ख़ामोशियाँ जब ज़ुबाँ बनने लगीं

January 21, 2022 in हिन्दी-उर्दू कविता

ख़ामोशियाँ जब ज़ुबाँ बनने लगीं,
रफ्ता-रफ्ता दिलों की दूरियाँ घटने लगीं।
मोहब्बत में मीठे अहसास हुए इस कदर,
एक दूजे की कदर अब बढ़ने लगी।
बिन कुछ कहे वो हमें अब समझने लगे,
ख़ामोशियाँ भी बातें करने लगी॥
______✍गीता

सर्दी का सितम

January 21, 2022 in हिन्दी-उर्दू कविता

नीले आसमान पर बादलों का पहरा था,
बादलों का रंग भी श्यामल गहरा था।
सूरज की ऑंख मिचौली जारी थी
अब बारिश आने की बारी थी।
साथ निभाने कोहरा भी आ गया,
देखते-देखते धरा पर छा गया।
ठंड बढ़ती जा रही है इस कदर,
सर्दी के सितम का हो रहा सब पर असर॥
______✍गीता

पूस माह में सावन आया

January 9, 2022 in गीत

पूस माह में सावन आया,
काली घनघोर घटाएँ लाया।
झमाझम मेघों से बरसा पानी,
कुदरत को ऐसे सावन भाया ।
सर्दी में सर्दी और बढ़ी,
जलधर इतना जल कहाँ से लाया।
यह कैसा परिवर्तन ऋतु का,
देखो पूस में सावन आया।
भीगा गगन और भीगी वसुंधरा,
हर वृक्ष का हर पल्लव नहाया।
ना जाने क्या समाया है प्रकृति के मन में,
जो पूस माह में सावन आया॥
_______✍गीता

नव-प्रभात

January 4, 2022 in हिन्दी-उर्दू कविता

कनक तश्तरी सा आलोकित भानु
लुटा रहा है स्वर्ण रश्मियाँ ।
दूर-दूर तक बिखरा सोना,
हर पत्ती हर डाली -डाली
रौशन हुआ है हर कोना-कोना।
देखो नव प्रभात हो रहा है,
जागो, अब नहीं है सोना॥
_____✍गीता

हिम से ढ़की हुई हर डाली

December 12, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

सुबह-सुबह सूरज की लाली,
हिम से ढकी हुई हर डाली।
पत्ते-पत्ते बूटे-बूटे पर,
कुदरत ने कारीगरी कर डाली।
बर्फ़ के फ़ाहे गिर रहे राहों पर,
पवन भी सर्द चली है आली।
बादलों ने घेरा है नभ को,
सूरज खेले ऑंख-मिचौली।
घर के अन्दर बैठे हैं सब
राहें हुई हैं खाली-खाली॥
काव्यगत विशेषता…. अनुप्रास अलंकार का प्रयोग किया गया है।
_____✍गीता

हिम से ढ़की हुई हर डाली

December 12, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

सुबह-सुबह सूरज की लाली,
हिम से ढकी हुई हर डाली।
पत्ते-पत्ते बूटे-बूटे पर,
कुदरत ने कारीगरी कर डाली।
बर्फ़ के फ़ाहे गिर रहे राहों पर,
पवन भी सर्द चली है आली।
बादलों ने घेरा है नभ को,
सूरज खेले ऑंख-मिचौली।
घर के अन्दर बैठे हैं सब
राहें हुई हैं खाली-खाली॥
_____✍गीता

अतीत के पन्ने

December 10, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

आज अतीत के कुछ पन्ने खोले,
वो पुराने क्षण फिर बोले।
उन पलों को जी गई मैं,
अमृत-प्याला पी गई मैं॥
______✍गीता

वीरों की वीरगति..

