हिन्दी-उर्दू कविता

पिया बिना

पिया बिना ——- सुनो प्रिय! मेरा हृदय करे स्पंदन आंखों से फैला ये अंजन भूख प्यास सब लगते झूठे पिया बसंती तुम जो रूठे। सूखे पत्ते सी में कांपू तेरे बिना शापित सी नाचू पल पल तेरी राह निहारु द्रवित हृदय से तुझे पुकारू। मरुभूमि सी तपती देह प्रेम सुधा बरसादे मेंह तेरे दरस की प्यासी हूं बिन तेरे महज उदासी हूं। अंजुरी भर-भर पीना है हो प्रेम बाबरी जीना है इस जग में प्रेम का चलन यही बिन पिया किसी... »

मोहब्त

किसी से इतनी भी मोहब्त ना कर की सिर्फ तू ही सौगात भरता जाए मै से हम की दुरी दोंनो को तय करना है »

गया था उस गली

गया था उस गली जहा से निकाला गया था मोहब्बत थी इस लिए चुप था तेरे हर सितम का जवाब मौजूद था यह तोह तहज़ीब आरे आ गया »

विप्लब

जनता के बारूद को आग से मत ललकार शमा को बुझने ना देंगे ज़ुल्मी रात जितनी भी कोहराम मचाए माना विपक्ष धनवान बलवान है पर इतिहास साक्षी है जब भी सब जन विप्लब का रास्ता लेते है उनके एक आवाज़ ही तख्तता पलट करने मे शक्छम होती है »

वो खिलोनवाली

वो खिलौने वाली ——————— एक पैर से लाचार वो स्वाभिमानी लड़की, याद है मुझे आज भी कल ही की बात सी। चेहरा नहीं भूलता उसका तीखी खूबसरत सी नाक थी। रूखे सूखे से बाल तन से वो फटे हाल थी। चेहरे पर उसके जीने की चमक , कांधे पे झिंगोला लिए लाठी के साथ थी। हां वो खूबसूरत लड़की बड़ी बेमिसाल थी। गाड़ीयों के बीच में सड़कों पर दौड़ती, एक लाठी के सहारे, खिलौने वो बेचती। गर्म... »

गज़ल

गज़ल ——- जहर यह उम्र भर का एक पल में पी लिया हमने। तुम्हारे साथ जन्मो जन्म रिश्ता जी लिया हमने। 1.मुकम्मल ना हुआ तो क्या इश्क को जी लिया हमने कहते हैं आग का दरिया डूब कर देख लिया हमने। 2.चिरागों की जरूरत क्या पड़ेगी हमको ए कातिल, जलाकर खुद का दिल ही आज कर ली रोशनी हमने। 3. तुम्हारे बक्शे जख्मों को हरा रखना …. आदत बना ली है जो गहरे घाव है दिल के सजा कर रख लिए हमने। 4.सितमगर इश्क़ ... »

अधीर बनो,अधीर बनो

अब क्यों धीर धरे हो अधीर बनो, अधीर बनो मां भारती के लाल तुम हो सर्व शक्तिमान विजय की पताका ले हाथ दुश्मन की ग्रीवा का रक्त पीने वाली तुम शमशीर बनो, शमशीर बनो अब क्यों धीर धरे हो अधीर बनो ,अधीर बनो रक्त में है उबाल, मातृभूमि रही पुकार गलतियों का करो अब हिसाब पीओके के साथ सिंध पर भी धरो ध्यान सुन कर अरिदल थर थर कांपे वो तुम गीत बनो गीत बनो अब क्यों धीर धरे हो अधीर बनो अधीर बनो शिवराज खटीक »

अधीर बनो,अधीर बनो

अब क्यों धीर धरे हो अधीर बनो, अधीर बनो मां भारती के लाल तुम हो सर्व शक्तिमान विजय की पताका ले हाथ दुश्मन की ग्रीवा का रक्त पीने वाली तुम शमशीर बनो, शमशीर बनो अब क्यों धीर धरे हो अधीर बनो ,अधीर बनो रक्त में है उबाल, मातृभूमि रही पुकार गलतियों का करो अब हिसाब पीओके के साथ सिंध पर भी धरो ध्यान सुन कर अरिदल थर थर कांपे वो तुम गीत बनो गीत बनो अब क्यों धीर धरे हो अधीर बनो अधीर बनो शिवराज खटीक »

किताबे

किताबें ——– किताबे गुमसुम रहती हैं आवाज़ नहीं करती। सुनाती सब कुछ है लेकिन बड़ी खामोश होती है। छुपा लेती है सब कुछ बस, घुटन वो खुद ही सहती हैं। दफन कर लेती बेचैनी, दुख वो खुद ही सहती हैं। लोग जो कह नहीं पाते, किताबों में वो लिख जाते। खुद तो निश्चिंत हो जाते, किताबों को वो भर जाते। अगर कोई झांकना चाहे किताबें आईना बनती। अगर कोई देखना चाहे अक्स हर शख्स का बनती। हृदय का बोझ ढोती है ... »

आँखों का नूर

कल उस बात को एक साल हो गया वख्त नाराज़ था मुझसे न जाने कैसे मेहरबान हो गया मेरी धड़कन में आ बसा तू ये कैसा कमाल हो गया कल उस बात को एक साल हो गया रोज़ दुआ भी पढ़ी और आदतें भी बदली सिर्फ तेरी सलामती की चाहत रखना मेरा एक एकलौता काम हो गया कल उस बात को एक साल हो गया सिर्फ तू ही मेरे साथ रहे तुझे किसी की नज़र न लगे सारे रिश्ते एक तरफ सिर्फ तुझसे मिला रिश्ता मेरी पहचान हो गया कल उस बात को एक साल हो गया जब त... »

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