कतरा कतरा रिसते रहे हम

कतरा कतरा रिसते रहे हम

उनके इश्क़ में

अपने ही अंदाज में हम

उम्मीद है की नजर न होगी

कोई शख्सियत तेरे इतिहास में हमे

मगर एक आरज़ू है मगर दिल में

एक नजर भर देख लीजिएगा

लिपटे स्याह सफ़ेद लिबास में हमें ।।

#suthars’

 

 

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2 Comments

  1. Priya Bharadwaj - May 27, 2016, 12:01 pm

    pretty poem 🙂

  2. Anoop - June 7, 2016, 9:18 pm

    Gzb

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