अब होश ना रहे

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ऐ साकिया अब होश ना रहे, तू इतना पीला ।
फिर ना जिंदगी से करूं, कोई शिकवे-गिला ।

करते रहे हम सारी उम्र, बेपनाह बवफाई,
बेवफाई के सिवा हमें, और कुछ ना मिला ।

जिसे ज़िंदगी समझा, उसने ही लूट ली जिंदगी,
मेरी मुहब्बत का तूने, दिया है अच्छा सिला ।

बागबां ने ही उजाड़ कर रख दिया, खुद बाग,
फिर ना कभी बहार आई, ना कोई गुल खिला ।

अब ना रही जिंदगी से कोई, जुस्तजू ना आरज़ू,
खुद ‘देव’ माँगे ख़ुदारा बस मुझे तू मौत दिला ।

देवेश साखरे ‘देव’

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14 Comments

  1. NIMISHA SINGHAL - October 31, 2019, 12:35 pm

    सुंदर रचना

  2. Poonam singh - October 31, 2019, 3:39 pm

    Nice

  3. Kumari Raushani - October 31, 2019, 6:03 pm

    बेहतरीन

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 1, 2019, 1:02 pm

    Atisunder

  5. महेश गुप्ता जौनपुरी - November 3, 2019, 8:42 pm

    वाह बहुत सुंदर

  6. Abhishek kumar - November 24, 2019, 11:52 pm

    वाह रे वाह

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