राह तकती है तेरी,नजरें मेरी,
तेरे बगैर सुना सुना है जहां मेरा,
तुझे पास बुलाती है निगाहें मेरी,
इस कदर तुम चले गए जिंदगी से मेरी,
तेरे बिना यह दुनिया है विरान मेरी,
जिगर को बांध के रखी हूं अपनी,
बिखर न जाए टूट कर ये कहीं,
आ जाओ तुम मुकद्दर में मेरी |
Rah takti hai najre meri
Comments
11 responses to “Rah takti hai najre meri”
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बहुत सुंदर रचना
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Thaks
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wah
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Thanks
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Nice
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Thanks
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हृदय द्रवित कर दिया
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Thanks Nimisha ji
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😍
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वाह जी वाह
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Thanks
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