आप इस जिन्दगी को

आफ़ताब का उजाला औऱ
शीतलता हो शशि की
आप इस जिन्दगी को
बड़ी सौगात रब की।
आप गर जिन्दगी में
न होते तो कहें क्या
कहानी ही न होती
बिखर जाती ये कब की।

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Responses

  1. बहुत ख़ूबसूरत पंक्तियां हैं सतीश जी कविता पढ़ के समीक्षा के लिए शब्द ही नहीं मिल रहे हैं। लाजवाब…काबिले तारीफ़।
    इतनी सुन्दर कविता लिखते हैं आप…आपसे सीखना पड़ेगा ।

    1. इतनी शानदार समीक्षा करती हैं आप, धन्यवाद शब्द भी कम पड़ जाता है। अभिवादन के सिवा क्या कहें। लेकिन लेखनी आपकी जबरदस्त है।

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