Antariksha Saha

  • जब बच्चों में हैं भगवान,
    फिर क्यों मम्मी पापा खींचे कान
    क्योंकि कभी-कभी भगवान,
    शैतानी करने लगते हैं,
    बन करके नादान
    शोर मचाते हैं दिनभर,
    चुप हो जाएं तो है इनका एहसान
    अपनी मन मर्जी स […]

  • देश में कोरोना से निपटने के टीके आ गए,
    बेफिक्र हो इनको लगवाया जाए।
    यह है इतिहास का सबसे वृहद अभियान,
    इसने भारत के सामर्थ्य को दिलवाया सम्मान।
    दिलवाया सम्मान, सभी देश तारीफ़ कर रहे,
    आप भी लगवा लेना ये टीका, ल […]

  • नजरों में मुहब्बत और
    वाणी में मधुरिमा चाहिए
    इंसान ने इंसानियत को
    साथ रखना चाहिए।
    साँस ईश्वर की अमानत है
    समझना चाहिए,
    साँस रहने तक उसे
    नेकी निभानी चाहिए।
    दूसरे की साँस में अवरोध
    बिल्कुल भ […]

  • अगर निराशा है कहीं, दूर करो तत्काल,
    मन में अपने जोश को, सदा रखो संभाल।
    सदा रखो संभाल, जोश में जोश न खोना,
    आप हमेशा आग नहीं शीतलता बोना।
    कहे लेखनी नहीं, निराशा में रहना तुम,
    हिम्मत रखना दूर रहें […]

  • निन्दारत रहना नहीं, निंदा जहर समान,
    निन्दारत इंसान का, कौन करे सम्मान।
    कौन करे सम्मान, सभी दूरी रखते हैं,
    निन्दारत को देख, सब मन में हंसते हैं।
    कहे लेखनी छोड़, मनुज निंदा की बातें,
    अपने में रह मगन, न […]

    • Very very nice

    • “निन्दारत रहना नहीं, निंदा जहर समान,निन्दारत इंसान का, कौन करे सम्मान।”
      निंदा ना करने की सीख देती हुई कवि सतीश जी की बेहद सुन्दर कुंडलिया छन्द में बहुत ही सुन्दर और प्रेरक रचना ।
      “अपने में रह मगन, न कर दूजे की बातें।” बहुत ही प्रेरक पंक्तियां

    • अतिसुंदर भाव

  • बेकारी पर आप कुछ, नया करो सरकार,
    युवाजनों को आज है, राहत की दरकार।
    राहत की दरकार, उन्हें, वे चिंता में हैं,
    पायेंगे या नहीं नौकरी शंका में हैं।
    कहे ‘लेखनी’ दूर, करो उनकी आशंका,
    आज बजा दो आप, जोश का को […]

  • ठिठोली करो तुम खूब
    लेकिन दिल दुखाओ मत किसी का,
    जोर से गाओ मगर
    मत चैन लूटो तुम किसी का।
    किसी बीमार की जब रात को
    आँखें लगी हों मुश्किलों से
    जोर से डीजे बजाकर
    मत बनो जरिया दुःखों का।
    जब कभी कोई व्यथित हो
    द […]

  • सदा को कौन रहता है
    यहां इस जमीं में
    समय करके पूरा
    चले जाते सब हैं।
    तेरा व मेरा सभी
    कुछ यहीं पर
    रह जाता है
    कुछ नहीं साथ जाता।
    न आने का मालूम
    न जाने का मालूम
    बीच के ही सपनों में
    होता है मन गु […]

    • अतिसुंदर भाव

    • लाजवाब

    • सौ फीसदी स

    • “न आने का मालूम न जाने का मालूम
      बीच के ही सपनों में होता है मन गुम।
      खुली नींद सपना जैसे ही टूटा
      वैसे ही डोरों से नाता छूटा।”
      जीवन के एक अलग ही दृष्टिकोण को प्रस्तुत करती हुई कवि सतीश जी की बेहद गंभीर रचना, जो कुछ सोचने को मजबूर कर देती है।
      बहुत लाजवाब अभिव्यक्ति, उत्तम लेखन