December 10, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

थम गया वक्त है, और आसमान झुक गया,
ऐसी वीरगति को देख,
एक पल को काल चक्र भी रूक गया।
ऑंख में आ गए हैं ऑंसू..
श्रद्धांजलि देने को उनको,
देश का तिरंगा झुक गया॥
______✍गीता

धूप

December 8, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

धूप समेटकर अपने सुनहरी वसन,
चल पड़ी प्रीतम से करने मिलन
ओढ़ कर सितारों भरी काली चुनर
पलकों में सुनहरे ख्वाब सजाकर
कर के वादा कल फिर आने का जग से,
दुनियाँ को देने दीप्ति आकर
साॅंझ सखी से मिलकर जाती,
वादा निभाने धूप अगले दिन फिर है आती॥
_____✍गीता

*धूप*

December 8, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

धूप समेटकर अपने सुनहरी वसन,
चल पड़ी प्रीतम से करने मिलन
ओढ़ कर सितारों भरी काली चुनर
पलकों में सुनहरे ख्वाब सजाकर
कर के वादा कल फिर आने का जग से,
दुनियाँ को, देने को दीप्ति आकर
साॅंझ सखी से मिलकर जाती,
वादा निभाने धूप अगले दिन फिर है आती॥
_____✍गीता

जब साथ किसी अपने का पाया..

December 4, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिम को भी पिघलते देखा है,
सूर्य की तपिश पा कर के।
नदियों को जमते देखा है,
चन्द्र की शीतलता पा के।
ऑंख के ऑंसू भी ठहरे,
जब साथ किसी अपने का पाया।
बेचैनी में चैन का एक पल
मन में एक सुकूँ सा लाया॥
_____✍गीता

सच्चा मित्र

November 21, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

ग़मगीन हालत में जो ला सके,
अधरों पर मुस्कान।
वही तो सच्चा मित्र है,
उसकी निस्वार्थ मोहब्बत है महान।
सुख-समय में करे जो हंसी-मजाक भी,
संकट की घड़ी में जिम्मेदारी ले सुख देने की।
दोस्त के सुख दुःख की हो
जिसे पहचान,
कठिन हालात में भी लबों पर ला सके मुस्कान।
ऐसा दोस्त ज़िन्दगी का खज़ाना है,
सबकी किस्मत में कहाॅं ऐसे दोस्त का पाना है॥
______✍गीता

मेरी कलम से

November 14, 2021 in गीत

जब-जब मेरी कलम चले,
ऐसा कुछ लिखती जाऊँ।
जीवन की सच्चाई कभी और
कभी कल्पना में खो जाऊँ।
जन-जन की बात लिखूँ मैं,
और कभी लिख डालूँ मन की।
कभी सिसकती साॅंसे सुन कर,
लिख डालूँ पीड़ा जीवन की।
कभी चमकते चाँद से पूछूँ,
क्यों घटते बढ़ते रहते हो,
कभी चहकते पंछियों से पूछूँ,
आपस में क्या कहते रहते हो।
सौम्य पवन जब भी बहती है,
तुम इतने याद क्यों आते हो॥
_____✍गीता

ज़िन्दगी का अफ़साना..

November 13, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कहीं दिन है कहीं रात है,
कहीं धूप कहीं बरसात है।
सुख और दु:ख आना-जाना है,
यही ज़िन्दगी का अफ़साना है।
लेकिन कुछ सुख-दुःख,
ठहर से जाते हैं जीवन में
सुख का ठहरना तो मन भाया,
दुःख का ठहरना ना रास आया।
यही कटु सच्चाई जीवन की,
कभी कुछ खोया, कभी कुछ पाया॥
_____✍गीता

