Shreya
ऐ जिंदगी
June 15, 2023 in शेर-ओ-शायरी
ऐ जिंदगी तेरा सबक क्या लाज़वाब है,
ज़मीर की खातिर, गमों का दौर भी जरूरी है।
इस भाग-दौड़ से क्या हाँसिल हुआ अब तक,
इसका हिसाब करने को, इक ठौर भी जरूरी है।
जिस राह पर चले थे मंजिल को ढूंढने,
‘उसका मुकाम क्या है’, यह गौर भी जरूरी है।
बस प्यार के सहारे जीने चले थे हम,
अब जाके समझ आया, ‘कुछ और’ भी जरूरी है।