Radha ke dukh

तुझे मेरी याद न आई,
ओ कान्हा तूने कैसी ये प्रीत निभाई,
छोड वृंदावन चले गए तुम,
लौट के फिर आए नहीं तुम,
हमजोली संग रास रचाया,
गोपियों को भी खूब सताया,
,तूझ बिन मै तो सूझ बुझ खोई,
अंखियो मे अब नीद नही है,
नयनो से आसू बहते है,
वादे जो मुझसे किये थे,
फिर क्यों हमें भूल गए बनवारी,
ओ कान्हा तूने कैसी ये प्रीत निभाई,
तुझ बिन सूनी वृंदा की गलियां,
कैसे बीतेगे दिन ये रतिया
लौट के तुम आए न एक बार,
भेज दिए उद्धव को मेरे पास,
तुम्हें मेरी याद न आई,
ओ कान्हा तूने कैसी प्रीत निभाई |


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12 Comments

  1. NIMISHA SINGHAL - October 31, 2019, 3:42 pm

    Bhut sunder 🌺

  2. Kumari Raushani - October 31, 2019, 6:03 pm

    वाह

  3. राही अंजाना - November 5, 2019, 3:05 pm

    Wah

  4. nitu kandera - November 8, 2019, 10:31 am

    Good

  5. Abhishek kumar - November 24, 2019, 11:52 pm

    🙏🙏🙏

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