कुछ कहते हैं बीते पल

November 7, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

क्या बात है कुछ बीते लम्हों की,
ठहर से गये हैं जीवन में।
बस गये तन मन में मेरे,
जीवन की पूंजी बन कर के।
बचपन की कुछ याद पुरानी,
बस गई बन कर एक कहानी।
यौवन की कुछ याद सुहानी,
कुछ मीठी, कुछ ऑंख में लाई पानी।
मेहनत कर के खाई रोटी,
परिश्रम से ही पाया पानी।
भूले-बिसरे जो पल मेरे,
उन पलों को भी नमन् है।
याद रहे जो पल जीवन के,
उनको मेरा अभिनन्दन है॥
______✍गीता

अमावस की रात

November 4, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

अमावस की रात है ,
सुलगते से जज्बात हैं।
एक दिया जलाकर करूँ रौशनी
वो कहते यह बात हैं।
दिया जलाकर मिटे अंधेरा,
मन के तम का क्या करूँ।
आज बाहर है रौशनी,
मन के तम से मैं ड़रुॅं।
मन का अंधेरा दूर कर दे,
ऐसा दिया कहाँ से लाऊँ।
मन को दे दे कुछ सुकून जो,
ऐसे पल कहाँ से पाऊँ।
दीप जलाए जब जग सारा,
मैं दिल जलाकर करती उजियारा॥
_____✍गीता

तुम्हारे बिना..

October 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

सूनी-सूनी सी फ़िज़ाऍं हैं,
सूनी सी सब दिशाऍं हैं।
आप नहीं हैं मेरी ज़िन्दगी में अगर,
सूनी-सूनी सी लगती है ड़गर।
हमें ही हमारी नहीं है खबर,
किसी की हमको लगी है नजर।
जुबाॅं चुप है ऑंखें राज़ कहती हैं मगर,
तुम्हारे बिना अब नहीं है बसर,
सूनी-सूनी सी ज़िन्दगी है ये
सूना-सूना सा लगता है नगर॥
_____✍गीता

लेखन

October 21, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

मन के भाव लिखा करती हूँ,
ज़िन्दगी की धूप और छाॅंव लिखा करती हूँ।
कभी “खुशियाँ” तो कभी,
“घाव” लिखा करती हूँ।
आभार आपका आप इसे कविता कहते हैं,
मैं तो बस जज़्बात लिखा करती हूँ।
कभी दुनियाँ के, कभी निज-हालात
लिखा करती हूँ॥
_______✍गीता

अम्बर पर मेघा छाए..

October 20, 2021 in गीत

दामिनी चमक रही है,
यामिनी लरज़ रही है।
अम्बर पर मेघा छाए,
नीर बरसता ही जाए।
मन मेरा घबराए
देख कर ऐसा मौसम,
तिमिर मुझको डराए।
डर बढ़ता ही जाए,
पवन चल रही सीली-सीली,
भीग गयी मेरी चूनर नीली॥
_____✍गीता

बरसात

October 18, 2021 in गीत

सर्द पवन का झोंका लेकर,
आई ये बरसात है।
बे मौसम ही आई लेकिन,
कुछ तो इसमें बात है।
भीगे सारे बाग-बगीचे,
भीगे पुष्प और पात हैं।
भीग गया है तन-मन सारा,
भीग गये जज़्बात हैं॥
_____✍गीता

साहित्य और साहित्यकार

October 17, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

साहित्य ऐसा रचना कवि,
जिसमें दिखाई दे समाज की छवि।
बातें हों ऊंचे पर्वत, गहरे सागर की
कभी बहती पवन कभी उगता रवि।
दुख-सुख की चर्चा करे कवि,
कभी बातें हों मुस्काने की।
विरह की व्यथा कहे कभी,
कभी गाथा अश्क बहाने की।
जन-जन में फैली आशा और निराशा की,
जब कवि ज्योति जलाता है,
वही सच्चा साहित्यकार कहलाता है।
जब कोई नदी समुन्दर से मिलने जाती है,
बस, कवि की नजर ही उसे देख पाती है।
काली घटाएँ और ठंडी हवाएँ,
ये तो साहित्य की जान हैं।
मौसम और माहौल से परिचित करवाना,
साहित्यकार की पहचान है॥
_____✍गीता

