ज़िंदगी मेरी आज ज़िंदगी से परेशान है, बात इतनी है, लिबास 1 रूह 2 से अनजान है। तारीकी3 है मगर, दीया भी जला नहीं सकते, क्या करें, घर में लाख4 के सब सामान है। ऐसा […]

ख़्वाहिशें थीं कई, कब ख़त्म हुईं, ख़बर नहीं, कब रूह जिस्म से रुख़्सत1 हुई, ख़बर नहीं। उनसे दीदार2 की दरकार3 थी दिल को कभी, कब ये तमन्ना टूटकर बिखर गई, ख़बर नहीं। ज़ेहन में उनके […]

ग़म में भी मुस्कुराते रहे हम आपकी ख़ातिर, जाम-ए-अश्क1 पीते रहे हम आपकी ख़ातिर। कोई शाम लाएगी आपका पैग़ाम, ये सोच, परवाना बन जलते रहे हम आपकी ख़ातिर। अनजानी थीं राहें, न ख़बर मंज़िल की […]

फलक के चाँद से, या तेरी याद से जिऊँ किसके सहारे, ऐसे हालात से, मोड़ जो आ गए बनके मेरे दूरियां कैसे किससे कहें अपनी मजबूरियां जो तेरे इश्क में, खोया हूँ हर घड़ी तू […]

सच के आगे झूठ लिखूँ ये मेरा काम नहीं इश्क है मेरा दौलत शोहरत, भले इश्क बदनाम सही घायल लोग यहाँ रहते हैं दिल सीने में किसके है? बैचेन पड़ी है रात यहाँ तारे भी […]

कभी बन्द कमरे भी छोड़ कुछ और भी है इसके आगे क्यूँ तू वक्त खपा रहा फिजूल में, कोई और भी देता है जवाब निकल तू भी देख ख्वाब.. बीतती है कैसे शाम की उलझन […]

अपनों को दूर से रू-ब-रू 1 होते हुए देखा है, हमने अपनी तमन्ना को लहू होते हुए देखा है। इक कसक जो दिल में दफ़न थी कहीं पर, दरारों से आज उसको झाँकते हुए देखा […]

अँधेरी बस्ती में रोशनी राशन में बाँटी जाती है, लोहे के हार पहनकर, ज़िंदगी काटी जाती है। आजकल आफ़ताब1भी आता नहीं है नज़र, हुकूमत चाँद-सितारों को भी खाती जाती है। मुहताज है मुक़द्दर जिनका एक […]

शोले से जलते जिगर¹, जुगनू से टिमटिमाने लगे, तूफ़ान भी अब यहाँ, झोंके हवा के खाने लगे। तेग़-ए-पुश्त² शायद हो गई है गायब उनकी, जो जुनूनी शजर³ सारे, सर आज झुकाने लगे। हार गई ये […]

सख़्त मग़रूर 1 चश्म 2 में ज़रा इंतज़ार तो हो इश्क़ उनके लिए भी ज़रा दुस्वार3 तो हो। बता दे अपनी हक़ीक़त जल्दी ही हम क्यों, जगते ख़्वाबों से तेरे चश्म ज़रा बेदार4 तो हो। […]

जाने कैसा शहर था, हर तरफ़ कहर था, धूप ही धूप मिली, दोपहर का पहर था। ख़ामोशी हर तरफ़, ख़ाक-सी फैली हुई, कैसे हो गुफ़्तगू 1, हर जुबान पर जहर था। घूम रहा हर शख़्स […]

बहुत याद आते हैं, सफ़र में बेवक्त बिछड़ने वाले। छोड़ जाते हैं हृदय में बहुत सी यादें और रह जाती हैं तन्हाइयाँ और खामोशियाँ। ऑंख के आंसू निकल पड़ते हैं ढूँढने उनको, नहीं मिलते हैं […]

वो लड़की सोलह की बातें सत्रह की क्या अजीब थी वो, पर नसीब थी वो, जिसे भूलना अब तो नामुमकिन है लहज़े बड़े नाज़ुक से थे खनकती हर आवाजे उसकी वो बोल भी दे गर […]

जिन्दगी उम्र भर की सहेली है एक उलझी हुई पहेली है दरिया है ये समंदर की पूछो न तुम फिर भी प्यासी है ये अकेली है कहो चाहे इसको काँटो का वन कर सको तो […]

ओ देस से आने वाले बता… क्या लाए हो मेरी ऐसी ख़बर जो झूम उठे दिल के मंज़र और दिल हो ये बेखबर… क्या अब भी वहाँ की गलियों में खुशबू वतन की आती हैं […]

वो पान की दुकान वो बरगद की छाँव जहाँ हम मिले.. क्या याद है तुम्हें वो बारिश के छीटें लब पे तेरे जो गिरे सनसनाती हवाएँ वो ठंडी पुरवाई बदन पे तेरे जो चुभे…. क्या […]

तू मेरे पहले, मैं तेरे बाद हूँ ये शर्त भी है हार जीत कौन किसके साथ है जज़्बात से छूटकर, लब खोल बोल तू ये हालात किसके साथ कौन अब आजाद है इश्क भी एक […]

काव्य में कवि मर गया, जब दुनिया उसे बेवफ़ा कह दिया, कोई रत्जगे क्यों करेगा इस मुर्दे पे, उसका जिस्म भी अब मिट्टी हो गया। साँसें धुआँ है उसकी चाह में, लिखता रहता है हर […]

मिज़ाज-ए-गर्दिश-ए-दौराँ1 बदल गया होगा, जो आया है दर पे आज, कल गया होगा। मकाँ-ए-रंक2 में जो आया है इतराता हुआ, ज़रूर वो कल किसी के महल गया होगा। मुकर कर चला गया वो अपने वादे […]

मेरी नज़्म को अपने ज़ेहन 1 में उतर जाने दे, अहसासों को मेरे ज़रा सा असर कर जाने दे। भटकता रहा हूँ ताउम्र अजनबी दुनिया में, तेरी ज़िंदगी में अब मुझे घर कर जाने दे। […]

जुगनुओं का क़त्ल करने, काली रात आई है, माहताबों 1 ने अपनी सूरत, बादलों में छुपाई है। सहर का नाम मत लो, शब न ख़त्म होगी कभी, तूफ़ानों के तांडव ने, हर तरफ़ तबाही मचाई […]

जिंदगी को जिंदगी से जुदा कर रखा है, हमने अपनी मौत का गुनाह कर रखा है। बस्ती को रोशन करने की ख़ातिर हमने, अपना घर शब-भर 1 जला कर रखा है। रह न जाएं तनहा […]