Deepak Singh

  • काली रात बीत गई, नई सुबह आई है |
    शुभ हुआ अशुभ पर भारी मंगल बेला आई है |
    पौष माह की सर्द रातों का चंद्रमा, अब माघ माह में आया है |
    सूर्य ने भी करवट बदली मकर संक्रांति की बेला पर, उत्तर दिशा की ओर निकला आज अपना तेज लेकर है |

  • कड़कती बिजली की तरह चमचमाती हुई आती हो और सर्द हवा सी छू के निकल जाती हो |
    इंतज़ार करते हुए तेरा मैं अक्सर ठिठुर जाता हूं संदेशा जो न आए तेरा तो व्याकुल हो जाता हूं |

    नींद में होता हूं जब संदेशा आता है तेर […]

  • तेरी खुली जुल्फों से मैं एक सवाल करता हूँ
    चाहत है तेरी कौन ये दरखास्त बारंबार करता हूँ |

    लगाए थे तूने आज तक कई पहरे सोच पर मेरे
    मनाया तुझे कई बार पर तू मानी न कहने पर मेरे |

    जिन आंखों में शर्म थ […]

    • तेरी खुली जुल्फों से मैं एक सवाल करता हूँ
      चाहत है तेरी कौन ये दरखास्त बारंबार करता हूँ |

      लगाए थे तूने आज तक कई पहरे सोच पर मेरे
      मनाया तुझे कई बार पर तू मानी न कहने पर मेरे |

      बहुत ही रुमानी तथा प्रेम से लबरेज अभिव्यक्ति सुंदर तथा भावपूर्ण रचना

    • सुंदर

  • ऐ मदिरा, मैं नशे में तेरे चूर रहता हूं होश आ भी जाए तो खुद को भूल जाता हूँ |
    आदत सी हो गई है तेरी इस कदर, न पाऊं तुझे पास तो बैचेन हो उठता हूँ |

    नासमझ हैं वो लोग जो तुझे पीने वाले को शराबी कहकर बदनाम करते है […]

  • हाय रे कोरोना तूने क्या – क्या गजब ढाया है,
    नया साल आने को है और तू अब तक सता रहा है |

    क्या कुछ जतन न किया हमने तुझे मनाने को,
    घर में ही कैद हो गए खुद की जान बचाने को |

    विश्व की अर्थव्यवस्था तक गिर च […]

  • कल तक जो कहती थी, मैं नहीं साझा कर सकती अपने दिल का हाल, वो अब लबों से कुछ बोले जा रही है
    सच कहूं तो दिल के राज धीरे से खोले जा रही है |

    कल तक था जिसे शादी – ब्याह, फैशन से परहेज़, वो आज बाजार की रौनक बटोरे […]

  • तू क्यों नहीं समझती मेरे दिल के जज्बातों को…
    क्या तेरे सीने में दिल नहीं…?
    पत्थर है शायद !
    दिल होता, तो धड़कता जरूर |

    मैं वर्षों से एकटक लगाये तुझे देख रहा हूं,
    और तुझे तेरी खूबसूरती का अंदाजा तक नह […]

  • मेहनत का कल मेहनताना,
    फल पाने को मन ताना बाना |

    मेहनत की सीढ़ी लगन, मंजिल मेहनताना,
    मन आतुर पाने को मेहनताना |

    देह करौंदे, मेहनत का कड़वा खाना,
    मेहनत का स्वाद कुटकी जैसा |

    अनप […]

  • मानव का गहना है वाणी,
    वाणी का भोगी है प्राणी ।
    मधुर वचन है मीठी खीर,
    कटु वचन है चुभता तीर ।
    सद वचन है सदा अनमोल,
    मन कांटे से इसको तौल ।
    हिय का रूप है वाणी, […]

  • विदाई का ग़म किसी से छुपाया नहीं जाता,
    दिल की आह को दिखाया नहीं जाता |

    लाख करे कोशिश कोई ग़म छुपाने की,
    चेहरे को नहीं जरुरत इसे दिखाने की |

    विदाई एक अलगाव होती है,
    प्यार रिश्तों का विखराव होती है |

    कोई क […]

  • सुंदर दिखना सबको भाता,
    हे जीवन के भाग्य विधाता ।
    तन की काया कुछ पल सुंदर ,
    मन की माया हर पल सुंदर ।
    तन सुंदर पर मन न हो कोमल,
    वह कुटिल मानव जैसा पुष्प सेमल,
    मन […]

  • प्रेम जिसका इंजन, गाड़ी जिसकी यारी |
    इजहार चालक है, खुशियाँ हैं सवारी |

    वह एक फरिश्ता है, खूबसूरत गुलदस्ता है |
    लगता बहुत नाजुक, पर सच्चे दिल से रिश्ता है |

    वह आस से जीता है, विश्वास से चलत […]

  • जीवन तरु की नई कोंपल है बचपन, कोंपल से बनी शाखा युवापन |
    शाखाओं से झुका वृक्ष बूढ़ापन, यही चक्र है बचपन, युवा और बूढ़ापन |
    खेल खिलौनों में गुजरा प्यारा बचपन, यादें जीवन की सँजोए हुये है बूढ़ापन […]

  • सबसे तेज होती है, वक्त की रफ्तार |
    वक्त में घुली है, सबकी जीत या हार |
    वक्त के दो पहलू, नफरत और प्यार |
    वक्त से ही जुड़े हैं, जीवन और मरण के तार |

    जिसे समझते हैं हम, खुदा का फरिश्ता |
    लेकिन वक्त बदलता है, अ […]

  • जी, आभार आपका |

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