अधूरी सी ज़िन्दगी

October 17, 2021 in गीत

अधूरी सी हो गई है ज़िन्दगी,
अधूरा सा हो गया संसार है।
पूरी ना हो पाई कुछ अभिलाषा,
अधूरा सा रह गया प्यार है।
अभी दर्द में बहुत हूँ,
थोड़ा समय लगेगा मुस्काने में।
दर्द की नगरी से वापस,
समय लगेगा आने में।
थोड़ा हाथ बढ़ाना तुम भी,
मुझको वापस लाने में।
थोड़ा समय लगेगा मुझको,
फिर से गाना गाने में।
फुल मुरझा जाए जब दिल का,
एकाएक नहीं खिलता ।
सच ही कहा है एक शायर ने,
कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता,
कहीं ज़मीं तो कहीं आसमान नहीं मिलता॥
________✍गीता

दशहरा

October 15, 2021 in गीत

मन के रावण को मारने के लिए,
दशहरा मनाया जाता है।
किस-किस ने रावण को मारा
कौन राम-मय हो कर आया है।
दशहरा शुभ हो….
यह गीत तो सभी ने गाया है।
कब यह देश अवध पुरी होगा,
कब सीता सुखचैन से राहों पर चल पाएगी,
प्रतीक्षा रत हैं मेरी आँखें,
वह घड़ी कभी तो आएगी..
वह घड़ी कभी तो आएगी॥
______✍गीता

तनहाइयाँ

September 29, 2021 in गीत

दिल के दर्द को कैसे तुम्हें समझाएँ,
हैं बहुत तनहा, यह कैसे तुम्हें बताऍं।
साॅंझ, सवेरे सूरज की लाली है,
मगर दिल उमंगों से खाली है।
रातों को तारे जब टिमटिमाते हैं,
मेरी आँखों के ऑंसू भी झिलमिलाते हैं।
चाॅंद भी मौन सा निहारे मुझको,
आ बैठ पास दर्द दिखा दूॅं तुझको।
सुकून के पल अब नहीं मिल पाते हैं,
ये तो गुज़रे ज़माने की बातें हैं।
दिल के दर्द को कैसे समझाऊँ,
हूँ बहुत तनहा यह कैसे बताऊँ॥
______✍गीता

बरसात की रात

September 24, 2021 in गीत

जल की बूॅंदें गिरी सारी रात,
रात भर होती रही बरसात।
तिमिर छाया रहा भोर में भी,
ऐसे हो गये थे हालात।
ना चन्द्र दिखे ना सूर्य ही आए,
मोती गिरते रहे सारी रात।
भीग गया धरा का ऑंचल,
भीग गये सब पुष्प और पात।
नभ से बूॅंदें गिरी सारी रात,
ऐसी हुई जल की बरसात॥
______✍गीता

ये श्याम वर्ण के बादल..

September 15, 2021 in गीत

श्याम वर्ण के बादलों से,
जब गगन घिर जाएगा।
नीला नीला आसमान,
मेघों के पीछे छुप जाएगा।
तब जल की गिरे फुहार,
शीतल-शीतल चले बयार।
भीगेगी तब धरती सारी,
भीगेगा संसार॥
_______✍गीता

हिंदी दिवस पर चन्द पंक्तियाँ

September 14, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिंदी है भारत की भाषा,
मेरे देश की पहचान है।
हिंदी की श्रीवृद्धि हो,
ऐसा मेरा अरमान है।
हिंदी से हिंदुस्तान है,
हिंदी ही हमारी पहचान है।
यह वह भाषा है, जिसमें हम हॅंसते गाते हैं,
हिंदी में ही हम भारतवासी,
अपनी व्यथा-कथा सुनाते हैं।
आओ हम हिंदी का सम्मान करें,
हिंदी में मेरी चले लेखनी,
हिंदी का ही हम गुणगान करें॥
______✍गीता

ऐ ज़िन्दगी सुन..

