वो माटी के लाल

वो माटी के लाल

वो माटी के लाल हमारे,

जिनके फौलादी सीने थे,

अडिग  इरादो ने जिनके,

आजादी के सपने बूने थे,

हाहाकार करती मानवता,

जूल्मो-सितम से आतंकित

थी जनता, भारत माता की

परतंत्रता ने उनको झकझोरा था,

हँसते-हँसते फाँसी के फँदे

को उन्होंने चूमा था,

वो माटी के लाल हमारे,

राजगुरू, सुखदेव,भगतसिंह ,

जैसे वीर निराले थे ,

धधक रही थी उनके,

रग-रग में स्वतंत्रता

बन कर लहू, वो दीवाने थे,

मतवाले थे, भारत माता के,

आजादी के परवाने थे,

बुलन्द इरादों ने जिनके,

स्वतंत्रता की मशाल जलायी थी ,

भारत माता की बेड़ियों को,

तोड़ने की बीड़ा उठायी थी,

अंग्रेजों के नापाक मनसूबों को,

खाक में मिलाने की कसम खायी थी,

वो  देश के सपूत हमारे,

माटी के लाल अनमोल थे,

देश हित में न्यौछावर,

करने को अपने प्राणों की

बाजी लगायी थी, वो माटी के लाल,

हमारे माँ के दूध का कर्ज,

उतार चले,उनके जज्बों को

शत-शत नमन, बुलंद इरादों

को सलाम है,हर एक भारतवासी को,

उनके कारनामों पर गुमान है ।

आज फैल रही भ्रष्टाचार,

नारियों की अस्मिता पर,

हो रहे प्रहार से पाने को निजाद,

माँ भारती पुकार रही,

फिर अपने दिवाने,आजादी के

परवाने ,उन माटी के लालों

का  पथ निहार रही ।।






 

 

 


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

किसान का दर्द

क्या तुम अब भी वैसे ही जीते हो?

Saheedi

जब छूटेंगे हम तीरों से

15 Comments

  1. Manikanth - March 18, 2017, 7:23 pm

    Amazing 🙂

  2. Aditya - March 20, 2017, 11:54 am

    Wonderfully written. Great emotions and excellent use of Words.

  3. Sridhar - March 21, 2017, 6:09 pm

    nice

  4. Panna - March 21, 2017, 8:54 pm

    nice one

  5. Dinesh - March 22, 2017, 12:37 am

    nice 🙂

  6. Abhishek kumar - November 26, 2019, 2:48 am

    Jai ho

Leave a Reply