तेरे दिल के रंग सुनसान से पाए तेरी आँखों में ख्वाब वीरान से पाए तेरे मन की उमंगें निर्जन सी पाई तेरी राहे ख़ुद से अनजान सी पाई तेरे मन की बातें बेजान सी पाई […]
तेरे दिल के रंग सुनसान से पाए तेरी आँखों में ख्वाब वीरान से पाए तेरे मन की उमंगें निर्जन सी पाई तेरी राहे ख़ुद से अनजान सी पाई तेरे मन की बातें बेजान सी पाई […]
समुंदर में रह कर भी तूं प्यासा क्यों है अरमानो भरा प्यार पाकर उदासा क्यों है उदासी अपनी की वज़ह तो बता इक बार तमाम खुशियाँ जीवन की दूँ तुझ पे वार ……यूई
क्या हुआ आज एक हाथ ही तो छूटा है वक्त-बेवक्त कईयों को तूने भी लूटा है लूटते हुए जो खुशियाँ खिलीं थी सीने में वोही तो लौटी हैं आज बन खंजर सीने में ……यूई
उम्मीद टूटी तो रोता क्यों है ख़ुद पे भरोसा खोता क्यों है ……यूई
दिल से गर तूं साँचा है यार के दिल का कांचा है ……यूई
वफ़ा कहने को बस एक लफ्ज निभाना इसको है सबसे सहज़ अडिग है गर तेरा खरा ईमान ता-उमर पयेगा साथ निष्ठावान ……यूई
इल्ज़ाम-ए-बेवफाई सच तो नही झूठे तेवर आपको जच्ते नही आईने आपके घर में टूट गए या आपने सँँवरना छोड दिया ……यूई
क्या फिज़ा यहाँ की बदरंग हुई यहाँ सोच ही सब की तंग हुई ……यूई
बिकती नही वफाएँ बाज़ारों में दिखती भी नही यह हजारों में ……यूई
बदला ख़ुद को तो कुछ पा जाएगा ना बदला ख़ुद को सब खो जाएगा ……यूई
. ღღ__रात के सन्नाटे की, कुछ ऐसी आदत लगी है “साहब”; . कि सुबह के शोर में हमसे, अब और जिया नहीं जाता!!….#अक्स .
. ღღ__तेरी पहली नज़र का रंग ही, अब तक उतरा नहीं “साहब”; . हम किससे खेलें होली, हमपे कोई रंग डालता नहीं !!…..#अक्स .
वफाएँ चाहते हो सच मैं ही पाना दिल को बना लो वफादार तुम जाना …… यूई
बेवफाईया जो तूने उमर भर लुटाई हैं वोही लौट कर वापस पास तेरे आयीं हैं …… यूई
तुझे पाने वाला ख़ुद का नसीब कहता है लुटने वाला ख़ुद को बदनसीब कहता है हैं दोनों ही तेरी राह् के भटके मुसाफिर तूँ तो दोनों को ख़ुद की औलाद कहता है …… यूई
वफा वोह अनमोल कमाई है जो सबके नसीब ना आयी है …… यूई
ता-उमर लगायी दौलत कमाने मैं तूने जो कमाया अब वोही तो तेरा है बंदिया बेवफ़ाई पे मेरी क्यों तूँ इतना बिखर गया वफ़ा तूने क्मायी ही कहा, जो ढूँढे बंदिया हाँ दौलत से मिलती नही […]
उम्मीदों की तामीर की ख्वाबों की बुनियाद पे अब क्या शिकवा करे अपनी ही बुनियाद से …… यूई
इंतज़ार में रखना है तो फितरत उम्मीद की इंतज़ार में मरना है किस्मत विश्वास की …… यूई
हमनें पूछा उम्मीद से फिर दे गई धोखा उम्मीद ने कहां मैं और धोखा यह तो तेरा तुझको ही धोखा …… यूई
उम्मीद की तो फितरत है धोखा किस उम्मीद ने तुझे है रोका …… यूई
ज़िन्दा रहना उम्मीद के सहारे है बस रहना जैसे डूबते किनारे …… यूई
तेरे हौंसलों में मैं ज़िन्दा थी तेरे जाते ही मैं बस खो गयी शरीर तेरा था तूँ ले जाता मन का साथ तो दे जाता तेरे मन का साथ मरते ही उम्मीदे मेरी सारी खो […]