September 12, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

ऐ ज़िन्दगी सुन,
कितनी बदल गयी हो तुम।
हॅंसती खिलखिलाती थी कभी,
अब रहने लगी हो गुमसुम।
वही ठंडी हवाएँ, वही बादल बरसते,
फिर ये नैना मेरे नीर लिए क्यूँ तरसते।
ऐसी आशा ना थी तुमसे,
बदलोगी एक दिन इस कदर
कि लगने लगेगा तुमसे डर।
छाई घनघोर निराशा है,
क्यूँ हो गयी ये दुर्दशा है।
खो दिया एक सितारा,
मैंने अपने गगन का।
वो था बहुत ही प्यारा,
अति विशिष्ट जीवन का।
अश्क गिरे लब तक आए,
यादों में रहती हूँ गुम,
ज़िन्दगी कितनी बदल गयी हो तुम॥
____✍गीता

अवनि और अम्बर

September 10, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

अवनि और अम्बर का कब मिलन हुआ,
देखा दूर क्षितिज में तो मिलने का बस भ्रम हुआ ।
नभ ने बरसा कर रिमझिम जल,
खूब नेह दिया धरा को
तपती धरती पर गिरता पानी,
कह गया उसके तपने की कहानी।
जल गिरा तो खिल उठे पल्लव और फूल,
दब गयी उड़ने वाली धूल॥
_____✍गीता

तपिश में इक छाॅंव..

September 2, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

उदासी का समन्दर है इन नयनों में,
उठती हैं लहरें बेचैनी की।
फिर ऑंखों से रिसता है पानी,
यही है इस जीवन की कहानी।
कोई जब लेकर आए इक नाव,
निकालने को इस समन्दर से,
मिटाने को हर इक घाव..
छलक जाता है मेरा दर्द उसके नयनों में,
दे जाता है तपिश में इक छाॅंव॥
_____✍गीता

रंग बदलती दुनियाँ

September 1, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

गिरगिट रंग बदलता है,
यह बचपन से जाना।
साॅंप डॅंक मारता है ,
यह भी हमने माना।
शेर शिकार करके खाए,
हाथी नकली दाॅंत दिखाए ।
इनकी प्रकृति ऐसी ही है,
ये प्रकृति ने ऐसे ही बनाए ।
मगर इंसान कब रंग बदल जाए,
कब डॅंक मार कर चला जाए,
यह कोई ना जाने।
कब कर दे अपनों का ही शिकार,
नकली दाॅंत दिखा-दिखा कर,
कब चुभा दे सीने में कटार॥
_____✍गीता

वो मेरा रुहानी प्यार..

August 24, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

हाथ फैला कर श्वेत कुमुदिनी सी,
वो कर रही थी मेरा इंतज़ार।
ना जाने कब से करता था मैं
उससे प्यार ।
वो मेरा रुहानी प्यार..
जिसका कभी न किया मैनें इज़हार
वो समझी तो समझी कैसे ।
यह सोच कर हैरान हूँ
बढ़ चला उसकी ओर,
आखिर मैं एक इंसान हूँ।
वो पावन पूजा के दीपक की लौ सी,
उसको अपलक मैं देख रहा।
मुस्कुरा कर कहती है मुझे फ़रिश्ता,
रुहानी प्यार का है उससे रिश्ता॥
______✍गीता

आ गया सूरज

August 17, 2021 in गीत

वृक्षों पर आ गया सूरज,
धरा पर छा गया सूरज।
बिखराकर अपनी स्वर्ण रश्मियाँ,
गीत कोई गा गया सूरज।
हल लेकर निकल पड़े किसान,
देखो आ गया सूरज।
अंधकार मिटाने धरा से,
सदियों से आता है सूरज।
नयी भोर के नित नये गीत,
हमें सुनाता है सूरज।
रौशनी बिखरती है धरा पर,
धरा को भा गया सूरज॥
_____✍गीता

