Chand sa mukhara hai tera

चांद सा मुखड़ा है तेरा,
समंदर से गहरी है आंखें तेरी,
जुल्फें हैं घनेरी तेरी
जो बिखर जाए तो
दिन में रात हो जाए,
चाल है मतवाली तेरी
जिस पर किसी का भी
दिल फिसल जाए,
क्या नूर पाया है तूने,
कयामत हो तुम बस कयामत हो,
ऊपर वाले ने फुर्सत से बनाया है तुझे,
क्या कमाल हो तुम बस कमाल हो,
तुझ पर मेरा दिल आया है,
बस इतनी सी गुजारिश है मेरी,
कुबूल कर लो इबादत मेरी |

Related Articles

Chand sa mukhara hai tera

चांद सा मुखड़ा है तेरा, समंदर से गहरी है आंखें तेरी, जुल्फें हैं घनेरी तेरी जो बिखर जाए तो दिन में रात हो जाए, चाल…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

New Report

Close