दो दिल

May 1, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

झुकी-झुकी सी नजरे उसकी

जैसे है तीर चलाये

साह-ए-दिल घायल हुआ

खुद के जख्मी दिल को सहलाये