वीर चिकित्सकों को प्रणाम

August 15, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कोरोना से आजादी की जंग में,
जो नित वैक्सीन लगा रहे हैं
स्वतंत्रता सेनानी से कम नहीं हैं,
वो चिकित्सक देश को बचा रहे हैं।
गाँव-गाँव, नगर-नगर में जाकर,
इस रोग के विरुद्ध कैम्प लगा रहे हैं
(15अगस्त)आजादी के इस पर्व पर,
इन वीरों को कोटिश प्रणाम,
देश की सेवा करने हेतु
गीता करती है इनका सम्मान॥
______✍गीता

स्वतंत्रता दिवस की सबको बधाई

August 14, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

शत् शत् नमन है मेरा उन वीरों को,
जिन्होंने देश को आजादी दिलवाई।
आज स्वतंत्रता दिवस की है सबको बधाई।
भारत माँ की रक्षा खातिर,
अपने सीने पर गोली खाई।
जय हिन्द का गूॅंज उठा नारा।
उत्साह की सीमा नहीं,
उत्साह बहुत ही सारा ।
शीश झुकाकर नमन है उनको,
जिन्हें है देश जान से प्यारा।
देश की रक्षा करने वालों को,
मैं कोटि-कोटि प्रणाम करुॅं।
वार दिया निज जीवन स्वदेश पर,
उनका हृदय से सम्मान करूँ॥
____✍गीता

हे प्रभु..

August 10, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

हे प्रभु,
कभी जन्म लो इस धरा पर ,
बन कर एक इंसान।
फ़िर महसूस करो उस दर्द को,
जब बिछुड़ जाए निज संतान।
अब इसके आगे क्या कहूँ,
खुलती नहीं जुबान।
खिसक गई पैरों तले ज़मीं,
और फट गया आसमान॥
______✍गीता

वृक्ष हैं कुदरत का वरदान

August 8, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

वृक्ष हैं कुदरत का वरदान,
इन्हें क्यों काट रहा इन्सान।
वृक्ष होंगे तो होगी हरियाली,
वसुंधरा पर होगी खुशहाली।
नियत समय पर वर्षा आएगी,
सूखी धरती भी अन्न उपजाएगी।
वृक्ष देते औषधि, फल और फूल,
धारण करें धरा की धूल।
वृक्ष बनाऍं पर्यावरण का संतुलन,
अति आवश्यक है इनका संवर्द्धन॥
_____✍गीता

आसमाॅं भी रो दिया सुन कर मेरी दास्ताँ

August 8, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

आसमाॅं भी रो दिया,
सुन कर मेरी दास्ताँ ।
हमने कहा चाॅंद तारों से,
कोई दूर न हो अपने प्यारों से।
ये दर्द बहुत ही गहरा है,
लगता है वक्त ही ठहरा है।
जो गया,वह लौट कर नहीं आता है,
कोई न जाने वहाँ कैसा पहरा है।
अब उसके बिना बितानी होगी,
कैसी वो जिन्दगानी होगी।
यह सोच के दिल घबराता है,
उसके बिन जीना ही नहीं आता है।
दायित्व और भी हैं लेकिन,
कैसे पूरे कर पाऊँगी।
संगी साथी सब समझाते हैं, पर..
कैसे यह विष पी पाऊँगी॥
_______✍गीता

वृक्ष हैं कुदरत का वरदान

August 7, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

वृक्ष हैं कुदरत का वरदान,
इन्हें क्यों काट रहा इन्सान।
वृक्ष होंगे तो होगी हरियाली,
वसुंधरा पर होगी खुशहाली।
नियत समय पर वर्षा आएगी,
सूखी धरती भी अन्न उपजाएगी।
वृक्ष देते औषधि,फल और फूल,
धारण करें धरा की धूल।
वृक्ष बनाऍं पर्यावरण का संतुलन,
अति आवश्यक है इनका संवर्द्धन॥
_____✍गीता