डूबना मेरी कश्ती का हो गया था तय तभी जब छोड़ साथ अपनों का अर्पण किया था तुझे सभी …… यूई
मालूम हैं मुझे के में ना खरा उतरा तेरी आस्मानी उम्मीदो के पैमानों पर हाँ मैँ ही तुझे यह समझा ना पाया इंसानो को नही तौलते खुदा के पैमानों पर …… यूई
मैंने उम्मीद की इसका गम नही इससे समझा के तूँ मेरा हमदम नही …… यूई
ऐसा नही के उम्मीद पूरी नही होती होती है पर हजारों में एक होती है …… यूई
गुनाह् नही, कोई उम्मीद करना गुनाह् है , उम्मीद को ना-उम्मीद करना …… यूई
उम्मीद तेरी यह कैसे होती पूरी इमारत की तामीर थी हवाओं में …… यूई
वफाएँ हासिल करने का दम भरते हो सर उठा कर चेहरा तो देख आईने में …… यूई
अता ना की होती यह गर रोशनी ख़ुद की तूने सोच तो मैं क्या ही पता लिखना तो कभी ना भाता …… यूई
लिखवाता जा रहा है तूँ मुझसे नाम मेरा हो रहा है रोशन मैंने भी ना रखा कुछ मुझमें रोज़ किया तेरा नाम रोशन …… यूई
कहने को बस नाम हो रहा मेरा तू तो जानता है यह है काम तेरा …… यूई
उसकी रज़ा में रह्ता हूँ ख़ुद में ही मस्त रह्ता हूँ खामोशियाँ मेरा गहना हैं मैं उनमें उसमें रह्ता हूँ ….. यूई
खामोश हूँ कमजोर नही जमाने ने मारा है मुझे मैंने जमाने को नही अबकी बारी मेरी है ….. यूई
खामोशियोँ को मेरी कमजोरी ना समझ हालत को समझा है मैंने, हारा नही ….. यूई
मैं खामोश हूँ खामोश ही रह्ने दो सिमटा हूँ ख़ुद में सिमटा ही रह्ने दो ….. यूई
जब सब शोरो-ओ-गुल से खेला लिए तब खामोशियोँ की चादर ओड़ा लिए ….. यूई
ख़्वाहिशें दिल में ही दफन होती हैं कह्ते हैं दिल की भी ज़ुबान होती है यह कभी ना बोल के बयाँ होती है खामोशियाँ ही इसकी पहचान होती है ….. यूई
कह्ते हैं सब में रह्ता तूं क्यों इतने दुःख सह्ता तूं क्या इससे बेहतर काम नही या हममें तुझको मान नही ….. यूई
मैं इतने जो पाप करूँ क्यों मैं इतना नीचे गिरूँ क्या मैं तेरे जैसा नही या तेरा मैं वो रुप नही ….. यूई
. ღღ__क्यूँ उड़ा-उड़ा सा लगता है, तुम्हारे चेहरे का रंग “साहब”; . सब लोग तो कर रहे हैं, कि रंगों का त्यौहार आया है !!…..#अक्स .
. ღღ__ना कोई उम्मीद, ना तड़प, ना ही इंतज़ार किसी का; . कितना अच्छा होगा वो जहाँ, जहाँ मोहब्बत नहीं होगी !!….अक्स .
ए ज़िन्दगी लाखों अवरोधों से लड़ हमने तेरी नैया पार लगायी है …… यूई
कुछ ख्वाब होते हैँ जलती चिंगारी उनका मिट कर बुझना है ज़रुरी कुछ ख्वाब होते हैँ मौत से भारी उनको जन्मा कर मिटाना भी ज़रुरी …… यूई
ए ज़िन्दगी ए ज़िन्दगी तुझे हर हाल में चाहने की कसम हमने खाई है …… यूई
. . ღღ__ख़ुदा से माँगते क्यूँकर, भला हम, दुआएँ उनके रोने की; . वो इश्क करने लगें किसी से, सज़ा को इतना ही काफी है!!…..#अक्स .
. ღღ__कल फिर आईने ने मुझसे, ये पूछ ही लिया “साहब”; . कि कहाँ रहते हो आज-कल, और कबसे चेहरा नहीं देखा!!…..#अक्स .
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