दिन का वो कोना
November 8, 2019 in Other
दिन का वो कोना जिसे सब शाम कहते हैं ,
मैं उनको काट कर अलग रख देता हूँ..
मेरी सब शामें बंद हैं अलमारी में बरसों से…
चुभती हुई रातों से जो एक सुई मिल जाए,
तो लम्बे से दिनों से एक धागा मांगूँ..
उन टुकड़ों को सी कर..
एक चादर जो बन जाए कभी..
तो पूरे दिन को मैं शाम की तरह जी लूँ.