मात-पिता की सेवा

August 6, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

भेजकर आश्रम में माता-पिता को,
वह बहू-बेटा बहुत खुश हो रहे थे।
चुपचाप चल दिए वे बुजुर्ग दंपत्ति,
घर को छोड़ते वक्त बहुत रो रहे थे।
सोच कर मुसीबत गई घर से,
वो बहू-बेटा राहत महसूस कर रहे थे।
बारह बरस का पुत्र उनका,
चुपचाप सब देख और समझ रहा था।
बोला, माँ मैं शादी नहीं करूंगा,
क्यों मेरे लाल ऐसा क्यों बोलता है
शादी करेंगे तेरी, बहू आएगी घर में,
देखना कितनी रौनक लाएगी घर में।
कोई लाभ नहीं है माँ ,
जब तुम दादा-दादी बन जाओगे
फिर तुमको भी आश्रम जाना होगा,
कैसे सब कुछ सह पाओगे ।
तब ऑंख खुली उसके मात-पिता की,
शर्मिंदगी से गर्दन झुक गई
उनके अंतर के पाट खुले,
मन के सारे मैल धुले
जो बोओगे वही काटना है।
बोले, बस अब और नहीं,
अब मात-पिता को घर लाना है।
मात-पिता की सेवा करके,
बस अब पुण्य कमाना है॥
____✍गीता

भीग गया मन म्हारा

August 5, 2021 in गीत

सावन में,
पड़ी जब बरखा की फुहार,
मौसम भी बदल गया
और ठंडी चली बयार ।
चिरैया फुदक रही वृक्षों पर,
मेघों ने गाया राग मल्हार।
रिमझिम बूंदें बरस रही हैं,
भीगा ऑंगन सारा ।
भीगे सारे बाग बगीचे,
भीगा दुपट्टा सारा ।
केश भी भीगे, वेष भी भीगे
भीग गया मन म्हारा॥
______✍गीता

म्हारा का अर्थ है… हमारा

दोस्त

August 1, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

मिलते हैं कुछ फ़रिश्ते ज़िन्दगी में,
बना देते हैं रिश्ते ज़िन्दगी में,
साथ निभाऍं हॅंसते-हॅंसते,
ज़िन्दगी में।
टूट जाए जब दिल, जिगर
हो कर निराश, हम जाऍं बिखर,
तब करते हैं वो बहुत फ़िकर।
कीमती समय अपना देकर,
हौसला नहीं टूटने दें मगर।
करते हैं मदद इक आह पर,
पलकें बिछा दें राह पर
जिन्हें दर्द का एहसास हो,
पड़े जरूरत तो वो पास हो,
वजह बनें मुस्कान की,
दर्द की बन जाऍं दवा,
हो उन पर अभिमान
उन्हें हम दोस्त कहते हैं ज़िन्दगी में..
मिलते हैं कुछ फ़रिश्ते ज़िन्दगी में॥
______✍गीता

मित्रता दिवस की शुभकामनाएँ

कड़वी दास्ताँ..

July 31, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कुछ लोग रोटियाँ सेकने आ गए जब जलने लगा मेरा मकाॅं।
किसी के नुकसान की ,
यही है कड़वी दास्ताॅं।
बुझाने आग ,
एक हाथ भी नहीं आया ।
देने को मेरा साथ,
कोई साथ भी नहीं आया।
तमाशा बना दिया है जख़्म को मेरे
देखने सब आते हैं,
कोई मरहम नहीं लाया॥
_____✍गीता

