ek sher

April 13, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

मैं कफ़न में बूत पड़ा था
जश्न मेरा सर-ए-आम निकला
ऐ बन्दे तुझे ज़मीन मुबारक
मुक़द्दर में मेरे आसमान निकला

ek sher

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

हंस देते अगर कभी हँसना सीखा होता
हाथ थामे रही शाम-ए-उल्फ़त हमारा
बता देते धुप क्या है
अगर सेहर में आफताब को देखा होता

-सत्य ‘प्रिय’ खन्ना

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