Category: Poetry on Picture Contest

Submission for ‘Poetry on Picture’ Contest

  • jud dai

    mere pass bhi khab hai

    tu pankh jud dai

    mere pass bhi dil hai,

    dhadkan jud dai

    mere pass bhi sai hai

    ruh jud dai

    mere pass bhi himat hai

    junun jud dai

    mere pass bhi lakirai hai

    kismat jud dai

    mere pass boot hai

    khuda  jud dai

    mere pass bhi khab hai

    pankh jud dai

  • कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है……..

    कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है……..

    कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है
    बीन कर कचड़ा सब्र कर रहे है

    ज़िन्दगी सिर्फ अमीरों की नहीं है
    ये तो तोहफा है खुदा का, ये गरीबों की भी है

    क्यों करते हो नफरत तुम इन सब को देख कर
    ये हम जैसों की ज़िन्दगी को सरल कर रहे है

    जब आते है गली मे, कुत्ते भोंकते है इन पर
    सब देखते है इनको शक की नज़र से

    कभी झाँक कर देखो इन सब के घर और आंगन मे
    ये अपनी ज़िन्दगी का क्या हस्र कर रहे है

    अक्सर हम फैंक देते है कचरे को यूँ ही
    ये सब उन्ही कचरों मे रोटी ढूंढते है

    ये भी काम रहे है अपनी आजीविका
    ये भी हमारी तरह इधर से उधर कर रहे है

    ज़िन्दगी इनकी भी बड़ी आम सी दिखती है
    बस ज़रा बदनाम सी दिखती है

    हम सब भी करते है काम अपना अपना
    वो सब भी इसी तरह अपना अपना कर्म कर रहे है

    कड़ी मेहनत से जूझना पड़ता है उन सब को भी
    थकान शरीर की होती है उन सब को भी

    हम सब उठाते नहीं कचड़ा शर्म के मारे ये सच है
    मगर ये सब ये काम बेधड़क कर रहे है

    शिकार होते है ये बस हमारे बनाये हुए समाजो के
    मिलती है गालियां, डांट और गुस्सा

    कचड़ा अगर ये न उठाये तो गंदगी बहुत बढ़ जाये हर जगह पैर
    ये सब ऐसा कर के, बहुत बड़ा धर्म कर रहे है

    कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है
    बीन कर कचड़ा सब्र कर रहे है …………………………………..!!

    !……….D K……….!

  • कचरे में खोयी जिंदगी

    कचरे में खोयी जिंदगी

    चुन कर कचरे से कुछ चन्द टुकड़ों को,
    जिंदगी को अपनी चलाते हुए,
    अक्सर देखे जाते हैं कुछ लोग थैलो में जीवन जुटाते हुए॥
    थम जाती है जहाँ एक पल में साँसों की डोरी,
    वहीं बच्चों को अक्सर चुपाते हुए, दो रोटी को कचरा उठाते हुए॥
    अक्सर देखे जाते हैं कुछ लोग थैलो में जीवन जुटाते हुए॥
    जहाँ बन्द होती है आँखे हमारी, जहाँ भूल कर भी हम रुकते नहीं हैं,
    लगाते हैं खुद ही जहाँ ढ़ेर इतने, एक लम्हा भी जहाँ हम ठहरते नहीं हैं,
    करते काम गन्दा खुद ही हम जहाँ पर,
    चेहरे भी अपने छुपाते नहीं,
    वहीं से ही अक्सर देखे जाते हैं कुछ लोग थैलो में जीवन जुटाते हुए॥

    ~ राही (अंजाना)

  • रोटी तलाशती ज़िन्दगी।

    रोटी तलाशती ज़िन्दगी।

    तलाशती ये ज़िंदगी कचरे के ढेर में रोटी.
    फेक देते हैं हम जो अनुपयोगी समझ के.

    कैसे करते गुजर बसर ये भी इंसान तो हैं
    जिंदगी ये पाकर मौत गले लगाये चल रहे.

    ज़हर भरे स्थानों में इन्हे अमृत की खोज है.
    ये जगह दो जून की रोटी देती ही रोज है.

    कुछ कपडे ही मिल जायें फटे तन ढकने को.
    यही हैं ताकती निगाहें थोड़ा सा हँसने को.

    लेकर वही फटी मैली बोरी चल दिये रोज.
    मन में विश्वास लिये आज मिलेगा कुछ और.

    भूखा है पेट इनका और चेहरे पर मुस्कान.
    ढेर कचरे का बन गया अब इनकी पहचान.

    कट रही है जिंदगी ऐसे ही गंदगी ढोते हुये.
    भविष्य नही इनसे क्या मेरे भारत का महान ?

    रश्मि….

  • मैं हु एक शराबी शराब जानता हू

    मैं हु एक शराबी शराब जानता हू

    मैं हु एक शराबी शराब जानता हू
    कुछ नहीं सिवा इसके नाम जानता हू

    उतर जाती है ये सीनै में सुकून देने
    कुछ नहीं में इसका ईमान जानता हू

    मैं हु एक शराबी शराब जानता हू
    कुछ नहीं सिवा इसके नाम जानता हू

    टूटे हुए दिलो को सुकून बड़ा देती है ये
    कुछ नहीं में बस इसका अरमान जानता हू

    मैं हु एक शराबी शराब जानता हू
    कुछ नहीं सिवा इसके नाम जानता हू

    न करो कोई इस मासूम को यूँ ही बदनाम
    कुछ नहीं बस में इसका हर नाम जानता हू

    मैं हु एक शराबी शराब जानता हू
    कुछ नहीं सिवा इसके नाम जानता हू

    लोग तो यूँ ही कहते है मुझको न पीयू में इसको
    कुछ नहीं में इसका हर अंजाम जानता हू

    मैं हु एक शराबी शराब जानता हू
    कुछ नहीं सिवा इसके नाम जानता हू…………………………..!!

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