  • मेरे घर के सामने वाले पड़ोसी ने,
    अपने घर की इमारत ऊंची उठाई।
    घर उनका है मैं कुछ कह भी ना पाई,
    पर मेरे आंगन की धूप हवा और
    चांदनी ने मुझसे शिकायत लगाई,
    फ़िर मैंने बोला उनको,
    मत करो इमारत की इतनी लंबी परछाई […]

  • 15 जनवरी को हम थल सेना दिवस मनाएं,
    73वें थल सेना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
    तिरंगे की शान हैं सैनिक,
    भारत का मान हैं सैनिक,
    पूरी रात जो जागे सीमा पर,
    उसी का नाम है सैनिक।
    रात होते ही हम, सुकून से सो जात […]

  • हमर देशक सिपाही हमर शान छै।
    देशक रक्षा में जिनकर प्राण छै।।
    नञ भोजन केॅ कोनो फिकीर छै।
    नञ छाजन केॅ कोनो फिकीर छै।।
    जाड़ गरमी तऽ एकहि समान छै।
    हमर देशक सिपाही हमर शान छै।। देशक रक्षा में…. […]

    • थल सेना स्थापना दिवस पर कवि विनय चंद जी द्वारा प्रस्तुत देश प्रेम से भरपूर बहुत सुंदर मैथिली कविता
      “देशक रक्षा में तन मन प्राण छै
      हिनकर बलिदानक नञ कोनो मोल छै।”

    • सादर नम

    • जय हिंद, सुन्दर अभिव्यक्ति

  • फेंक रहे थे जब तुम खाना,
    मैं भोजन की आस में थी।
    रोटी संग सब्जी जी भी है क्या,
    मैं वहीं पास में थी।
    तुमने शायद देखा ना होगा,
    मैं काले मैले लिबास में थी।
    तुम तो बैठे थे कार में अपनी,
    मैं वहीं अंधकार […]

  • समस्याएं बहुत हैं
    आपको मुँह खोलना होगा
    जरा बिंदास होकर
    आज तो कुछ बोलना होगा।
    गरीबी मिटाने के लगे
    जितने भी नारे हैं,
    उनको हकीकत में
    हमें अब तोलना होगा।
    बेरोजगारी से युवा
    हैं दर् […]

    • अतिसुंदर

    • बेरोज़गारी हो या कोई और मुद्दा ,कवि की कलम नहीं बोलेगी तो और कौन बोलेगा। समाज के हर वर्ग और हर क्षेत्र में लिखती कवि सतीश जी की कलम से निकले बहुत ही सुन्दर उद्गार । बहुत उम्दा लेखन

  • आज कुछ गा लूँ मैं
    तुम्हें सुना लूँ मैं,
    गीत ही गीत में भुला कर के
    दिल में अपने बसा लूँ मैं।
    मिटा दूँ सब की सब
    गलतफहमी,
    सच्चा गायक हूँ
    यह बता दूँ मैं,
    पूरा लायक हूँ
    यह दिखा दूँ मैं
    निकाल कर
    पलों की […]

  • धीमी-धीमी धूप संग में,
    मीठी-मीठी खुशियां लाई।
    तिल, गज्जक की खुशबू लेकर,
    सर्दी में संक्रान्ति आई।
    मकर संक्रान्ति मनाना है,
    गंगा जी में नहाना है
    गंगा जी ना जा पाओ तो,
    घर में जरूर नहाना है,
    सर्दी है तो हुआ […]

    • धीमी-धीमी धूप संग में,
      मीठी-मीठी खुशियां लाई।
      तिल, गज्जक की खुशबू लेकर,
      सर्दी में संक्रान्ति आई।
      — मकर सक्रांति पर कवि गीता जी की बहुत सुंदर और बेहतरीन रचना है यह। बहुत खूब।

