अंधा और लंगड़ा

एक था अंधा
एक था लंगड़ा ।
दोनों का याराना
हो गया तगड़ा।।
आग लगी
जब गाँव में ।
सब भागने लगे
शीतल छाँव में।।
कोई बता न पाया
अंधा को।
कोई भगा न पाया
लंगड़ा कै।।
अंधे का सहारा लंगड़ा
और लंगडे का सहारा अंधा।
राह बतावे लंगड़ा
चढ़ ऊपर अंधे का कंधा।।
बचाव हुआ दोनों का
और बन गए एक मिसाल।
‘विनयचंद ‘जो नेक भाव हो
सब रहे सदा खुशहल।।


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4 Comments

  1. Pragya Shukla - May 16, 2020, 12:17 pm

    Nice

  2. Dhruv kumar - May 16, 2020, 4:20 pm

    Good

  3. Abhishek kumar - May 16, 2020, 7:41 pm

    Good

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