Angel

by Angel

Medieval Melody

June 20, 2023 in English Poetry

One day,
Beneath the sun ray,
I thought of a melody,
To be sung out loudly.

With long expressions and phrases,
the poetry was on medieval ages,
All about the Kings and Queens
And how their ministers spilled the beans.

With laughter I cracked,
The Ray then asked,
“What happened All Good?”
I said,”something I just Cooked.”

by Angel

ओ चन्द्रमा !

June 19, 2023 in मुक्तक

हाय ओ चन्द्रमा ! तू है कितना खूबसूरत ,
समाई है तुझमें जाने कितने हज़ारों की मूरत।
रौशनी तेरी जगती है मुझे सारी रात ,
तेरी इस आभा ने दी है नरलोक को मात।

चकोर बना छोड़ा है तूने मुझे ,
ओह ! प्रेम-जाल में फंसा रखा है मुझे।
मैं तेरी ओर ही क्यों ऐसी खींचती हूँ ?
जाने क्यूं तेरी ऊपर यूँ कविता रचती हूँ ?

जा ! तेरे इस माया जाल में मैं नहीं आती,
अरे ! ऐसे घाटे का सौदा मैं क्यों खाती ?
कृष्ण का खिलौना ही तो है तू ,
फिर किस घमंड रस में है तू ?

तेरे झांसे में मैं नहीं आयूँगी,
और जो तू नहीं माना तो सबक भी सिखाऊंगी।
अरे ऐसे चाँद से क्या प्रेम जो काली घटा से ही डर जाए?
जा कर पीछे बिजली के डर से छिप जाए।

अरे तू तो निरा खिलौना है।
और मेरे पास तो सोना है।
चाँदी की चमक के पीछे मैं क्यूं भागूं ?
रात रात भर मैं क्यों जागूँ ?

फिर भी ऐ चन्द्रमा , चल तुझपर दया करी
अर्धरात्रि आभा में तेरी मैंने सुबह करी।
हाँ ! मैं तुझपर दिल हर गयी ,
हाँ ! मैं चकोर की भाँती तेरी कांति में जाग गयी।

by Angel

कलम

June 16, 2023 in हिन्दी-उर्दू कविता

ऐ कलम !
आज तू बड़े दिन बाद
फिर हाथ आयी है,
कई दिनों बाद
फिर से तेरी ये
स्याही इन हाथों में इतराई है।

नीली- नीली स्याही के छींटे
फिर कागज़ पर पड़े हैं ,
हाथों में सिमटे शब्द
फिर कागज़ को घेरे हैं।

जाने कब-सेइंतज़ार में
थी तू,
जाने कब-से रिहाई
तलाश रही थी तू।

आज तेरे इस आशियाने को
मैं बिखेरूँगी,
आ ! तेरे जादू को मैं उकेरुंगी।

जग बदलने की शक्ति हैं तुझमें,
तो चल !
जग बदलते हैं।
रिहाई की भीख मांगने वालों को
स्वतंत्रता का स्वाद चखते हैं।

New Report

Close