Tujhe bhul na pai ab tak

तुझे भूल न पाई अब तक
आंखों में तुम बसे हो अब तक
आंखों में तेरी थी समंदर की गहराई
जो भूल न पाई अब तक
बातों में तेरी थी झरनों की सरगम
जो कानों में मेरे गूंजती है अब तक
ठंडी हवा का झोंका सा था तेरा आना
जो मुझे महसूस होता है अब तक
छोड़कर जो चले गए तुम मुझे
क्या मैं याद नहीं आई तुझे अब तक
गुजरेगी जिंदगी क्या तन्हाई में तेरी
कितने निष्ठुर हो तुम यह जान गई मैं अब तक


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2 Comments

  1. Abhishek kumar - December 25, 2019, 9:55 pm

    Good

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