ओ नील गगन के सौदागर,,
हवा में उड़ना तेरी फितरत है,
मुझे भी अपनी पंख दे दे पंछी ,
मैं भी ऊरु उस नील गगन में,
उड़ कर उस नभ को छू लूं ,
क्या जानू वह कैसा है ?
तू ही बता दे पंछी ,
बादल सच में पास से कैसा है ?
ओ नील गगन के सौदागर ,
हवा में उड़ना तेरी फितरत है,
इच्छा होती सूरज देखूं चंदा देखू,
तारे और सितारे देखू,
मैं भी उरू उस नील गगन में ,
उडकर उस नभ को छू लूं ,
क्या जानू वह कैसा है?
तू ही बता दे पंछी ,
सारे नजारे सच में पास से कैसा है?
O nil gagan ke saudagar
Comments
6 responses to “O nil gagan ke saudagar”
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सुंदर रचना
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Thanks
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वाह
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Thanks
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Nice
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Thanks
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