ღღ__प्यार को अशआरों में, बयान करना बड़ा मुश्किल है;
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ये तो अच्छा हुआ, निगाहों की हर बात वो समझते रहे!!….#अक्स
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ღღ__प्यार को अशआरों में, बयान करना बड़ा मुश्किल है;
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ये तो अच्छा हुआ, निगाहों की हर बात वो समझते रहे!!….#अक्स
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ღღ__सुलगती रहीं तुम्हारी यादें “साहब”, कल फिर से रात भर;
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मैं जलता रहा तमाम रात, फिर से आंसुओं की बारिश में !!….#अक्स


तेरा सजदा – 117
कोई तेरी खुदाई में घुल, ख़ुद को खुदी भुलाई है
कोई अपनी खुदी में घुल, तेरी खुदी भूलाई है
…… यूई
तेरा सजदा – 116
कोई लाज-शर्म-हया-तेह्ज़ीब भूला तुझमें जान बसाई है
कोई लाज-शर्म-हया-तेह्ज़ीब भूला दुनिया में जान बसाई है
…… यूई
तेरा सजदा – 115
कोई जग की बेजड़-सोचें छोड़, तेरी ही सोच मन मन्दिर रचाई है
कोई जग की सब सोचे जोड़, सिर्फ़ तेरी सोच ही बस भुलाई है
…… यूई
तेरा सजदा – 114
कोई मन डोर तुझमें बंधवा खुदी ख़ुद से गँवाई है
कोई मन डोर ख़ुद में बंधवा खुदी स्दीवी गँवाई है
…… यूई
तेरा सजदा – 113
कोई तेरे इश्क में पूरा सौदाई है
कोई तेरे इश्क में भी हरजाई है
…… यूई
तेरा सजदा – 112
कोई मुश्क़िल हर पार कर तुझको स्दीवी पा जाता है
कोई मुश्किलों का राग आलाप तुझको खो जाता है
…… यूई
तेरा सजदा – 110
कोई तेरी जटिल राह् को अटल इरादों से पार कर जाता है
कोई तेरी जटिल राह् में कुछ कदमों में ही बहक जाता है
…… यूई
तेरा सजदा – 109
कोई तुझमें सिमट कर सकून पाता है
कोई तन में सिमट कर सकून पाता है
…… यूई
तेरा सजदा – 108
कोई तेरी आग में ख़ुद को जला जाता है
कोई ख़ुद की आग में सबको जलाता है
…… यूई
तेरा सजदा – 106
कोई तेरे पावन इश्क़ की रो में सर झुका कर बैठा रह्ता है
कोई ख़ुद की दुनियावी चाहतों में नशों में लिप्त रह्ता है
…… यूई
तेरा सजदा – 105
कोई अपनी हर सफलता को तेरी दुआ कह जाता है
कोई अपनी हर सफलता में ख़ुद की दुहाई देता है
…… यूई
तेरा सजदा – 103
कोई तुझे पाने के इंतज़ार में ही मस्त रह्ता है
कोई ख़ुद की चाहों को पाने में ही खोया रह्ता है
…… यूई
तेरा सजदा – 102
कोई तेरी जूठन को भी चूम कर अपनाता है
कोई तेरे प्रशाद में भी स्वाद ढूंढ़ ना पाता है
…… यूई
तेरा सजदा – 101
कोई बिना ख्वाहिश के आजन्म तुझ्से मिलते रह्ता है
कोई बिना ख्वाहिश के कभी याद भी ना तुझे करता है
…… यूई
तेरा सजदा – 100
कोई बंद आँख कर तेरे मन में उतर जाता है
कोई खुली आँखों से भी तुझे ना जान पाता है
…… यूई
तेरा सजदा – 98
कोई आँख खुलते ही तुझको सामने पाता है
कोई आँख खुलते ही पहले ख़ुद को धियाता है
…… यूई
तेरा सजदा – 96
कोई हर वक्त में बस तेरा ही रह्ता है
कोई हर वक्त में बस ख़ुद का ही रहता है
…… यूई