जब जीवन की हो अंधियारी रात

July 24, 2021 in गीत

मोहब्बत की अद्भुत है दास्तान,
कब शुरू हुई और
कब चढ़ी परवान।
चाॅंद तारों की ख्वाहिश नहीं है,
बस मिले मधुर मुस्कान ।
या फ़िर हो सुगन्धित फूल,
कुछ कम हों हृदय के शूल।
जब ऑंखें नम हों जाऍं मीत,
कह देना तुम कोई गीत।
जब जीवन की हो अंधियारी रात,
रौशन कर देना, देकर साथ।
नहीं रहेंगी फिर ऑंखें नम,
मिट जाऍंगे सारे दर्द-ओ-ग़म॥
_____✍गीता

आपकी ख़ामोशियाँ

July 21, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

आप कुछ कहें न कहें,
सब कुछ कह जाती हैं हमसे,
आपकी ख़ामोशियाँ।
ख़ुशियों का इज़हार भी करती और
बता देती हैं आपकी परेशानियाँ,
आप कितना भी छुपा लो,
ग़म और ख़ुशी कितना भी दबा लो,
आपकी सुनती ही नहीं हैं..
चुगली कर जाती हैं हमसे,
आपकी खामोशियाँ॥
____✍गीता

आपकी ख़ामोशियाँ

July 21, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

आप कुछ कहें न कहें,
सब कुछ कह जाती हैं,
आपकी ख़ामोशियाँ।
ख़ुशियों का इज़हार भी करती और
बता देती हैं आपकी परेशानियाँ ।
आप कितना भी छुपा लो,
ग़म और ख़ुशी कितना भी दबा लो,
आपकी सुनती ही नहीं हैं..
चुगली कर जाती हैं हमसे,
आपकी खामोशियाँ॥
____✍गीता

रिमझिम बूंदें

July 20, 2021 in गीत

रिमझिम बूंदे बहुत हैं बरसीं,
अखियाँ तुझे देखन को तरसीं।
बिजली चमक रही है चम-चम,
बरस रहा है पानी छम-छम।
नभ में काली बदली छाई,
शीतल पवन याद ले आई।
सूर्य नहीं आज अम्बर में,
बादल कर रहे मनमानी,
भीगी मेरी चूनर धानी॥
_____✍गीता

बहुत दिन बीते..

July 19, 2021 in गीत

दिल से नहीं निकली,
तेरे चले जाने की बात।
सुकून से नींद नहीं आई किसी रात।
बुरा वक्त बीत जाता है ,
यही सुनते आए थे..
हमारा नहीं बीत रहा है,
कैसे हुए हालात।
ऑंखों में रहती है तस्वीर तेरी,
रुठ सी गई है तक़दीर मेरी
भुला ही नहीं पाती हूँ,
तेरी याद बहुत आती है
कैसे सम्भालूँ दिल और
कैसे सम्भालूँ जज़्बात
आ जाऊँ तेरी दुनियाँ में मुझे पता बता दे,
बहुत दिन बीते..
नहीं की तुझसे कोई बात॥
____✍गीता

शीतल पवन का झोंका

July 16, 2021 in गीत

आहिस्ता-आहिस्ता मौसम बदल रहा है।
एक शीतल पवन का झोंका मुझसे बोल रहा है..
‘मुझे तेरा ताप है कम करना’,
फिर ना ऑंखें नम करना।
हिय में छुपाकर ग़म अपने,
तुम धीरे-धीरे कम करना ।
बादल बना कर लाऊँगा,
नेह नीर बरसाऊँगा ।
हृदय की तपिश कम करके,
तेरे अधरों पर फ़िर से
मुस्कान सजाऊँगा॥
_____✍गीता

बीती बातें

July 15, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

बीती बातों को याद कर,
मत कुरेदना अपने घावों को।
ह्रदय में ही रहने देना,
अपने हृदय के भावों को ।
मरहम नहीं लगाती दुनियाँ,
मरहम की मत करना आस।
केवल ज़ख्म देखना चाहती है,
नहीं करे दर्द का एहसास॥
______✍गीता

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