Rao Chandra Sekhar Singh
मेरी पंक्तियां
June 23, 2023 in Other
वाकया : बुरे फंसे…
वो हमें लंबी सैर पे ले गए,
माना, अच्छे – से घूमा लाए।
ये उनका शहर था जो ले गए,
फिर हमारे यहां आए, चले गए।
हां वो सैर वाले, नहीं मिल पाए,
हम वो दोबारा नहीं पलट पाए।
खुशनसीब हैं ये रंग भी, अपने रंगीन होने से नहीं ।
इसका राज भी तुम्हारा खूबसूरत होना ही है….