Lauta do fir se wahi manjar

लौटा दो फिर
से वही मंजर,
बाबा मेरे थे वो
कितने प्यारे,
उंगली पकड़कर
चलना मुझे सिखाया
था कभी आपने,
कंधों पर भी मुझे
झूला झुलाया
था कभी आपने,
तूतली बोली थी मेरी
तब ठीक से
बोलना सिखाया
था कभी आपने,
ठीक से पढना भी
तो आपने ही
सीखाया था बाबा,
मीठी झिडकी
भी मुझे लगाई
थी कभी आपने,
फिर रूठने पर
मुझे मनाया भी तो
आपने ही था बाबा,
वह ठहाके वाली
हंसी आपकी
अभी तक कानों
में गूंजती है बाबा,
लौटा दो फिर
से वही मंजर,
लौटा दो फिर
से वही बचपन |

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14 Comments

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 9, 2019, 4:31 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना

  2. देवेश साखरे 'देव' - September 9, 2019, 4:44 pm

    अतिउत्तम रचना

  3. Kanchan Dwivedi - September 9, 2019, 7:03 pm

    Heart touching

  4. NIMISHA SINGHAL - September 9, 2019, 9:50 pm

    Nice

  5. ashmita - September 9, 2019, 11:02 pm

    Nice

  6. राम नरेशपुरवाला - September 12, 2019, 11:01 pm

    Superb

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