Mehmoodazmi khan
कशमकश
January 5, 2026 in ग़ज़ल
खुद से ही एक जंग लड़ रहा हूं मैं
खुद को समझ रहा हूं, दिल को मना रहा हूं,
अन्दर ही अन्दर तिल तिल मर रहा हूँ मैं,
क्या है आरजू, क्या है तमन्ना मेरी,
क्या तुझे बताऊँ मैं,
ना तुझे पाने की चाहत है,
ना इश्क जुनून मेरा,
तू है किसी और की अमानत, ये भी जानता हूं मैं,
ना जा जाने क्या बात है तुझमें सनम,
क्यू तुझसे बिछड़ने से डर रहा हूँ मैं।
By-M.A.K