश्ता थाम लेता है हाथ, जो कभी था भी नहीं।
आज की शाम, शमा से मैं बातें कर लूँ, उनके चेहरे को अपनी आँखों में भर लूँ। फ़ासले बचे हैं क्यों उनके मेरे दरमियान1, चल कुछ कदम, कम ये फ़ासले कर लूँ। प्यार करना उनसे […]
जब ज़माने ने उसको सताया होगा, मेरा नाम कैसे होंठों में दबाया होगा। सवालों की जब झड़ी लगी होगी, जवाब में कैसे मुझको छुपाया होगा। कहीं कोई तलाश न ले कमरा उनका, मेरी नज़्मों को […]
दो पल में लगी आग, ज़माने में बुझती है, रिश्तों में पड़ी गाँठ, कब-कहाँ खुलती है। जो दे गया दग़ा हमें, वादा-ए-वस्ल 1करके, तुम्हारी शक्ल उस से हू-ब-हू मिलती है। निगल कर तमाम तारों को […]
बिछड़ने के ख़्याल से हम मिलने से डरते हैं, मगर कैसे बताएँ किस कदर तनहा मरते हैं। देख न ले वो हमें, कहीं पुकार न ले दरीचे1 से, उनकी गलियों से हम अब गुज़रने से […]
आज कुरेद गया वो अरसे से जमे जज़्बातों को, कुछ बूँदें फिर से भिगो गईं सूखे रुख़सारों 1 को। दर्द आज फिर से झाँकने लगा तह-ए-दिल से, शायद कोई भरने आया है दिल की दरारों […]
तेरी आवाज़ में अक्सर हम डूब जाते हैं, तुझसे हम हमेशा कुछ कह नहीं पाते हैं। हाल-ए-दिल कैसे करें हम बयाँ अपना, दिल की धड़कन में तुझे ही सजाते हैं। ग़ालिब बना दिया हमें तेरी […]
घुल गया उनका अक्स कुछ इस तरह अक्स में मेरे, आईना अब ज़रा सा भी न काबिल-ए-ऐतबार रहा। हमारी मोहब्बत का असर, हुआ उन पर इस क़दर, निखरी ताबिश-ए-हिना1, न वह रंग-ए-रुख़्सार2 रहा। दिखाए मौसम […]
हम अपना हाल-ए-दिल आपसे कहते रहे, बेगाना आप हमको जाने क्यों समझते रहे। आज तक कोई सबक पढ़ा न ज़िंदगी में, आपकी आँखों में जाने क्या हम पढ़ते रहे। इक अरसा हो गया, हम मिल […]
तुझसे रू-ब-रू1 हो लूँ, दिल की आरज़ू2 है, कह दूँ तुझसे एक बार, तू मेरी जुस्तुजू3 है। भँवरा बनकर भटकता रहा तेरे तसव्वुर 4में, चमन में चारों तरफ़ फैली जो तेरी ख़ुशबू है। जल ही […]
उनके चेहरे से नज़र है कि हटती नहीं, वो जो मिल जाए अगर, चहकती कहीं। वो जो हँसी जब, नज़रें मेरी बहकने लगीं, मन की मोम जाने आज क्यों पिघलती गई। भूली-बिसरी निगाहें जो उनसे […]
बर्बाद-ओ-बेकस1 दिल का कोई सहारा भी हो, उनके मकाँ-ए-दिल में एक कोना हमारा भी हो। जो बात ज़ेहन 2 में थी, वो ज़ुबाँ पर आ न सकी, कहा नहीं हमने जो, शायद उन्होंने सुना भी […]
अक्स¹ सारे गुम हैं कहीं, आईने अकेले हैं, साथ चलते हैं लेकिन, काफ़िले² अकेले हैं। 1. प्रतिबिम्ब; 2. यात्रीदल।
इक मुखौटा है, जिसे लगा कर रखता हूँ, जमाने से ख़ुद को मैं छुपा कर रखता हूँ। दुनिया को सच सुनने की आदत नहीं, सच्चाई को दिल में दबा कर रखता हूँ। जमाने की सूरत […]
सवा ले चल हमें भी उस निशाँ तक उमीदें रक़्स करती हैं जहाँ तक तसव्वुर की रसाई है जहाँ तक किसी दिन तो मैं पहुँचूंगा वहाँ तक हमारी ज़िन्दगी की दास्ताँ तक ना पहुँचा कोई […]
अब पैकर-ए-ख़्याल-ए-सनम बन गया हूँ मैं यानी वजूद-ए-लुत्फ़-ओ-करम बन गया हूँ मैं اب پیکرِ خیالِ صنم بن گیا ہوں میں یعنی وجودِ لُطف و کرم بن گیا ہوں میں यूँ छू रही हैं मुझ को […]
रस्ता मिला न मंज़िल रहबर की रहबरी में । हम यूँ भटक रहे हैं सहरा-ए-जिंदगी में ।। तुम तैर कर तो देखो सूखी हुई नदी में । फर्क़ आएगा समझ में खुश्की में और तरी […]
Imagine you are preparing to move a modest portfolio of XMR, BTC, and LTC from a custodial exchange into a personal wallet because you want stronger privacy guarantees and control. You care about network anonymity, […]
वो खिड़की के जानिब अगर देखते है हर एक बार मुझको मगर देखते है जो कूचे से निकला हूँ कल परसो मै वो दीदार को हर पहर देखते हैं गरीबी में क्या है सिवा आरज़ू […]
जो उस के, महल में जाते हैं उसे देख के, फिसल जाते हैं हवा का रुख, जो बदलता है सियासतदाँ, बदल जाते हैं जो ठोकर, खाते रहते हैं वही आख़िर, संभल जाते हैं दिल को […]
जिस तरह मुझ पे तोहमत लगा रही है वो शायद मेरे किरदार से वाक़िफ़ नहीं है वो झूठों के इस बाज़ार में मुंसिफ भी बैठ कर मुझ से कहा के मैं ग़लत, और सही है […]
उस के साथ चलने, का मसअला नहीं ये बात और है के, अब हौसला नहीं कुछ बात तो होगी, के उसने दगा दिया उससे मुझे कोई, शिकवा गिला नहीं सदियों गुज़र गए, कोशिशों के बावजूद […]
जिसको देख, डर गया कोई उससे इश्क, कर गया कोई वो ग़मज़दा, हो के बैठे थे उसका ग़म भी, हर गया कोई लोग जिससे, किनारा करते थे आज उसपे, मर गया कोई शुक्र कीजे के, […]
मुस्कुरा के दिखाने, से क्या फ़ायदा दर्द ए दिल को छुपाने, से क्या फ़ायदा उसने नज़रों से, नज़रों पे जो वार की अब यूं नज़रे चुराने, से क्या फ़ायदा तुमने ठुकरा दिया था, मुझे एक […]
उसका आमद, इस पार है क्या, क्या मेरा, इन्तेजार है क्या? हर पल वो, रंग बदलता है, गिरगिट का, रिश्तेदार है क्या दिल ने दिल से, हामी भर दी, क्या अब उसका, इनकार है क्या? […]
कल मैंने अपनी खिड़की से अपना बीता हुआ कल देखा… उस कल में था वो लड़का, जिसे देखकर मेरी सुबह मुस्कुराती थी, शाम संवर जाती थी और रातें ख्वाब बुनने लगती थीं। पर कुछ यादें […]
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.