तेरा सजदा – 95
किसी का तुझसे मिलके जीना हो जाता है
किसी का बस ख़ुद में ही जीना रह्ता है
…… यूई
तेरा सजदा – 94
कोई मैं से तूं हो गया है
कोई तूं को मैं कर रहा है
…… यूई
तेरा सजदा – 93
कोई हर पल तुममें सिमटा रह्ता है
कोई हर पल ख़ुद में सिमटा रह्ता है
…… यूई
तेरा सजदा – 92
कोई अपनी दुआओं का असर तुमपे जमा गया है
कोई अपनी दुआओं की खाली पोली खोल गया है
…… यूई
तेरा सजदा – 91
कोई तुमसे मिल कर थम गया है
कोई तुमसे मिल कर चल गया है
…… यूई
तेरा सजदा – 90
कोई औरन के दर्द को हरता रह्ता
कोई औरन को दर्द में डालता रहता
…… यूई
तेरा सजदा – 89
कोई तेरे मन की ख़ुशियों में ही खुश रह्ता
कोई ता उमर ख़ुद की ख़ुशियाँ लोच्ता रह्ता
…… यूई
तेरा सजदा – 88
कोई तेरे नूरानी नूर में रौशन रह्ता
कोई दुनियावी नूर में खोया रह्ता
…… यूई
तेरा सजदा – 87
कोई तेरे इशक की इबादत में नाच्ता रह्ता
कोई वासना की झमेलों में बंधा मरता रह्ता
…… यूई
तेरा सजदा – 86
कोई तेरी बँदगी मैँ झुका हुआ रह्ता
कोई ख़ुद की बँदगी में खोया रह्ता
…… यूई
तेरा सजदा – 85
कोई सबको यहा ख़ुद सा ही पाता
कोई किसी को यहा ख़ुद सा ना पाता
…… यूई
तेरा सजदा – 84
कोई तेरी पहचान यहां ख़ुद बन जाता
कोई ख़ुद की पहचान भी ना बना पाता
…… यूई
तेरा सजदा – 82
कोई सब में तुझको देख् पाता
कोई ख़ुद मेे ही ना तुझे देख् पाता
…… यूई
तेरा सजदा – 81
कोई पल पल तेरी पहचान बनता
कोई ख़ुद की भी पहचान गँवा जाता
…… यूई
तेरा सजदा – 80
कोई ख़ुद को तेरे अन्दर समा जाता
कोई ख़ुद के अन्दर ही उलझा रह्ता
…… यूई
तेरा सजदा – 77
कोई तेरे सामने आ तुझसे नज़रे मिलाता
कोई तेरे सामने आ तुझसे नज़रे चुराता
…… यूई
तेरा सजदा – 76
कोई तेरे पास सर उठा कर आता
कोई तेरे पास सर झुका कर आता
…… यूई
तेरा सजदा – 75
कोई गहन मुश्किलों में ईमान ना गिराता
कोई रंगीनियों में डूब जीवन बिताता
…… यूई
तेरा सजदा – 74
कोई अपनी रूह को तुझमें समाता
कोई अपनी रूह को दागदार कर जाता
….. यूई
तेरा सजदा – 73
कोई किसी का दिल ना दुखाता
कोई सबको खून के आँसू रुलाता
….. यूई
तेरा सजदा – 72
कोई जीवन से तुझे कमा जाता
कोई जीवन को यूँ ही गँवा जाता
….. यूई
तेरा सजदा – 70
कोई प्यार पर दुनीया का विश्वास बड़ा जाता
कोई प्यार को हर दिल से मार मुकाता
….. यूई
तेरा सजदा – 69
कोई तेरी हर शय से प्यार निभाता
कोई तेरी हर शय को मार मुकाता
….. यूई
तेरा सजदा – 67
कोई पल पल तेरे नाम से डरता
कोई तेरे नाम से लोगो को डराता
….. यूई
तेरा सजदा – 66
कोई हर पल तेरे सरुर में रह्ता
कोई हर पल ख़ुद के ग़रूर में रेह्ता
….. यूई
तेरा सजदा – 65
कोई खुद की खुशियाँ है चाहता
कोई अपनी ख़ुशियाँ लुटाना है चाहता
….. यूई
तेरा सजदा – 64
कोई तुझसे मुश्किलों के हल है चाहता
कोई तुझसे खुशियों के फल है चाहता
….. यूई
तेरा सजदा – 63
कोई खुद के लिए उपहार है चाहता
कोई दूसरों पर न्योछावर कर जाता
….. यूई
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