अम्मा भई बाँवली..

सीतापुरिया अवधि:-
राति क द्याखँइ चांद-सितारा
दिनमाँ चांद निहारइ
दिन भरि छोटुआ-छोटुआ
कहिके अम्मा लाल पुकारइ
अम्मा भई बाँवली।
टूटी खटिया फटी चटाई
जब अम्मा पहुड़इ
चरमर-चरमर होइगइ पाई।
अम्मा भाई बाँवली…
घुटनन माँ तनिकऊ
बूत नाइ
तबहूँ लाठी लइकई
दिनु भरि
आइसी–वइसी दऊरईं ।
अम्मा भई बाँवरी…
बहुरिया लईके आवइ खाना
बुदु बुदु बुदु बुदु
अम्मा ब्वालई।
अम्मा भई बाँवली…


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8 Comments

  1. Abhishek kumar - May 19, 2020, 12:10 am

    बहुत नीक कविता हइ 👏👏👏

  2. Rishi Kumar - August 27, 2020, 9:38 pm

    😃😃😃🙏🙏🤦‍♂️

  3. प्रतिमा चौधरी - September 26, 2020, 3:37 pm

    बहुत सुंदर पंक्तियां

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