Geeta kumari

  • सुन्दर और प्रेरणा देती हुई समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद सतीश जी
    बहुत-बहुत आभार सर

  • कविता की गहराई को समझने के लिए और इतनी सुंदर समीक्षा के जरिए उत्साहवर्धन करने हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी

  • प्रेरणा देती हुई इस सुन्दर समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी

  • प्रेरक और उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी

  • समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी

  • बहुत सुंदर और प्रेरक समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सर

  • आपकी इस उत्कृष्ट और प्रेरक समीक्षा हेतु धन्यवाद करने को शब्द नहीं मिल रहे हैं सतीश जी।इस सुंदर समीक्षा के लिए आपका हार्दिक आभार सर

  • इतनी सुन्दर और प्रेरणा देती हुई समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत
    बहुत धन्यवाद सतीश जी।आपकी समीक्षा वास्तव में कवि हृदय में उत्साह का संचार करती हैं, हार्दिक आभार सर

  • इतनी सुन्दर समीक्षा हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी।
    आपकी दी हुई समीक्षाएं सदैव ही उत्साहवर्धन करती हैं।

  • कविता की इतनी सुंदर और उत्साह वर्धक समीक्षा एक विद्वत ही कर सकता है। आपकी कलम से निकली इस सुंदर एवं उत्साह प्रदान करती हुई समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी।कविता के भाव को अच्छी प्रकार से समझने के लिए अभिवादन सर

  • मुस्कुरा कर बोलना,
    इन्सानियत का जेवर है।
    यूं तेवर न दिखलाया करो,
    हम करते रहते हैं इंतज़ार आपका,
    यू इंतजार न करवाया करो।
    माना गुस्से में लगते हो,
    बहुत ख़ूबसूरत तुम
    पर हर समय गुस्से में न आया करो।
    बिन खता क […]

    • मुस्कुरा कर बोलना,
      इन्सानियत का जेवर है।
      यूं तेवर न दिखलाया करो,
      हम करते रहते हैं इंतज़ार आपका,
      – रोमानियत अंदाज की बहुत खूबसूरत पंक्तियां। मुस्कुराने को प्रेरित करती शानदार रचना। बेहतरीन शिल्प, खूबसूरत भाव।

      • इतनी सुन्दर और प्रेरणा देती हुई समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत
        बहुत धन्यवाद सतीश जी।आपकी समीक्षा वास्तव में कवि हृदय में उत्साह का संचार करती हैं, हार्दिक आभार सर

    • अतिसुंदर भाव

    • मुस्कराहट दिलों को जोड़ती है,
      क्रोध रिश्ते, इज्जत और दिल सबकुछ खत्म कर देता है
      सुंदर रचना

    • सुंदर रचना गीताजी। वैसे देखा जाए तो सही मायने में मुस्कुराहट की कीमत तेवर झेलने बाद ही तो समझ आती है !

    • सर्वश्रेष्ठ कवि, सर्वश्रेष्ठ आलोचक और सर्वश्रेष्ठ सदस्य सम्मान की बहुत बहुत बधाई गीता जी।

  • सब्र की जरूरत है,
    समय सब कुछ बदलता है।
    परिवर्तनशील इस संसार में,
    सांझ तक सूर्य भी ढलता है।
    जीवन में श्रेष्ठ कर्म करो,
    यह रामायण सिखाती है।
    द्वेष,बैर भाव और लालच को,
    महाभारत दर्शाती है।
    महाभारत ग्रंथ ने […]

    • सब्र की जरूरत है,
      समय सब कुछ बदलता है।
      परिवर्तनशील इस संसार में,
      सांझ तक सूर्य भी ढलता है।
      — आपकी रचना बहुत श्रेष्ठ रचना है। शिल्प व भाषा का सुन्दर समन्वय। जीवन दर्शन से समाहित अद्भुत समन्वय

      • आपकी इस उत्कृष्ट और प्रेरक समीक्षा हेतु धन्यवाद करने को शब्द नहीं मिल रहे हैं सतीश जी।इस सुंदर समीक्षा के लिए आपका हार्दिक आभार सर

    • बहुत सुंदर

    • धीरज सफलता की कुंजी है
      बहुत खूब

  • एक युवती बन कर बेटी,
    मेरे घर आई है।
    अपने खेल खिलौने माँ के घर छोड़कर,
    हाथों में लगाकर मेहंदी
    और लाल चुनर ओढ़ कर
    मेरे घर आई है।
    छम छम घूमा करती होगी,
    माँ के घर छोटी गुड़िया सी
    झांझर झनकाकर, चूड़ि […]

    • एक युवती बन कर बेटी,
      मेरे घर आई है।
      अपने खेल खिलौने माँ के घर छोड़कर,
      हाथों में लगाकर मेहंदी
      और लाल चुनर ओढ़ कर
      मेरे घर आई है।
      —— बहुत खूब, बेहतरीन रचना, भाव व शिल्प का अद्भुत समन्वय

    • बहुत सुंदर और प्रेरक समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सर

    • अतिसुंदर भाव

    • बेटी
      बचपन की यादों को
      संजोकर
      चली ससुराल

  • धन्यवाद अनु जी। राधे राधे

  • समसामयिक यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती हुई बहुत सुन्दर रचना

  • सुन्दर समीक्षा हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद सर 🙏

  • उत्साहवर्धक और प्रेरणादायक समीक्षा हेतु आपका हार्दिक स्वागत और धन्यवाद सतीश जी🙏

  • कविता की इतनी सुंदर समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद।आपकी लेखनी से निकली इस प्रेरक समीक्षा हेतु तहे दिल से शुक्रिया

  • कान्हा ने बोला राधा से,
    तेरी ये अखियां कजरारी।
    मन मोह लेती हैं मेरा प्यारी,
    इठलाती फिर राधा बोली।
    मोहन तुम्हारी मीठी बोली,
    हर लेती है हिय को मेरे,
    भागी भागी आती हूं सुन, […]

    • राधाकृष्णन का मधुर वार्तालाप
      बहुत सुंदर प्रस्तुतीकरण

    • राधे राधे
      बहुत सुन्दर भाव

    • भागी भागी आती हूं सुन,
      मीठी तेरी बंसी की धुन।
      कान्हा बोले मृदुल भाषिणी,
      सुन मेरी सौन्दर्य राषिणी
      —– कवि गीता जी की बहुत सुंदर कविता है यह। भाव की मधुरिमा पाठक हृदय में मिठास का संचार करने में पूरी तरह सक्षम है। शिल्प भी श्रेष्ठ भाव भी उत्तम, अभिव्यक्ति और भी लाजवाब। बहुत खूब

      • कविता की इतनी सुंदर और उत्साह वर्धक समीक्षा एक विद्वत ही कर सकता है। आपकी कलम से निकली इस सुंदर एवं उत्साह प्रदान करती हुई समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी।कविता के भाव को अच्छी प्रकार से समझने के लिए अभिवादन सर

    • अतिसुंदर भाव

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