जैसे उम्मीद की प्याली से चुस्की लेकर मानों मंज़िल की तरफ कोई सरिता बह जाती है वैसे ही मेरे चंद पलों का चुनिंदापन मुझे मिलते ही मेरे मन की विचार–शक्ति कविता बनकर कुछ कह जाती […]

आंधी और तूफानों में भी डटे रहते हैं, हम वो हैं जो हर मौसम में खड़े रहते हैं, उखड़ते हैं तो उखड़ जायें पेड़ और पौधे जड़ों से, हम तो वो हैं जो देश की […]

हाथ में हथियार और दिल को फौलाद किये बैठे हैं, सरहद के हर चप्पे पर हम बाज की नज़र लिये बैठे हैं, जहाँ सो जाता है चाँद भी चैन से हर रात में, वहीं खुली […]

धूप हो या छाया आंधी हो या तूफान करते रहते हैं हम देश की सुरक्षा दिन हो  चाहे रात मैं हूं इस  देश का सैनिक जो कभी भी झुकने नहीं देते हमारे देश की मान […]

धूप हो या छाया आंधी हो या तूफान करते रहते देश की सुरक्षा दिन हो  चाहे रात ये हैं हमारे देश के सैनिक जो कभी भी झुकने नहीं देते हमारे देश की मान 

माँ की गोद छोड़, माँ के लिये ही वो लड़ते हैं, हर पल हर लम्हां वो चिरागों से कहीं जलते हैं, भेजकर पैगाम वो हवाओं के ज़रिये सपनों में अपनी माँ से मिलते हैं, हो […]

लहू लुहान जिस्म रक्त आँख में चड़ा हुआ.. गिरा मगर झुका नहीं..पकड़ ध्वजा खड़ा हुआ.. वो सिंह सा दहाड़ता.. वो पर्वतें उखाड़ता.. जो बढ़ रहा है देख तू वो हिन्द का सपूत है.. वो दुश्मनों […]

जिम्मेंदारी को जब उसने महसूस किया तो, ऑटो रिक्शा भी चलाने लगती हैं वो ! पढ़ लिख के सक्षम होकर के वो अब, अंतरिक्ष में वायुयान उड़ाने लगती हैं वो !! कितने उदाहरण देखेंगे आप […]

अँधेरे कमरे से बाहर अब मैं निकलना चाहती हूँ, माँ की नज़रों में रहकर अब मैं बढ़ना चाहती हूँ, धुंधली न रह जाए ये जिन्दगी मेरी, यही वजह है के मैं अब पढ़ना चाहती हूँ, […]

ख़्वाब देखती है आँखै मेरी भी उड़ना चाहती हु मै भी पढू , लिखू बनू अफसर मै भी आकाश मै उड़ता जहाज देखू मै जब भी साथ वो अपने मुझे ले जाता है पढ़ने , […]

बचपन से ही सहती हूँ, मैं सहमी सहमी रहती हूँ, छुटपन में कन्या बन कर संग माँ के मैं रहती हूँ, पढ़ लिखकर मैं कन्धा बन परिवार सम्भाले रखती हूँ, फिर छोड़ घोंसला अगले पल […]

  माँ,मैं तेरे हर सपने को सच करके दिखाउंगी तेरे हर मुसीबत मे तेरे, मैं भी काम आउंगी रोशन कर दूंगी मैं तेरा नाम इस दुनिया मे मुझे भी आने दे माँ, इस दुनिया मे […]

माँ की कोख में ही दबा देते हो, मुझको रोने से पहले चुपा देते हो, आँख खुलने से पहले सुला देता हो, मुझको दुनियां की नज़र से छुपा देते हो, रख भी देती हूँ गर […]

कन्या बचाओ खुद कन्या कहती है- मुझको बचाओ तुम मुझको बचाओ, सपना नहीं अब हकीकत बनाओ, बेटा और बेटी का फर्क मिटाओ, बेटी बचाओ अब बेटी पढ़ाओ, बेटे के प्रति प्यार और बेटी को समझें […]

ये  अजूबा  किसने  कर दिया फक्त एक मुट्ठी मैं सारा हिन्द इकट्ठा कर दिया तीन ही रंगों मैं सारा हिन्द बया कर दिया केसरी है वीरो के , बलिदानो का प्रतीक जिन्होंने  स्वय को समर्पित […]

रंग नहीं महज़ ये तीनो हमारे हिंदुस्तान की शान है झंडा है ये हमारे देश का तिरंगा इसका नाम है सर से भी ऊँचा रखेंगे हम इसको जब तक जिस्म में जान है हर पल […]

राजा-शासन गया दूर कही, गणतंत्र का यह देश है | चलता यहाँ सामंतवाद नहीं, प्रजातंत्र का यह देश है | दिया गया है प्रारब्ध देश का, प्रजा के कर में; किन्तु है राजनीति चल रही […]

मुठ्ठी में तकदीर है मेरी, मेरे वतन की कर ले कोई कितनी भी कोशिश मिटा नहीं सकता| क्या करेगा वो इन्सान आखिर जो देश का राष्टगान भी गा नहीं सक्ता||

इक कचरेवाली रोज दोपहर.. कचरे के ढेर पे आती है.. तहें टटोलती है उसकी.. जैसे गोताखोर कोई.. सागर की कोख टटोलता है.. उलटती है..पलटती है.. टूटे प्लास्टिक के टुकड़े को.. और रख लेती है थैली […]

जिसे कहते हो तुम कूड़े का ढेर; वह कोई कूड़ा नहीं! वह है तुम्हारी, अपनी चीजो का ‘आज’ | जिसे खरीदकर कल तुमने बसाया था घर में; उन्ही चीजो का है यह ‘आज’ | जिस […]

जो बेबसी देख रहे हैं हम आज उनके चेहरो में , वो ढूंढेंगे दो वक्त की रोटी कूड़े पड़े जो शहरों में ! जात,पात,दुनियादारी उन्हें इन सबसे मतलब क्या, पेट की आग बुझाने को वो […]

  जो बेबसी देख रहे हैं हम आज उनके चेहरो में , वो ढूंढेंगे दो वक्त की रोटी कूड़े पड़े जो शहरों में ! जात,पात,दुनियादारी उन्हें इन सबसे मतलब क्या, पेट की आग बुझाने को […]

चुन कर कचरे से कुछ चन्द टुकड़ों को, जिंदगी को अपनी चलाते हुए, अक्सर देखे जाते हैं कुछ लोग थैलो में जीवन जुटाते हुए॥ थम जाती है जहाँ एक पल में साँसों की डोरी, वहीं […]

तलाशती ये ज़िंदगी कचरे के ढेर में रोटी. फेक देते हैं हम जो अनुपयोगी समझ के. कैसे करते गुजर बसर ये भी इंसान तो हैं जिंदगी ये पाकर मौत गले लगाये चल रहे. ज़हर भरे […]

मैं हु एक शराबी शराब जानता हू कुछ नहीं सिवा इसके नाम जानता हू उतर जाती है ये सीनै में सुकून देने कुछ नहीं में इसका ईमान जानता हू मैं हु एक शराबी शराब जानता […]