    • कविता की सुंदर समीक्षा हेतु आपका हार्दिक आभार सतीश जी , बहुत-बहुत धन्यवाद।

    • बहुत खूब बहिन
      मगर चूरा दही तो भूल गई
      मकर संक्रांति संग खिचड़ी की बहुत बहुत बधाईयाँ

      • सादर धन्यवाद भाई जी 🙏
        मकर सक्रांति की बहुत-बहुत बधाई

  • चलो पतंग उड़ाएं
    लूट लें, काट लें पतंग उनकी
    सभी रंगीनियां अपनी बनायें
    चलो पतंग उड़ाएं
    चलो पतंग उड़ाएं।
    उनके चेहरे की
    खुशियों को चुराकर
    चलो आनंद मनायें
    चलो पतंग उड़ाएं।
    कटी पतंग दूसरे की
    जिस दिशा म […]

    • संक्रांति पर्व पर कवि सतीश जी की ख़ूब मस्ती भरी और खुशियों से सराबोर अति सुंदर कविता। बहुत खूब
      मकर संक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएं

    • अतिसुंदर भाव

  • कविता -मकर संक्रांति चलो मनाए |
    मकर संक्रांति आई पतंग चलो उड़ाए |
    उड़े ऊंचाई जैसे सोच पेंच चलो लड़ाये |
    डोर पतंग की थाम खूब तुम रखना |
    कट न जाये उम्मीदे डोर चलो बचाए |
    उड़ने दो अरमानो को उंची पतंग जैसे |
    गिर ना […]

  • आपको नींद आ गई आधी
    और हम गीत लिख रहे हैं अब
    क्या करें यह कलम भी चंचल है
    जागती तब है, सो गए जब सब।
    स्वप्न में भी मनुष्य की पीड़ा
    भाव को शिल्प को जगाती है
    तन अगर चाहता है सोना भी
    ये कलम खुद ब खुद लिखाती है। […]

    • वाह वाह बहुत सुंदर

    • बहुत खूबसूरत कविता

    • कवि की कविता लिखने की आदत होती है , कविता लिखे बिना वह रह ही नहीं सकता है। यही भावनाएं प्रस्तुत करी हैं कवि सतीश जी ने अपनी इस रचना में”तन अगर चाहता है सोना भी ये कलम खुद ब खुद लिखाती है।” एक कवि की कवि पर ही आधारित बहुत सुंदर कविता, लाजवाब अभिव्यक्ति

  • राग कहाँ रागिनी कहाँ मेरी
    इस सड़क पर लिखी कहानी है,
    दो घड़ी आप भी खड़े होकर
    देख लो क्या है मेरी कहानी है।
    लोहड़ी क्या, कई त्यौहार आये
    आपने खीर पुए खूब खाये
    मगर मुझे तो बस सुगन्ध आई
    वो भी जब यह हवा बह […]

    • बहुत खूब

    • सुन्दर कविता

    • सड़क किनारे बैठे निर्धन व्यक्ति की बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की है कवि सतीश जी ने ।कोई त्यौहार हो या रौनक हो मगर मैं एक सा रहा अब तकपड़ा हूँ इस तरह से बेदम हो,राग कहाँ रागिनी कहाँ मेरी’… हृदय स्पर्शी रचना

  • ठोस के साथ हमें
    कुछ उदार रहना है
    अपनी आदत में हमें
    अब सुधार करना है।
    स्वहित के साथ हमें
    दूसरों के हित में भी
    थोड़ा रुझान रखना है
    मदद की तरफ बढ़ना है।
    जिन्हें जरूरत है
    उन्हें मदद करने
    डगर उनकी सरल […]

    • अतिसुंदर रचना

    • बहुत सुंदर

    • असहायों की सहायता करने को प्रेरित करती हुई कवि सतीश जी की उत्कृष्ट रचना है यह।”महान बन सकें न हम भले मगर महानता की सीख लेकर उसे व्यवहार मेंउतारना है,” समाज के हर वर्ग में मदद करने की चेतना जागृत करती हुई बहुत सुन्दर पंक्तियां । उत्तम लेखन

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