Hindi-Urdu Poetry

साप्ताहिक कविता प्रतियोगिता

उठी है एक आवाज, सत्ता को पलटने के लिए, जागी है एक भावना,जन जन की चेतना के लिए, गूंजी है एक पुकार,कुछ बदलने के लिए, अब समाप्त करनी है लोगों में फैली जो है भ्रांति, समय आ गया है अब जन्मेगी एक क्रांति, आगाज़ करता हुआ एक विगुल कह रहा, डरो ना आंधी पानी में, हर फिजा खुल कर सांस लेगी अब इस कहानी में, मजदूरों और मेहनतकशों के इम्तिहानों की, अब लाल सलाम करती हुई उठेगी एक क्रांति हम जवानों की, हुई थी क्रांति... »

ख्वाब बुने

आओ एक ख्वाब बुने कल के वास्ते, सबकी अपनी अलग है मंज़िल पर एक है रास्ते, कुछ तो अलग करेंगे कुछ तो नया करेंगे अपने देश के वास्ते, चलो आज ही तय कर लेते है कौन से सही है रास्ते, जुनून है जज्बा है आत्मविश्वास से भरा एक हौसला है, दो हाथ है दो पैर है और सबसे महत्वपूर्ण कुछ अलग करने की लगन है, पर चिंता की है कि सब अपने में मगन है, पर हम जानते है कि नीचे धरा है ऊपर गगन है और हम में कुछ नया करने की लगन है ।... »

गंगा

गंगा

कहने को है अमृत की धारा, कूड़े से पटा हुआ उसका जल सारा । पाप धुलने का मार्ग बन गई गंगा, हर किसी के स्पर्श से मैली हो गई गंगा । कभी प्रसाद की थैली के नाम पर, कभी फूलों के बंडल के नाम पर, कभी कपड़े के गट्ठरों के नाम पर, भरती चली गई गंगा । धो डालो सारे रीति रिवाज, जो करते है गंगा को गन्दा, अब मिलकर साफ करेगा गंगा को हर एक बन्दा । समय आ गया है अब बदलने गंगा की मूरत, गंगा हमारी मां जैसी, अविरल है उसकी ... »

विरासत

विरासत ———- दादा का बजता ग्रामोफोन ,कानों में गूंजा करता है । वह आज भी घूमा करता है आंखों के रोशन दानों में, संगीत की धुन सुनते सुनते , कब समा गया. .. संगीत मधुर… इन कानों में , ना पता चला। गीतों का मधुर कैसेट प्लेयर , जो रोज बजाया करते थे , पापा गुनगुनाया करते थे, परेशानियों में कैसे हंसना है ,कब सीख गए? ना पता चला। कविता लेखन था मां का शौक, उनकी कविताएं पड पड कर , लेखनी कब हाथो... »

विरासत

दादा का बजता ग्रामोफोन ,कानों में गूंजा करता है । वह आज भी घूमा करता है आंखों के रोशन दानों में, संगीत की धुन सुनते सुनते , कब समा गया. .. संगीत मधुर… इन कानों में , ना पता चला। गीतों का मधुर कैसेट प्लेयर , जो रोज बजाया करते थे , पापा गुनगुनाया करते थे, परेशानियों में कैसे हंसना है ,कब सीख गए? ना पता चला। कलात्मकता व्यवहार में थी, रोजाना के रोजगार में थी, कब उतर गई व्यक्तित्व में , ना पता चल... »

हालत

कौन कहता है के मेरे होने से एक शहर बस्ता है, जहाँ निकल जाऊं मुझे मिलता एक बन्द रस्ता है, सांस मुझे आती नहीं या हवाओं ने रुख बदला है, महसूस करो तो ज़रा सच में मेरी हालत खस्ता है, दूर मीलों न जाओ आस-पास ही दौड़ाओ नज़रें, देखकर क्यों मुझे अकेले खड़ा हर इन्सां हंस्ता है, निकल पाती ही नहीं कहीं मैं घर से चाहूँ जितना, डर का मेरे खुले बाज़ार में लगाता मोल सस्ता है, मांगने पर उठ बढ़ता नहीं कोई हाथ भी मेरी तरह, ... »

हम ना बदल पाएँ

मुस्किल हुआ दिल को समझाना मुस्किल हुआ रूठोंं को मनाना कितना बदल गया ये ज़माना पर हम ना बदल पाएँ पर हम ना बदल पाएँ तुझसे बिछड़ के ज़िंदा हूँ ये मेरी फूटी किस्मत है मिले दो दिल तो जुदा कर देना ये दुनियाँ की फितरत है मुझसे जुदा होके सम्हल गए तुम पर हम ना सम्हल पाएँ कितना बदल गया ये ज़माना पर हम ना बदल पाएँ »

Mai hu rastrabhasha hindi

मीठी मीठी झंकार सी, कानों में रस घोलती, मैं हूं राष्ट्रभाषा हिंदी, स्वीकार किया सब ने मुझे, हू मातृभाषा हिंदी, फिर भी जताने को वर्चस्व अपना,क्यों बोलते हो अंग्रेजी, वह तो भाषा है विदेशी, मैं तो हूं तेरी अपनी, मैंने ही तो दिए हैं संस्कार तुझे मेरे बच्चों, फिर क्यों मुझसे ही मुंह फेरते हो मेरे बच्चो | »

मायूस

बड़े मायूस होकर, तेरे कूचे से हम निकले। देखा न एक नज़र, तुम क्यों बेरहम निकले। तेरी गलियों में फिरता हूँ, एक दीद को तेरी, दर से बाहर फिर क्यों न, तेरे कदम निकले। घूरती निगाहें अक्सर मुझसे पूछा करती हैं, क्यों यह आवारा, गलियों से हरदम निकले। मेरी शराफत की लोग मिसाल देते न थकते, फिर क्यों उनकी नज़रों में, बेशरम निकले। ख्वाहिश पाने की नहीं, अपना बनाने की है, हमदम के बाँहों में ही, बस मेरा दम निकले। दे... »

दोस्ती

दोस्ती

*** दोस्ती हो तो ऐसी कि उसके मुक़ाबिल पुश्तैनी दुश्मनी भी फ़ीकी पड़ जाये…. दोस्त के बिना रहा न जाये अगर दोस्त मिल जाए तो कुछ और न भाये…. **** @deovrat 15.09.2019 »

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